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J.K.Rajhansh
*पुसौर का दर्द: 2 करोड़ खर्च फिर भी नहीं बनी सड़क, कॉलेज जाने के लिए कीचड़ में जिंदगी दांव पर लगा रहे छात्र*
रायगढ़ जिले के पुसौर में विष्णुचरण गुप्ता कॉलेज का भवन तो 2022 में बन गया, लेकिन बोरोडीपा से कॉलेज तक डेढ़ किमी की सड़क आज भी खेत जैसी। ठेकेदार की लापरवाही, नगर पंचायत की उदासीनता और छात्रों की मजबूरी की पूरी कहानी
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### *रायगढ़, छत्तीसगढ़।*
आजादी के 75 साल बाद भी छत्तीसगढ़ के गांवों में बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष जारी है। सरकार एक तरफ “पढ़ेगा इंडिया तभी बढ़ेगा इंडिया” का नारा दे रही है। दूसरी तरफ रायगढ़ जिले के पुसौर नगर पंचायत क्षेत्र में एक ऐसा उदाहरण है जहां सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च करके कॉलेज का भवन तो खड़ा कर दिया, लेकिन उस तक पहुंचने के लिए सड़क ही नहीं बनाई।
परिणाम? आज 4 साल से विष्णुचरण गुप्ता शासकीय महाविद्यालय में पढ़ने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राएं हर दिन कीचड़, गड्ढे और फिसलन से जूझते हुए अपनी शिक्षा पूरी कर रहे हैं। बरसात में ये डेढ़ किलोमीटर का सफर उनके लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।
#### *1. कैसे शुरू हुई ये कहानी – कॉलेज की सौगात*
साल 2018 में छत्तीसगढ़ सरकार ने पुसौर क्षेत्र में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विष्णुचरण गुप्ता शासकीय महाविद्यालय की घोषणा की। क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर थी। आखिरकार अब बच्चों को 30-40 किमी दूर रायगढ़ या सारंगढ़ जाकर पढ़ाई नहीं करनी पड़ेगी।
2022 में जीएडी कॉलोनी बोरोडीपा के पास करोड़ों की लागत से भव्य कॉलेज भवन बनकर तैयार हुआ। लैब, क्लासरूम, लाइब्रेरी सब कुछ। 2022 से ही यहां नियमित पढ़ाई शुरू हो गई। B.A, B.Com, B.Sc के सैकड़ों छात्र यहां एडमिशन ले रहे हैं।
लेकिन यहीं से समस्या शुरू हुई।
#### *2. डेढ़ किमी का रास्ता = रोज का युद्ध*
बोरोडीपा चौक, जो पुसौर का मेन मार्केट है, वहां से कॉलेज की दूरी सिर्फ 1.5 किमी है। नक्शे में देखने पर लगता है 5 मिनट का रास्ता। लेकिन हकीकत बिल्कुल अलग है।
इस 1.5 किमी में ना डामर है, ना मुरम, ना नाली। पूरा रास्ता कच्चा है। गर्मी में धूल और बरसात में कीचड़।
*बरसात में क्या होता है:*
– पूरे रास्ते में 1-1 फीट कीचड़ जमा हो जाता है
– बाइक और साइकिल रोज फिसलती है
– लड़कियों के कपड़े कीचड़ से सन जाते हैं
– कई बार एग्जाम छूटने की नौबत आ जाती है
– एंबुलेंस और बीमार लोगों का निकलना नामुमकिन
एक छात्रा ने नाम न छापने की शर्त पर बताया: “दी, रोज लगता है आज कॉलेज नहीं जा पाएंगे। पैर कीचड़ में धंस जाता है। बैग गंदा हो जाता है। टीचर भी डांटते हैं।”
#### *3. 2 करोड़ का टेंडर कहां गया?*
सबसे बड़ा सवाल यही है। जानकारी के अनुसार इस सड़क के निर्माण के लिए नगर पंचायत पुसौर ने लगभग 2 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया था। काम खरसिया के एक सिविल ठेकेदार को दिया गया।
नियम ये था कि बरसात 2025 से पहले सड़क बनकर तैयार हो जानी चाहिए। टेंडर में “प्राथमिकता कार्य” भी लिखा था क्योंकि ये एक शिक्षण संस्थान को जोड़ती है।
लेकिन हुआ क्या?
1. ठेकेदार ने शुरुआती मिट्टी का काम किया
2. फिर काम धीमा कर दिया
3. आरोप है कि ठेकेदार ने काम “पेटी कॉन्ट्रैक्ट” पर किसी और को दे दिया
4. बरसात आ गई और काम बंद
आज स्थिति ये है कि सड़क पर सिर्फ मिट्टी डली है। एक भी ट्रॉली गिट्टी या मुरम नहीं पड़ी।
#### *4. नगर पंचायत पुसौर: “भगवान भरोसे”*
स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि नगर पंचायत पुसौर इस मुद्दे पर गंभीर नहीं है। सीएमओ से लेकर अध्यक्ष तक कोई जवाब देने को तैयार नहीं।
एक ग्रामीण ने कहा: “यहां सारा काम भगवान भरोसे है। फाइलें घूमती हैं, कागज में सब पास हो जाता है, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं होता।”
RTI लगाने पर पता चला कि सड़क के लिए पैसा स्वीकृत हो चुका है। लेकिन उपयोगिता प्रमाण पत्र अभी तक नहीं बना।
#### *5. छात्र और अभिभावकों की पीड़ा*
– *राहुल, B.Com द्वितीय वर्ष*: “सर, मेरी बाइक 2 बार कीचड़ में गिरी। 3000 रुपए का नुकसान। अब पैदल जाता हूं।”
– *अनीता, B.A प्रथम वर्ष*: “लड़कियों को सबसे ज्यादा दिक्कत। यूनिफॉर्म खराब, और शाम को घर लौटते डर लगता है।”
– *प्रोफेसर*: “हम कार से आते हैं। लेकिन 10 मिनट का रास्ता 40 मिनट में तय होता है। कई बार गाड़ी फंस जाती है।”
अभिभावकों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो बेटियों की पढ़ाई बंद करवानी पड़ेगी।
#### *6. विशेषज्ञ क्या कहते हैं – शिक्षा का अधिकार vs बुनियादी ढांचा*
शिक्षा अधिकार कानून कहता है कि हर बच्चे को सुरक्षित और सुगम शिक्षा मिले। लेकिन यहां मूलभूत सुविधा ही नहीं है।
शिक्षाविद डॉ. आर.के. पटेल कहते हैं: “भवन बना देना ही विकास नहीं है। Connectivity सबसे जरूरी है। अगर छात्र कॉलेज तक नहीं पहुंचेंगे तो भवन का क्या फायदा?”
#### *7. समाधान क्या है? 3 मांग*
छात्रों और ग्रामीणों ने कलेक्टर रायगढ़ और विधायक से 3 मांग की हैं:
1. *त्काल*: बरसात तक अस्थायी रूप से मुरम और रोलर चलवाकर रास्ता चलने लायक किया जाए
2. *स्थायी*: 2 करोड़ के टेंडर का काम 2 महीने में पूरा किया जाए, और लापरवाह ठेकेदार पर कार्रवाई हो
3. *निगरानी*: काम की मॉनिटरिंग के लिए एक समिति बनाई जाए जिसमें छात्र प्रतिनिधि भी हों
#### *8. प्रशासन का पक्ष*
इस मामले में जब नगर पंचायत पुसौर के सीएमओ से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। ठेकेदार का कहना है कि “फंड रिलीज नहीं हुआ इसलिए काम रुका है।”
लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में पैसा स्वीकृत दिख रहा है।
### *निष्कर्ष: जवाबदेही कौन तय करेगा?*
पुसौर का ये मामला सिर्फ एक सड़क का नहीं है। ये पूरे सिस्टम की लापरवाही का प्रतीक है। सरकार योजना बनाती है, पैसा देती है, भवन बन जाता है। लेकिन आखिरी कड़ी – सड़क – वही कमजोर रह जाती है।
जब तक पुसौर के छात्र कीचड़ में से होकर कॉलेज जाएंगे, तब तक “डिजिटल इंडिया” और “विकसित भारत” के नारे अधूरे लगेंगे।
अब देखना ये है कि प्रशासन कब जागता है। क्योंकि हर दिन की देरी से किसी छात्र का भविष्य दांव पर लग रहा है।
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