बिलासपुर-अंबिकापुर नेशनल हाईवे पर दर्दनाक सड़क हादसा, खंभे से टकराई तेज रफ्तार कार, बिहार के ट्रांसपोर्टर की मौके पर मौत
पूरी रात जागकर ट्रक में माल लोड कराने के बाद कार से लौट रहे थे शैलेष रंजन, थकान और झपकी बनी हादसे की वजह; रतनपुर के नेवसा गांव के पास हुआ हादसा
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। तेज रफ्तार, वाहन चलाते समय लापरवाही और लगातार लंबी दूरी तक बिना पर्याप्त आराम किए सफर करना लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। ऐसा ही एक दर्दनाक सड़क हादसा बिलासपुर-अंबिकापुर नेशनल हाईवे पर रतनपुर थाना क्षेत्र में सामने आया है। यहां तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे लगे खंभे से जा टकराई। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और वाहन चला रहे बिहार निवासी ट्रांसपोर्टर शैलेष रंजन की मौके पर ही मौत हो गई।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे की मुख्य वजह चालक को वाहन चलाते समय झपकी आना बताया जा रहा है। मृतक पूरी रात जागकर ट्रक में माल लोड कराने के बाद सुबह अपनी कार से ट्रक के पीछे-पीछे रवाना हुए थे। लगातार जागने और शारीरिक थकान के कारण रास्ते में उन्हें नींद की झपकी आ गई, जिसके चलते कार अनियंत्रित होकर खंभे से जा टकराई।
बिहार के पटना से छत्तीसगढ़ आए थे ट्रांसपोर्टर
जानकारी के मुताबिक, मृतक शैलेष रंजन मूल रूप से बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले थे। वे 27 अक्टूबर को चावल की खेप लेने के सिलसिले में छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर पहुंचे थे। यहां उन्होंने अपनी निगरानी में ट्रक में चावल लोड कराने की जिम्मेदारी संभाली। माल लोड कराने की प्रक्रिया पूरी रात चलती रही। इस दौरान वे लगातार जागते रहे और ट्रक में माल लोड होने के बाद सुबह अपनी कार से ट्रक के पीछे-पीछे रवाना हो गए।
बताया जा रहा है कि शैलेष रंजन अपनी कार क्रमांक CG 10 AN 3753 से सफर कर रहे थे। रातभर जागने के कारण उन्हें पर्याप्त आराम नहीं मिल पाया था। इसके बावजूद उन्होंने सुबह ही लंबी दूरी का सफर शुरू कर दिया। यही थकान आगे चलकर उनके लिए जानलेवा साबित हुई।
नेवसा गांव के पास अनियंत्रित होकर खंभे से टकराई कार
हादसा बिलासपुर-अंबिकापुर नेशनल हाईवे पर रतनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम नेवसा के पास स्थित ऋषि फ्यूल स्टेशन के नजदीक हुआ। प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 9 बजे शैलेष रंजन अपनी कार से इस मार्ग से गुजर रहे थे। इसी दौरान अचानक कार अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे लगे खंभे से जा टकराई।
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। दुर्घटना में शैलेष रंजन के सीने में गंभीर चोटें आईं। चोट इतनी गंभीर थी कि उन्होंने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।
घटना के बाद आसपास के लोगों को हादसे की जानकारी हुई। दुर्घटना की भयावहता को देखते हुए यह स्पष्ट हो गया कि कार को काफी तेज झटका लगा था। एक छोटी-सी झपकी ने हंसते-खेलते परिवार के सदस्य और एक ट्रांसपोर्टर की जिंदगी छीन ली।
भतीजे के फोन पर सामने आई चाचा की मौत की खबर
इस दर्दनाक हादसे की जानकारी मृतक के परिजनों तक भी बेहद अप्रत्याशित तरीके से पहुंची। मुंबई के अंधेरी वेस्ट में रहने वाले मृतक के भतीजे आयुष हरीश सिन्हा ने पुलिस को बताया कि सुबह करीब 9 बजकर 28 मिनट पर उन्होंने अपने चाचा शैलेष रंजन के मोबाइल फोन पर कॉल किया था।
फोन की घंटी बजने के बाद जब कॉल रिसीव हुआ तो दूसरी तरफ उनके चाचा नहीं, बल्कि कोई अनजान व्यक्ति बात कर रहा था। उस व्यक्ति ने आयुष को बताया कि नेवसा गांव के पास उनकी कार एक खंभे से टकरा गई है और कार चालक की मौत हो चुकी है।
यह सूचना मिलते ही परिवार में मातम छा गया। अचानक मिली इस खबर से परिजन स्तब्ध रह गए। इसके बाद परिवार के सदस्य तत्काल रतनपुर पहुंचे और अस्पताल की मरच्यूरी में रखे शव की पहचान शैलेष रंजन के रूप में की।
पुलिस ने पंचनामा और पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा शव
हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई की। मृतक की पहचान और दुर्घटना से संबंधित जानकारी जुटाने के बाद पंचनामा की कार्रवाई पूरी की गई। इसके पश्चात शव का पोस्टमार्टम कराया गया और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
रतनपुर पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर लिया है। पुलिस दुर्घटना के कारणों और घटनाक्रम की जांच कर रही है।
सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी है यह हादसा
शैलेष रंजन की मौत केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि उन सभी वाहन चालकों के लिए गंभीर चेतावनी है, जो लगातार कई घंटों तक जागने, काम करने और लंबी दूरी तय करने के बाद भी वाहन चलाते रहते हैं।
अक्सर व्यावसायिक कार्यों, माल परिवहन और समय पर डिलीवरी पहुंचाने के दबाव में ट्रक चालक, ट्रांसपोर्टर और अन्य वाहन चालक पर्याप्त नींद और आराम को नजरअंदाज कर देते हैं। उन्हें लगता है कि थोड़ी थकान के बावजूद वे वाहन आसानी से चला लेंगे, लेकिन सड़क पर कुछ सेकंड की झपकी भी जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बन सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार जागने और पर्याप्त नींद नहीं लेने से व्यक्ति की एकाग्रता, निर्णय लेने की क्षमता और वाहन पर नियंत्रण प्रभावित हो सकता है। ऐसे में तेज रफ्तार वाहन चलाना और भी खतरनाक हो जाता है।
वाहन चालकों से अपील: थकान महसूस हो तो सफर रोक दें
इस घटना से एक बार फिर यह सवाल उठता है कि क्या कुछ घंटे बचाने या जल्द गंतव्य तक पहुंचने की कोशिश में अपनी जिंदगी जोखिम में डालना उचित है? सड़क सुरक्षा के लिहाज से यह जरूरी है कि वाहन चालक लंबी दूरी की यात्रा से पहले पर्याप्त नींद लें। रातभर जागकर काम करने के बाद तत्काल लंबी दूरी का सफर शुरू करने से बचें। यदि वाहन चलाते समय आंखों में भारीपन, बार-बार जम्हाई या नींद महसूस हो तो सुरक्षित स्थान पर वाहन रोककर आराम करें।
खासकर ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों को माल लोडिंग, परिवहन और डिलीवरी की समय-सारणी बनाते समय चालक के आराम और सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।
एक झपकी ने छीन ली जिंदगी
बिहार के पटना से छत्तीसगढ़ आए शैलेष रंजन अपने व्यावसायिक काम को पूरा कर वापस लौट रहे थे। उन्हें शायद अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि उनका यह सफर जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। पीछे चल रहे ट्रक के साथ अपनी मंजिल की ओर बढ़ते शैलेष रंजन की कार नेवसा के पास हादसे का शिकार हो गई और परिवार को कभी न भरने वाला दुख दे गई।
यह घटना हर उस व्यक्ति के लिए सबक है जो थकान के बावजूद वाहन चलाने का जोखिम उठाता है। याद रखना जरूरी है कि मंजिल तक देर से पहुंचना कोई बड़ी बात नहीं, लेकिन सुरक्षित घर पहुंचना सबसे ज्यादा जरूरी है।
ग्रामीण भारत न्यूज परिवार की ओर से दिवंगत शैलेष रंजन को विनम्र श्रद्धांजलि एवं शोकाकुल परिजनों के प्रति गहरी संवेदना।
साभार: प्राप्त समाचार जानकारी
संवाददाता : अतुल अग्निहोत्री
ग्रामीण भारत न्यूज | रायगढ़, छत्तीसगढ़
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