कोरबा में दर्दनाक हादसा: पुराना मकान ढहाते समय ऊंची दीवार से गिरकर मजदूर की मौत, सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी ने छीन ली एक परिवार की खुशियां
बिना सुरक्षा उपकरणों के जोखिम भरे स्थान पर कराया जा रहा था काम, हादसे में बीरबल सिंह कंवर की गई जान; परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
कोरबा, छत्तीसगढ़। जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत सीतामढ़ी के कुम्हार मोहल्ले में मकान तोड़ने के दौरान हुए दर्दनाक हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। पुराने मकान को ढहाने का काम कर रहे एक दिहाड़ी मजदूर की ऊंचाई से गिरने के कारण मौत हो गई। हादसे के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल है। वहीं, घटना ने निर्माण एवं तोड़फोड़ के कार्यों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जिस समय मजदूर ऊंचाई पर काम कर रहा था, उस दौरान उसके पास आवश्यक सुरक्षा उपकरण और बचाव के पर्याप्त इंतजाम उपलब्ध नहीं थे।
दीवार से नीचे गिरने पर गंभीर रूप से घायल हुआ मजदूर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोरबा के सीतामढ़ी स्थित कुम्हार मोहल्ले में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत स्वीकृत नए मकान के निर्माण के लिए पुराने मकान को तोड़ने का काम कराया जा रहा था। इसी दौरान गुरुवार दोपहर लगभग 12 बजे यह हादसा हुआ।
बताया गया कि पुरानी दीवार को ढहाने के कार्य में जुटा दिहाड़ी मजदूर बीरबल सिंह कंवर लगभग साढ़े छह फीट ऊंची दीवार पर चढ़कर काम कर रहा था। इसी दौरान अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह ऊंचाई से नीचे जा गिरा। गिरने के कारण उसके सिर, छाती और कंधे में गंभीर चोटें आईं।
घटना के बाद मौके पर मौजूद अन्य श्रमिकों में अफरा-तफरी मच गई। साथियों ने तत्काल इसकी जानकारी दी और मकान मालिक की मदद से घायल मजदूर को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन गंभीर चोटों के चलते इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
ठेकेदार के माध्यम से काम पर आया था मजदूर
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, कुम्हार मोहल्ला निवासी प्रदीप कुमार के नाम पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान निर्माण स्वीकृत हुआ था। इसके लिए पुराने मकान को तोड़ने का ठेका चांपा निवासी कार्तिक दास को दिया गया था। बताया गया है कि कार्तिक दास पुरानी बस्ती में अपने जीजा के घर रहता है।
गुरुवार सुबह कार्तिक दास उषा कॉम्प्लेक्स रेलवे फाटक के पास से चार दिहाड़ी मजदूरों को काम के लिए लेकर आया था। इन मजदूरों में उरगा थाना क्षेत्र के मड़वारानी जर्वे निवासी बीरबल सिंह कंवर भी शामिल थे।
मजदूर रोजी-रोटी कमाने और अपने परिवार का भरण-पोषण करने के उद्देश्य से काम पर पहुंचे थे, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह दिन बीरबल सिंह के जीवन का आखिरी दिन साबित होगा।
सुरक्षा उपकरणों के अभाव ने खड़े किए गंभीर सवाल
इस हादसे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू मजदूरों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। घटनाक्रम और प्रत्यक्षदर्शियों से सामने आई प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, काम के दौरान श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे। मजदूर बिना किसी विशेष सुरक्षा व्यवस्था के दीवार के सहारे ऊंचाई पर काम कर रहे थे।
निर्माण और पुराने भवनों को तोड़ने जैसे कार्यों में थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे कामों के दौरान मजदूरों को सुरक्षा हेलमेट, सुरक्षा बेल्ट, मजबूत कार्य मंच तथा आवश्यकतानुसार अन्य सुरक्षा संसाधन उपलब्ध कराना बेहद जरूरी होता है।
सवाल यह है कि जब मजदूरों से ऊंचाई पर जोखिम भरा काम कराया जा रहा था, तब उनकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए? क्या काम शुरू कराने से पहले सुरक्षा व्यवस्था का आकलन किया गया था? क्या ठेकेदार की ओर से मजदूरों को आवश्यक सुरक्षा संसाधन उपलब्ध कराए गए थे?
हालांकि, इन सवालों पर संबंधित पक्षों की आधिकारिक स्थिति और जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
परिवार का सहारा छिना, बेटे के कंधों पर आई जिम्मेदारी
बीरबल सिंह कंवर की मौत से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतक अपने पीछे पत्नी, एक विवाहित बेटी और एक बेटा छोड़ गए हैं। उनका बेटा विशाल कंवर रेलवे में ठेका मजदूर के रूप में काम करता है और अपने पिता के साथ मिलकर परिवार के भरण-पोषण में सहयोग करता था।
पिता की अचानक मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। जिस पिता के साथ मिलकर विशाल परिवार की जिम्मेदारियां निभा रहा था, अब उसी परिवार की पूरी जिम्मेदारी उसके कंधों पर आ गई है।
एक दिहाड़ी मजदूर की मौत केवल एक व्यक्ति की जिंदगी का अंत नहीं होती, बल्कि उसके पीछे पूरे परिवार की आजीविका, बच्चों का भविष्य और घर की आर्थिक व्यवस्था भी प्रभावित होती है। बीरबल सिंह कंवर का परिवार भी इसी पीड़ा से गुजर रहा है।
अस्पताल पुलिस ने पूरी की कानूनी प्रक्रिया
हादसे के बाद घायल मजदूर को मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया था, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। अस्पताल पुलिस ने प्राप्त मेमो के आधार पर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और शव परिजनों को सौंप दिया।
घटना के बाद मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था, ठेकेदार की जिम्मेदारी और काम कराने के दौरान अपनाए गए सुरक्षा उपायों को लेकर जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
सरकारी योजनाओं के निर्माण कार्यों में मजदूरों की सुरक्षा भी हो प्राथमिकता
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है। लेकिन इस योजना के तहत मकान निर्माण या पुराने मकानों को तोड़ने के दौरान काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को भी उतनी ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
आवास निर्माण का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित छत देना है, लेकिन उस छत के निर्माण में जुटे श्रमिकों की जिंदगी भी सुरक्षित रहनी चाहिए। यदि मजदूर ही सुरक्षित नहीं होंगे तो विकास कार्यों की सार्थकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
प्रशासन और संबंधित विभागों को ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए निर्माण स्थलों तथा तोड़फोड़ के कार्यों में सुरक्षा मानकों की निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए। ठेकेदारों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए, ताकि मजदूरों को बिना सुरक्षा इंतजामों के जोखिम भरे काम में न लगाया जाए।
अब उठ रहे हैं जवाबदेही के सवाल
कोरबा के सीतामढ़ी कुम्हार मोहल्ले में हुई यह घटना एक बार फिर बताती है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले दिहाड़ी मजदूर कितने जोखिम के बीच अपनी रोजी-रोटी कमाने को मजबूर हैं। प्रतिदिन मेहनत करके परिवार का पेट पालने वाले इन श्रमिकों के लिए सुरक्षा व्यवस्था अक्सर सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है।
बीरबल सिंह कंवर की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस हादसे की निष्पक्ष जांच होगी? क्या काम कराने वाले ठेकेदार की जिम्मेदारी निर्धारित की जाएगी? क्या मृतक के परिवार को नियमानुसार मिलने वाली आर्थिक सहायता और अन्य वैधानिक लाभ उपलब्ध कराए जाएंगे?
जरूरत इस बात की है कि इस घटना को केवल एक सामान्य दुर्घटना मानकर भुलाया न जाए, बल्कि इससे सबक लेकर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
एक मजदूर अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी कमाने निकला था, लेकिन घर लौटकर नहीं आया। अब पीछे रह गए परिवार को केवल सांत्वना नहीं, बल्कि न्याय, आर्थिक सुरक्षा और प्रशासनिक सहयोग की भी जरूरत है।
ग्रामीण भारत न्यूज
संवाददाता : विनिता चौहान
कोरबा, छत्तीसगढ़
नोट: यह समाचार उपलब्ध प्रारंभिक मीडिया रिपोर्ट एवं घटनाक्रम में दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। हादसे की जिम्मेदारी और सुरक्षा संबंधी लापरवाही का अंतिम निर्धारण जांच एवं संबंधित अधिकारियों के तथ्यों के आधार पर होगा।




















