⚖️ जगदलपुर की विशेष NIA अदालत में सुनाया गया फैसला, हाईकोर्ट की पुष्टि के बाद ही होगी सजा पर अमल
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में बुधवार को बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया। करीब 13 साल पुराने मामले में जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने यह फैसला सुनाया।
इस फैसले के साथ ही 25 मई 2013 को झीरम घाटी में हुए उस भीषण हमले से जुड़े मामले में लंबी चली कानूनी प्रक्रिया का एक अहम चरण पूरा हुआ है।
🔥 10 दोषियों को मिली फांसी की सजा
मृत्युदंड पाने वालों में प्रमिला मोडियाम, चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना, सुमिता उर्फ पुनेम मोडियाम, मुक्का मांडवी, कोसा कवासी उर्फ कोसाराम, आयता मरकाम, मदकामी देवा, जोगा मदकामी, बंजामी सन्ना उर्फ चमरू और महादेव नाग शामिल हैं।
मामले में एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। अन्य आरोपी भी इस मामले में नामजद रहे हैं।
💥 25 मई 2013 को दहली थी झीरम घाटी
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला सुकमा से लौट रहा था। इसी दौरान दरभा थाना क्षेत्र की झीरम घाटी में हथियारबंद माओवादियों ने काफिले पर घात लगाकर हमला किया।
हमले में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। विभिन्न रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 29 से 32 के बीच बताई गई है, जबकि 38 लोग घायल हुए थे।
⚖️ फांसी पर अभी अंतिम मुहर बाकी
अदालत द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने के बावजूद दोषियों को तत्काल फांसी नहीं दी जा सकती। मृत्युदंड की पुष्टि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा किया जाना आवश्यक है। दोषियों को फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील के लिए निर्धारित समय भी दिया गया है।
🔴 13 साल बाद आया बड़ा फैसला, अब हाईकोर्ट की बारी!
झीरम घाटी कांड से जुड़े इस फैसले ने एक बार फिर 25 मई 2013 की उस भयावह घटना की यादें ताजा कर दी हैं। अब पूरे मामले में अगली कानूनी प्रक्रिया छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में होगी।
संवाददाता:– विनोद कुमार चौहान
ग्रामीण भारत न्यूज रायगढ़




















