कैरियर में सफलता अऊ अमर प्रेम कहानी

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Bureau Report

*लम्बी प्रेम कहानी: “धमतरी के धान अऊ दिल की जुबानी”*

_टैगलाइन: “15 साल की लगन, नौकरी का साथ, अऊ अमर होगे पिरीत”_

 

 

### *1. धमतरी के गाँव अऊ पहली नजर*

 

धमतरी जिला के एक छोटे से गाँव *”करेली”*। गाँव के चारों तरफ धान के खेत, बीच म बहे महानदी की नहर।

 

इही गाँव म रहत रहीस *विपिन बिहारी* – 24 साल का, रायपुर से M.A. पास, कंप्यूटर जानथे। गाँव के स्कूल म संविदा शिक्षक। शांत, किताबी कीड़ा, लड़की मन से दूर-दूर।

 

अऊ दूसरी तरफ रहीस *सुमती* – 22 साल की, गाँव की सबसे हँसमुख लड़की। 12वीं पास, सिलाई-कढ़ाई म एक्सपर्ट। आँख म सपना, दिल म जिद।

 

पहली मुलाकात गाँव के *मड़ई मेला* म होइस। सुमती झूला झूलत रहीस, चुनरी उड़त रहीस। विपिन बिहारी किताब बेचत रहीस। सुमती बार-बार देखिस, विपिन बिहारी किताब से नजर नई उठाईस।

 

*सुमती की सहेली*: ए सुमती, मास्टर ल देख-देख के का करबे? वो तो किताब के कीड़ा ए।

*सुमती*: (मुस्कुराकर) कीड़ा ए त का? मोर दिल के पन्ना म इही के नाम लिखबे।

 

### *2. दोस्ती, नौकरी अऊ एकतरफा पिरीत*

 

सुमती हार नई मानीस। स्कूल म बच्चों ल सिलाई सिखाए के बहाने रोज जाए लगिस। विपिन बिहारी से सवाल पूछिस, नोट्स मंगिस, कंप्यूटर सीखिस।

 

धीरे-धीरे दूनों म *दोस्ती* हो गे। विपिन बिहारी ल बस दोस्ती दिखत रहीस। पर सुमती का दिल धड़कत रहीस।

 

एक दिन गाँव म *”रोजगार मेला”* लागिस। विपिन बिहारी बोलीस – “सुमती, तैं भी फॉर्म भर दे। जिला पंचायत म डाटा एंट्री ऑपरेटर की नौकरी ए।”

 

सुमती कंप्यूटर नई जानत रहीस। विपिन बिहारी रात-रात भर सिखाईस। खुद फॉर्म भर के जमा कर दीस।

 

नतीजा – *सुमती का नौकरी लग गे*। पहली तनखा 8000 रुपिया। पूरा गाँव म मिठाई बँटिस।

 

अब दूनों रोज संग-संग धमतरी ऑफिस जाए लगिन। बस म बगल-बगल सीट, टिफिन म एक-दूसरे बर रोटी।

 

एक दिन बरसात म भींजते हुए सुमती बोल पड़ीस – *”विपिन, मैं तोला प्यार करथौं।”*

 

विपिन बिहारी चौंकिस। बोलीस – “सुमती, तैं मोर सबसे अच्छी दोस्त ए। पिरीत-विरीत के चक्कर म मत पड़। करियर बना।”

 

सुमती का दिल टूटिस, पर जिद नई टूटिस।

 

### *3. जीजा का शक अऊ सुमती की जिद*

 

सुमती के *जीजा – महेश*। शहर म ठेकेदार, शक्की मिजाज। जब देखिस सुमती रोज विपिन संग आवत-जावत हे, तो कान खड़े हो गिन।

 

*महेश*: सुन सुमती, ये मास्टर के चक्कर म मत पड़। नौकरी कर, शादी कर देबे।

*सुमती*: जीजा, मोर जिंदगी के फैसला मैं खुद करहूं।

 

सुमती अब खुल के इजहार करे लगिस। रोज एक फूल, कभू कविता, कभू टिफिन म “I Love You” लिख के। विपिन बिहारी हर बार मना कर दिस – “दोस्ती ठीक ए सुमती, घर वाले नई मानही।”

 

पर सुमती *ठान लीस* – “ओ विपिन बिहारी ल पाके रहिबे, चाहे 15 साल लग जाए।”

 

वो मेहनत करिस। ऑफिस म प्रमोशन ली। कंप्यूटर म एक्सपर्ट बनिस। गाँव की लड़की मन ल फ्री म सिखाए लगिस। विपिन बिहारी देखत रहीस – सुमती अब वो लड़की नई रहीस, जिसे वो “बस दोस्त” समझत रहीस। वो एक *जिम्मेदार, मेहनती, आत्मनिर्भर औरत* बन गे रहीस।

 

### *4. 5 साल बाद: जब दिल पिघलिस*

 

एक दिन ऑफिस से लौटते समय विपिन बिहारी का एक्सीडेंट हो गे। पैर टूट गे। 3 महीना बिस्तर म।

 

सुमती नौकरी के साथ-साथ दिन-रात सेवा करिस। खाना बनाईस, दवाई दीस, हिम्मत बंधाईस। गाँव वाले बोले – “बीवी भी अइसन नई करय।”

 

ठीक होए के बाद विपिन बिहारी सुमती का हाथ पकड़ के रो पड़िस। बोलीस – *”पगली, मैं अंधा रहेंव। तोर पिरीत सच्चा ए। मैं भी तोला प्यार करथौं।”*

 

15 साल की तपस्या पूरी होइस। दूनों संग रहे लगिन। शादी नई करिन, काबर कि समाज, जीजा, परिवार – सब खिलाफ रहीस। पर दूनों *लिव-इन* म रहे लगिन। संग काम करिन, संग खेत खरीदिन, संग NGO खोलिन – “सुमती-विपिन डिजिटल पाठशाला”।

 

### *5. जीजा की हार अऊ बिछड़ना*

 

महेश जीजा पीछे पड़ गे। शिकायत करिस, बदनाम करिस, नौकरी छुड़वाए की कोशिश करिस। पर दूनों की ईमानदारी के आगे सब फेल।

 

*15 साल* अइसने बीत गिन। दूनों 40 के हो गिन। सफलता के शिखर म। तभे किस्मत ल कुछ अऊ मंजूर रहीस।

 

विपिन बिहारी ल *किडनी की बीमारी* हो गे। लंबी छुट्टी। नौकरी छूट गे। इलाज म जमीन-जायदाद बिक गे। डॉक्टर बोले – “गाँव ले दूर शहर म रहना पड़ी।”

 

सुमती संग जाए चाहत रहीस, पर विपिन बिहारी मना कर दीस – “मोर बिमारी तोला भी खा जाही। तैं गाँव म रह। तोर स्कूल, तोर लड़की मन ल तोर जरूरत हे।”

 

भारी मन से दूनों अलग हो गिन। विपिन बिहारी रायपुर म भाई के पास, सुमती करेली म।

 

महेश जीजा हाथ मलत रह गे। बोलीस – “देखेंव, आखिर अलग होइन।”

पर वो समझ नई पाईस – *शरीर अलग हो सकथे, पिरीत नई।*

 

### *6. अंत: अमर पिरीत*

 

आज 10 साल हो गे अलग हुए। विपिन बिहारी डायलिसिस पे हे। सुमती हर महीना रायपुर जाथे, दवाई-खर्चा देथे, घंटो बइठ के बात करथे। फेर लौट आवथे गाँव।

 

गाँव म सब जानथे – *”मास्टर जी अऊ सुमती दीदी की जोड़ी भगवान भी नई तोड़ पाईस।”*

 

सुमती का स्कूल अब “विपिन-सुमती डिजिटल सेंटर” बन गे हे। 500 गो लड़की मन कंप्यूटर सीख के नौकरी म हें।

 

रात म जब सुमती डायरी लिखथे, त पहला पन्ना म लिखथे:

_”15 साल संग रहे, अब 15 जनम संग रहबो। तैं मोर नौकरी लगवाईस, मैं तोर जिंदगी बना देंव। जीजा ल बता दियो – पिरीत म जीता वही जखर नियत साफ होथे।”_

 

 

*कहानी का सार*:

1. *सच्चा प्यार* इंतजार करथे, मजबूर नई करथे।

2. *मेहनत अऊ आत्मनिर्भरता* से दिल भी जीता जाथे।

3. *समाज/जीजा* लाख कोशिश कर ले, पर सच्ची जोड़ी ल तोड़ नई पाथे।

4. *बिछड़ना अंत नई* – अगर नियत म पिरीत ए त दूर रहके भी संग रहा जाथे।

 

*धमतरी की माटी* गवाह ए – इहाँ के पिरीत म धान जइसे बरकत होथे। एक बार बो दो त पीढ़ी तक चलथे।

 

_अंत म बस इही – “नौकरी छूट जाथे, सेहत बिगड़ जाथे, पर सुमती जइसे पिरीत करे वाला मिल जाए त जिंदगी सफल हो जाथे।”_ ❤️

*अमर प्रेम अऊ सफल कैरियर की कहानी: “धमतरी के दूनों सितारा”*
_टैगलाइन: “पिरीत म तपे, मेहनत म निखरे – विपिन अऊ सुमती”_

### *1. धमतरी की माटी, दूनों की अलग राह*

*गाँव करेली, धमतरी*। धान के खेत, नहर के पानी, अऊ मेहनती मन।

*विपिन बिहारी* – 25 साल, रायपुर से M.A., B.Ed. पास। गाँव के हाई स्कूल म संविदा शिक्षक। सपना: “IAS बनूं, गाँव का नाम रोशन करूं।” दिन-रात किताब, कोचिंग, बच्चों ल पढ़ाना। लड़की मन से कोसों दूर।

*सुमती* – 23 साल, 12वीं पास, घर की बड़ी बेटी। सिलाई मशीन चलाथे, मां-बाप के सहारा। आँख म चमक, दिल म हौसला। गाँव की पहली लड़की जो साइकिल से बाजार जाथे।

*पहली मुलाकात*: गाँव के *हरेली तिहार* म। सुमती गेड़ी चढ़त रहीस, विपिन बिहारी बच्चों ल निबंध लिखवावत रहीस – “मोर गाँव”। सुमती की चुनरी उड़ के विपिन के किताब म गिरिस। विपिन नजर उठाईस, सुमती मुस्कुराईस। विपिन फेर किताब म घुस गे।

*सुमती*: (मन म) “ए मास्टर, किताब से बाहर भी दुनिया ए। मोर दुनिया म आ जा।”

### *2. दोस्ती से शुरू होइस कैरियर की उड़ान*

सुमती बहाना बनाके स्कूल आए लगिस – “सर, मोर छोटे भाई ल गणित सिखा दो।” धीरे-धीरे विपिन ल समझ आइस – ये लड़की होशियार ए, बस मौका नई मिलिस।

*विपिन*: सुमती, तैं जिला पंचायत की *डाटा एंट्री ऑपरेटर* की परीक्षा दे। मैं पढ़ाहूं।
*सुमती*: पर सर, मैं तो कंप्यूटर छुए तक नई हौं।
*विपिन*: कल से शाम 5 बजे स्कूल के कंप्यूटर लैब म आ जाबे। फीस = मोर बर चाय।

6 महीना मेहनत। सुमती दिन म सिलाई, रात म प्रैक्टिस। विपिन बिहारी खुद फॉर्म भरिस, फीस भरिस, परीक्षा सेंटर तक छोड़िस।

*नतीजा: सुमती सेलेक्ट*। 8500 की पहली नौकरी। पूरा करेली गाँव म पहली सरकारी नौकरी वाली बेटी।

अब दूनों रोज संग बस म धमतरी जाइन। विपिन स्कूल, सुमती कलेक्ट्रेट।

इही बीच सुमती के दिल म *पिरीत* का बीज फूट गे। एक दिन बोलीस – “विपिन, मैं तोला…”

*विपिन*: (बात काटकर) सुमती, हम अच्छे दोस्त हन। अभी करियर पे ध्यान दे। लड़की के बर नौकरी मिलना बड़ी बात ए।

सुमती चुप हो गे, पर *ठान लीस* – “दोस्ती से शुरू करेन, पिरीत तक ले जाहूं। अऊ सफलता तक संग चलहूं।”

### *3. जीजा का षड्यंत्र अऊ सुमती की तपस्या*

*महेश जीजा* – सुमती के दीदी का पति। शहर म बिल्डर। सोच – “साली कमाथे, मोर कंट्रोल म रहय। ये मास्टर बीच म काबर आवथे?”

वो सुमती के घर वालों ल भड़काईस, विपिन की शिकायत करिस। पर सुमती डटी रहीस।

*सुमती का संघर्ष*:
1. दिन म ऑफिस, शाम म *PGDCA* करिस। विपिन बिहारी नोट्स बनाके दीस।
2. गाँव की 20 गो लड़की मन ल फ्री कंप्यूटर सिखाईस – “विपिन-सुमती पाठशाला” शुरू करिस।
3. 3 साल म प्रमोशन – *डाटा एंट्री से सहायक प्रोग्रामर*। तनखा 28,000।

*विपिन का संघर्ष*:
1. दिन म स्कूल, रात म *UPSC* की तैयारी। 2 बार प्रीलिम्स निकाले, मेन्स म रह गे।
2. सुमती टिफिन लाके देतीस, हौसला बढ़ाती – “तैं कर सकथे विपिन, तैं मोर हीरो ए।”
3. तीसरे प्रयास म *CGPSC* निकालिस – *डिप्टी कलेक्टर* बन गे। धमतरी म ही पोस्टिंग।

पूरा गाँव जश्न मनाईस। महेश जीजा का मुँह लटक गे।

### *4. जब “ना” से “हाँ” होइस – 7 साल बाद*

डिप्टी कलेक्टर बने के बाद विपिन बिहारी एक दिन सुमती ल ऑफिस बुलाईस।

*विपिन*: सुमती, 7 साल हो गे। तैं मोर हर लड़ाई म संग रहीस। मोर बुखार म रात भर बइठीस, मोर हार म हँसाईस। मैं अंधा रहेंव। *मैं भी तोला प्यार करथौं*। करबे मोर संग जिंदगी भर की पार्टनरशिप?

सुमती 7 साल का इंतजार, आँसू बनके बह गे। पर शादी नई करिन। बोलीस – “समाज अभी नई समझही। हम *संग रहिबो, काम करबो, नाम करबो*। शादी का कागज से बड़ा ए भरोसा।”

दूनों *लिव-इन* म रहे लगिन। धमतरी म छोटा सा घर। लक्ष्य एक – “करेली ल डिजिटल गाँव बनाना।”

### *5. कैरियर की उड़ान: दूनों संग-संग*

*सुमती की सफलता*:
1. *”धमतरी डिजिटल दीदी”* योजना चालू करिस। 5000 महिला मन ल डिजिटल साक्षर बनाईस।
2. *राज्य स्तरीय अवार्ड* – मुख्यमंत्री के हाथ से सम्मान।
3. प्रमोशन पे प्रमोशन – *जिला ई-गवर्नेंस मैनेजर* बनिस। तनखा 80,000+।
4. खुद का *स्टार्टअप* – “करेली सॉफ्टवेयर सोल्यूशन”। गाँव के 30 युवा मन ल रोजगार।

*विपिन बिहारी की सफलता*:
1. बतौर डिप्टी कलेक्टर, *”नवा धमतरी”* प्रोजेक्ट लीड करिस। हर स्कूल म स्मार्ट क्लास।
2. *IAS प्रमोट* होइस 12 साल की सेवा के बाद। कलेक्टर, बस्तर। नक्सल इलाके म शिक्षा की अलख जगाईस।
3. *”बेस्ट यंग कलेक्टर अवार्ड”* भारत सरकार से।

*दूनों की साझा सफलता*: “विपिन-सुमती फाउंडेशन”। गरीब बच्चा मन ल फ्री कोचिंग, लड़की मन ल लैपटॉप।

महेश जीजा कई बार नेता-मंत्री लेके आय, केस करिस, बदनाम करिस। पर दूनों की ईमानदारी अऊ जनता का प्यार के आगे सब फेल।

### *6. 15 साल बाद: इम्तिहान अऊ अमर पिरीत*

विपिन बिहारी 48 साल के होइन। बस्तर म पोस्टिंग के दौरान *किडनी फेल* हो गे। लंबी छुट्टी, फेर *VRS* लेना पड़िस। इलाज म लाखों खर्चा, पेंशन आधी।

सुमती अब 46 साल की, जिला म सबसे सीनियर अफसर। वो नौकरी छोड़ सकत रहीस, पर बोलीस – “तोर सपना अधूरा ए। मैं कमाहूं, तैं ठीक हो।”

विपिन रायपुर म इलाज करावत रहीस, सुमती धमतरी म नौकरी अऊ NGO सम्हालत रहीस। हर वीकेंड 200 किलोमीटर गाड़ी चलाके आवत रहीस। दवाई, खाना, हौसला – सब देतीस।

महेश जीजा अब बूढ़ा हो गे रहीस। एक दिन सुमती से बोलीस – “मोर गलती रहीस। तुम दूनों हीरा हो। मैं कोयला रहेंव।”

*आज*: विपिन बिहारी ठीक होके *”मोटिवेशनल स्पीकर”* बन गे हें। गाँव-गाँव जाके कहानी सुनाथें – “कइसे एक लड़की के जिद अऊ पिरीत म IAS बन गेंव।”

सुमती अब *संयुक्त कलेक्टर* रैंक म रिटायर होइस हे। पर “करेली सॉफ्टवेयर सोल्यूशन” अब 2 करोड़ की कंपनी ए। 200 लोग काम करथें।

दूनों अब भी शादी के कागज म नई बंधे। पर धमतरी का बच्चा-बच्चा जानथे – *”विपिन सर अऊ सुमती मैडम – ये दूनों एक दूजे के बिना अधूरे हें।”*

*कहानी का मर्म*:
1. *पिरीत* तभे अमर होथे जब इज्जत अऊ बराबरी होय। सुमती भीख नई मांगीस, खुद बनके विपिन के बराबर म खड़ी होइस।
2. *कैरियर* अऊ *प्यार* दुश्मन नई हें। सही पार्टनर मिल जाए त दूनों म आग लग जाथे।
3. *15 साल का इंतजार* बेकार नई गीस – काबर कि सुमती रोई नई, खुद ल बनाईस।
4. *जीजा-समाज* लाख टांग खींच ले, पर नियत साफ होय त मंजिल मिलथे।

*धमतरी के बुजुर्ग* अब भी कहिथें:
_”बेटी होय त सुमती जइसे, जखर पिरीत म भी शक्ति ए अऊ कैरियर म भी भक्ति ए। अऊ दामाद मिलय त विपिन जइसे, जखर सफलता के पीछे एक औरत का तपस्या ए।”_

*अंत म*: नौकरी लग भी जाथे, छूट भी जाथे। सेहत बन भी जाथे, बिगड़ भी जाथे। पर अगर *सुमती जइसे साथी* अऊ *विपिन जइसे नियत* मिल जाए, त कहानी अमर हो जाथे। ❤️

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