
_धुन: ददरिया नाचा | बीट: फास्ट, ढोलक-टिमकी वाला_
*मुखड़ा:*
झड़ी लागे रे, झड़ी लागे रे, आषाढ़ के झड़ी लागे रे
भींजे चुनरी, भींजे चोली, मन मोर नाचे बिन बाजे रे
छत्तीसगढ़ के माटी महके, सावन के हवा बाजे रे
झड़ी लागे रे… हो… झड़ी लागे रे…
*अंतरा 1:*
काला-काला बादर, बिजरी चमके चम-चम
पानी के फुहार मा, देहा लागे थर-थम
संगवारी सबो झन, खेत के मेड़ मा
गावत हावय गीत, नाचत हावय बेड़ मा
अरे रिमझिम-रिमझिम पानी गिरथे, मन मा उमंग जागे रे
झड़ी लागे रे…
*अंतरा 2:*
धान के रोपा मा, पांव मोर थिरकय
मोर सजन के सुरता, हिरदे मा खिरकय
लाल-पीयर साड़ी, भींज के लिपटगे
देख-देख गोरी ला, बादर भी लजागे
अरे सगरी रात भरसे, भोरे-भोरे भागे रे
झड़ी लागे रे…
*अंतरा 3:*
नदी-नरवा उफने, पुरवइया बहे
आमा के डारा मा, कोयलिया कूहे
ददरिया गावत, मड़ई मा बइठे
चुड़ा-गुड़ खात, पुरखा के रीती
अरे गांव-गांव मा छाये, सावन के बागे रे
झड़ी लागे रे…
*कोरस x2:*
नाच रे नाच रे, बदरा संग नाच रे
गाव रे गाव रे, सावन संग गाव रे
झूम रे झूम रे, धरती संग झूम रे
झड़ी लागे रे… हो… झड़ी लागे रे…
*टैगलाइन:*
_आषाढ़ के पहली झड़ी, छत्तीसगढ़ के बेटी बड़ी_
—From
BipinBihari Chouhan


















