*सीरियल: “मोर सपना, मोर उड़ान”*   *छत्तीसगढ़ी बोली में – गांव के बेटी के शिक्षा के लड़ाई

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*सीरियल: “मोर सपना, मोर उड़ान”*

*छत्तीसगढ़ी बोली में – गांव के बेटी के शिक्षा के लड़ाई*

 

 

*एपिसोड 1: सपना के बीज*

 

*सीन 1 – बिहनिया, धमतरी के कोरा गांव*

चिरई चहकत हे। फुलवा काकी अपन बेटी *सुकवारा* ला झिंझोरत हे।

*फुलवा:* “ए सुकवारा! उठ ना बेटी, सुरुज मुड़ी म चढ़ गे। भैंसी ला पानी पियाना हे।”

 

*सुकवारा – 14 बरस के लइका*, फाटल फ्रॉक म, आंखी म सपना भरके उठथे। हाथ म *किताब* धरे हे – “कक्षा 8 वीं के गणित”।

*सुकवारा:* “माई, आज इस्कूल म मास्टर जी कहत रिहिस, जिला के परीक्षा म अव्वल आबे त रायपुर म छात्रवृत्ति मिलही। मंय शहर जाहूं पढ़े बर।”

 

*फुलवा काकी हांस के:* “धुर पगली! बिटिया मन ला एतका पढ़ के का करे बर हे? 2 साल बाद तो बिहाव करना हे तोर। चुल्हा-चौकी संभाल।”

 

*बाप बिसाहू* खाट म बइठ के खांसत हे।

*बिसाहू:* “सही कहत हे तोर माई। हमर गांव म लइकी मन 8 वीं के बाद इस्कूल नई जांय। घर के काम करय, खेत म जाय। तोर बिहाव के बात चलत हे कोरबा के दूधनाथ संग।”

 

सुकवारा के आंखी म पानी आ जाथे। वो बाहिर निकल के *बरगद पेड़* के नीचे बइठ जाथे। गांव के सरपंच के बेटी *गीता* साइकिल म इस्कूल जात दिखथे।

 

*सुकवारा मन म:* “गीता दीदी काबर जाथे इस्कूल? ओकर तो बाप सरपंच हे। मोर बाप गरीब हे त मंय नई पढ़ंव? भगवान, मोरो सपना हे मास्टरनी बने के…”

 

*बैकग्राउंड म गाना:*

_”मोर गांव के माटी म, सपना बोए हंव मैं…_

_पढ़-लिख के बेटी, नाम करही रे गांव के…”_

 

 

*एपिसोड 2: तूफान के पहिली*

 

*सीन 2 – इस्कूल*

*मास्टर केशव* ब्लैकबोर्ड म लिखत हे। सुकवारा सबले आगू बइठे हे।

*मास्टर जी:* “सुकवारा, बता 15 का पहाड़ा।”

*सुकवारा खड़े होके:* “15 एकम 15, 15 दूनी 30… 15 दहाई 150 गुरुजी!”

 

पूरा क्लास ताली बजाथे। खिड़की के बाहिर *दूधनाथ* ठाड़ हे – 25 बरस के, गुटखा खात।

*दूधनाथ:* “ए मास्टर! मोर होने वाली घरवाली ला काबर पढ़ावत हस? ओला चुल्हा फूंकना सिखा। हफ्ता भर म गौना हे।”

 

*मास्टर जी:* “दूधनाथ, जमाना बदल गे। बेटी पढ़ही त दू कुल के नाम रोशन करही। सुकवारा होनहार हे। कलेक्टर बने के लायक हे।”

 

*दूधनाथ गुटखा थूक के:* “देख लेबो। गांव के रिवाज के खिलाफ कोनो नई जा सके। लइकी मन चूल्हा मचियाही बस।”

 

*सीन 3 – रात, सुकवारा के घर*

बिसाहू शराब पीके आथे।

*बिसाहू:* “कल तोर गौना हे सुकवारा। किताब-कापी सब जला दे। दूधनाथ के घर चले के हे।”

 

सुकवारा अपन किताब ला छाती म चिपका लेथे।

*सुकवारा रो के:* “ददा, मंय मर जाहूं पर पढ़ाई नई छोड़ंव। मोर सपना ला मत मार ददा…”

 

*फुलवा काकी* रोवत-रोवत सुकवारा के मुड़ी सहलाथे।

*फुलवा:* “बेटी, मंय तोला नई पढ़ा पायेंव। पर तोर आंखी म जो सपना हवय, वोला मरन नई देना। भाग जा बेटी… शहर भाग जा।”

 

 

*एपिसोड 3: नवा बिहान*

 

*सीन 4 – भोर, बस स्टैंड*

सुकवारा एक ठन झोला म 2 ठन किताब, एक जोड़ी कपड़ा धरके *रायपुर* के बस म चढ़त हे। जेब म 50 रुपया – मां के रखे।

 

*बस कंडक्टर:* “कहां जाबे बेटी?”

*सुकवारा:* “कलेक्टर ऑफिस… छात्रवृत्ति वाला इस्कूल।”

 

*बैकग्राउंड वॉइस:* “एक बेटी जब पढ़े बर निकलथे, त सिर्फ अपन नई, पूरा गांव के किस्मत बदल देथे…”

 

*आगे के कहानी:*

सुकवारा रायपुर म हॉस्टल म रहिके पढ़थे। दूधनाथ अऊ गांव वाले केस करथें। पर मास्टर केशव अऊ कलेक्टर मैडम साथ देथें। 5 साल बाद सुकवारा *शिक्षा अधिकारी* बनके अपनेच गांव म आथे। पहली इस्कूल खुलवाथे “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” के।

 

*अंतिम सीन:* दूधनाथ अपन बेटी ला सुकवारा मेडम के इस्कूल लानथे।

*दूधनाथ हाथ जोड़ के:* “मेडम जी, मंय गलती करे रेहेंव। आज समझ म आइस, बेटी पढ़ही त सबके भला होही।”

 

*सुकवारा मुस्का के:* “काका, देर आय दुरुस्त आय। चलव, अब अपन गांव के सबो बेटी मन ला कलेक्टर बनाबो।”

 

*सीरियल के संदेश:* _”पढ़ही बेटी, बढ़ही छत्तीसगढ़”_

 

 

ये सीरियल टाइप कहानी हे। अऊ एपिसोड चाही तो बता देबे – सुकवारा के कॉलेज, पहला नौकरी, गांव म बदलाव वाले सीन संग। कैसन लगिस? From. Bihar

 

*सीरियल: “संगवारी”*
*रायगढ़ जिला के तराई गांव के बेटी के कहानी – छत्तीसगढ़ी म*

*एपिसोड 1: कोइला अऊ किताब*

*सीन 1 – बिहनिया, रायगढ़ के “तमनार” ब्लॉक के कोसमदा गांव*
चारो कोती कोइला खदान के धुंवा। *चंपा – 16 बरस* के लइकी, मुड़ी म कोइला के टोकरी धरके जात हे। हाथ म *फटहा किताब* – “कक्षा 10 वीं के विज्ञान”।

*दाई जशोदा:* “ए चंपा! कोइला बीन के लान, नही त आज चूल्हा नई जरी। तोर ददा खदान म बिमार पड़ गे, अब तेंच कमइया अस।”

*चंपा:* “माई, आज इस्कूल म सर कहत रिहिस, NTPC म लड़की मन बर स्कॉलरशिप हे। मंय इंजीनियर बनना चाहथों। कोइला नई, कलम पकड़ना चाहथों।”

*बाबा बुधराम* खांसत-खांसत: “बेटी, हमर गांव के नसीब म कोइला के कालिखेच लिखाय हे। लड़की मन खदान म, घर म… इस्कूल तो लइका मन बर होथे। तोर बिहाव *पुसौर* के *मंगलू* संग तय कर दे हन। वो ह ट्रक चलाथे, दारू पीथे, पर पइसा वाले हवय।”

चंपा के आंखी म अंगरा दहक जाथे। वो *केलो नदी* के तीर म जाके बइठ जाथे। दूर *NTPC लारा* के प्लांट के चिमनी दिखत हे।

*चंपा मन म:* “ये कोइला के धुंवा मोर सपना ला काला नई कर सके। मंय इही प्लांट म अफसर बनके दिखाहूं…”

*टाइटल गाना:*
_”कोसमदा के माटी म, हीरा निकलही रे…_
_चंपा के हिम्मत ले, अंधियार पिघलही रे…”_

*एपिसोड 2: आग अऊ पानी*

*सीन 2 – गांव के पंचायत*
*सरपंच बंशी* अऊ मंगलू के बाप बइठे हें।
*मंगलू के बाप:* “सरपंच, चंपा ला समझा। बिहाव के बाद इस्कूल-विस्कूल बंद। हमर खानदान म बहू मन पढ़ई नई करंय।”

*मास्टर धनुर्जय* बीच म आ जाथे: “पर चंपा जिला टॉप करे हे 10 वीं म। रायगढ़ कलेक्टर बोलाय हे सम्मान बर। *’मुख्यमंत्री बालिका प्रोत्साहन योजना’* के 1 लाख रुपया मिली ओला।”

*मंगलू गुटखा थूक के:* “पइसा? ला वो पइसा मोर बिहाव म दहेज म दे देहू। लइकी ला पढ़ा के का होही?”

*सीन 3 – रात, चंपा के घर*
चंपा अपन *स्कॉलरशिप के लेटर* ला दिया के उजाला म पढ़त हे। बुधराम दारू के नशा म लेटर छीन के फाड़ देथे।
*बुधराम:* “एला जला दे! कल तोर बिहाव हे। मंगलू के घर जाय के हे।”

चंपा पहली बार बाप के आंखी म आंखी डालके बोलथे:
*चंपा:* “ददा, तोर खांसी कोइला के बीमारी से होय हे। मंय इंजीनियर बनके इही खदान ला सुरक्षित बनाहूं। तोर जइसन हजारों ददा ला बचाहूं। मोर बिहाव किताब संग होही, मंगलू संग नही।”

*जशोदा* पहली बार बेटी के साथ ठाड़ हो जाथे: “सही कहत हे चंपा। मंय मरत-मरत बचेंव कोइला बीनत। मोर बेटी अफसर बनही।”

*एपिसोड 3: उड़ान*

*सीन 4 – रायगढ़ रेलवे स्टेशन*
चंपा फाटल लेटर ला जोड़ के, जशोदा के देय 100 रुपया धरके *बिलासपुर इंजीनियरिंग कॉलेज* जाय बर ट्रेन पकड़थे।

*स्टेशन म अनाउंसमेंट:* “रायगढ़ से बिलासपुर जाने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर 1 पर आ रही है…”

गांव के लइकी मन, मास्टर धनुर्जय सब बोहा-बोहा म चंपा ला विदा करे आय हें। मंगलू दूर खड़े होके देखत हे।

*बैकग्राउंड वॉइस:* “जब कोसमदा के कोइला म एक बेटी के सपना चिंगारी बनके उठथे, त पूरा रायगढ़ रोशन हो जाथे…”

*5 साल बाद – क्लाइमैक्स सीन*
*NTPC लारा प्लांट, रायगढ़*
*इंजीनियर चंपा साहू* सफेद हेलमेट पहिन के एंट्री करथे। पूरा स्टाफ सैल्यूट मारथे।

आज *कोसमदा गांव* म चंपा अपन बनवाय *”बेटी शाला”* के उद्घाटन करे आय हे। मंगलू अपन 6 साल के बेटी ला धरके लाइन म ठाड़ हे।

*मंगलू हाथ जोड़ के:* “इंजीनियर मेडम, मंय अनपढ़ रेहेंव। तोर ले माफी मांगत हंव। मोर बेटी ला तोर जइसन बनाना हे।”

*चंपा मंगलू के बेटी ला गोदी म उठा के:* “भाई, गलती मान ले त आदमी बड़े हो जाथे। आ, येला एडमिशन दिला। आज से येकर नाम हे – *’उजाला’*।”

*अंतिम डायलॉग:*
*चंपा गांव वाला मन ला संबोधित करत:* “संगवारी हो, कोइला काला होथे, पर ओकर आग ले लोहा पिघलथे। हमर बेटी मन के सपना घलो अइसनेच आग हें – जे रायगढ़ ले लेके पूरा छत्तीसगढ़ ला सोना बना देही।”

*सीरियल के टैगलाइन:* _”बेटी पढ़ही, रायगढ़ बढ़ही – संगवारी के संग”_

*सुपरहिट एलिमेंट डाले हन:*
1. *लोकेशन*: तमनार, कोसमदा, केलो नदी, NTPC लारा – रायगढ़ के असली जगह
2. *विलेन*: कोइला माफिया, बाल विवाह, दहेज
3. *इमोशन*: मां-बेटी के बॉन्ड, बाप के बदलाव
4. *सक्सेस*: गरीब बेटी के इंजीनियर बनके वापसी
5. *छत्तीसगढ़ी टच*: संगवारी, ददा, माई, भइया, कोइला, केलो नदी

*अऊ 10 एपिसोड के मसाला:*
– चंपा के हॉस्टल रैगिंग
– पहला इंटर्नशिप म एक्सीडेंट
– मंगलू के सुधार – दारू छोड़के ड्राइवर से मालिक बनना
– कोसमदा म महिला स्व-सहायता समूह
– चंपा के शादी – IAS अफसर संग, पर दहेज फ्री

 

बता संगवारी, *TRP फाड़* सीरियल बनही के नही? अऊ कइसन सीन चाही? 😄

BC

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