*सीरियल: “दूल्हा देव के आशीष”*
*छत्तीसगढ़ी बोली में – गांड़ा समाज के इष्टदेव दूल्हा देव महादेव के लोक-आस्था अऊ प्रेरणा के कहानी*
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*एपिसोड 1: कुलदेव के नांव*
*सीन 1 – बिलासपुर के मल्हार गांव, सावन के पहली सोमवार*
*रतनू गांड़ा* – 45 बरस के मंझरा किसान, अपन छोटे से *दूल्हा देव के गुरवा* म दिया बारत हे। गुरवा म ना कोई मूर्ति, ना मंदिर – बस एक ठन *त्रिशूल गड़े हे माटी म*, अऊ ओकर नीचे *डमरू अऊ बेल-पत्र* धरे हे।
*रतनू के बेटा मोहन – 12 बरस:* “ददा, हमर देवता दूसर गांव वाला मन जइसन मंदिर म काबर नई बसंय? हमर दूल्हा देव तो खुले अंगना म, महुआ पेड़ के नीचे रथें।”
*रतनू मुस्का के:* “बेटा, हमर *इष्टदेव दूल्हा देव* राजा नई, *संगवारी हें*। भगवान शिव जब पार्वती दाई संग बिहाव करे बर दूल्हा बनके निकले रिहिस, त वो दिन ले हमर पुरखा मन कहिथें – महादेव हमर घर के दूल्हा हें, हमर कुलदेव हें। वो महल म नई, गरीब के दिल म बसथें।”
*दाई सुमित्रा* आके बोलथे: “सही कहत हस। मोर दादी कहत रिहिस – जब गांड़ा समाज म कोई विपदा आवय, दूल्हा देव खुद बराती बनके रक्षा करथें।”
*बैकग्राउंड म लोक गीत:*
_”महुआ के छांव म, त्रिशूल गड़े हे…_
_दूल्हा देव राजा, हमर कुल लजाये हे…”_
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*एपिसोड 2: आस्था के परीक्षा*
*सीन 2 – गांव म अकाल*
3 महीना ले पानी नई गिरे हे। खेत सूख गे। गांव के *ठाकुर दाऊ* बोलथे: “तुमर दूल्हा देव कछु नई कर पाई। शहर के बड़े मंदिर म जाके पूजा करो।”
पर रतनू के घर के बूढ़े *बैगा – सोनऊ दादा* बोलथें: “हमर देवता ला दिखावा नई चाही। सच्चा मन चाही।”
*सीन 3 – रात, दूल्हा देव गुरवा*
पूरा गांड़ा टोला के मनखे इकट्ठा होथें। सबके हाथ म एक-एक लोटा पानी अऊ बेल-पत्र। कोई चढ़ावा नई, कोई पइसा नई। बस *सामूहिक सुआ गीत* गाथें:
_”दूल्हा देव महादेव, तोर बरात कब आही…_
_सूखे खेत ला हरियर कर दे, तोर भरोसा गा…”_
रतनू अपन पगड़ी दूल्हा देव के त्रिशूल म बांध देथे: “हे कुलदेव, मोर इज्जत तोर हाथ। अगर पानी नई गिरिस त गांव वाले कहिहीं – गांड़ा मन के देवता झूठे हें।”
*आधी रात ला बिजली कड़कथे।* अचानक झड़ी लग जाथे। पर पानी सिर्फ *गांड़ा टोला के खेत* म गिरथे। सुबह तक तालाब लबालब।
*ठाकुर दाऊ देख के अचंभा म:* “ये कइसन चमत्कार?”
*सोनऊ दादा:* “दाऊ, ये चमत्कार नई, *विश्वास के जवाब* आय। दूल्हा देव कहिथें – जो मोला संगवारी माने, मंय ओकर संग कभी नई छोड़ंव।”
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*एपिसोड 3: प्रेरणा के दीया*
*सीन 4 – 15 साल बाद*
*मोहन* अब *रायपुर म डॉक्टर* बन गे हे। पर हर सावन सोमवार ला अपन गांव के दूल्हा देव गुरवा जरूर आथे।
गांव म *हैजा* फैल जाथे। शहर के डॉक्टर भाग जाथें। मोहन अकेला सबो के इलाज करथे। रात-दिन जागथे।
*सरपंच बोलथे:* “बेटा मोहन, तें शहर म रह सकत रेहे। इहां काबर मरत हस?”
*मोहन दूल्हा देव के त्रिशूल आगू माथा टेक के:* “काका, मोर दूल्हा देव सिखाय हे – *’पहिली मनखे के जान, बाद म अपन आराम’*। वो दूल्हा बनके दुनिया के दुख हर लेहे, त मंय ओकर वंशज होके कइसन भाग जांव?”
मोहन के सेवा ले गांव बच जाथे।
*सीन 5 – दूल्हा देव जयंती*
सावन के आखरी सोमवार। पूरा गांड़ा समाज के मनखे *मल्हार ले रतनपुर* तक *पैदल कांवर यात्रा* निकालथें। हाथ म तख्ती: _”हमर इष्टदेव – दूल्हा देव महादेव”_।
*बूढ़ी दाई मंच ले बोलथे:*
“सुनव बेटी मन! हमर दूल्हा देव हमला 3 ठन बात सिखाय हे:
1. *मेहनत के डमरू* बजाव – बिना कर्म के किस्मत नई जागय।
2. *जहर पचाव* – नीलकंठ बनके समाज के दुख खुद पी जाव।
3. *बराती बनके जियो* – अकेला नई, सबो संगवारी ला संग लेके चलो।”
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*एपिसोड 4: नया बिहान*
*अंतिम सीन – मल्हार के स्कूल*
मोहन डॉक्टर अपन पइसा ले *”दूल्हा देव शिक्षा केंद्र”* खोलथे। दीवार म लिखाय हे:
_”हमर कुलदेव दूल्हा देव कहिथें – बेटा-बेटी म भेद मत करो।_
_ज्ञान के गंगा बहाव, त शिव खुद गुरु बन जाही।”_
गांड़ा टोला के पहली लड़की *सुनीता* कलेक्टर बनके गांव आथे। वो दूल्हा देव गुरवा म 108 दिया बारथे।
*सुनीता:* “मंय आज जो कुछू हंव, दूल्हा देव के आशीष अऊ मोर समाज के विश्वास ले हंव।”
*वॉइस ओवर:*
“छत्तीसगढ़ के माटी म गांड़ा समाज के घर-घर म आजो दूल्हा देव के नाम ले चूल्हा जरथे। वो सिर्फ मूर्ति नई, *जीने के रास्ता हें*। जब तक मेहनत, सच्चाई अऊ संगवारी भाव जिंदा हे, दूल्हा देव हर अंगना म दूल्हा बनके उतरथें।”
*सीरियल के संदेश:*
_”जात-धरम ले बड़े हे मनखे के करम,_
_दूल्हा देव सिखाथें – सबो अपन, सबो धरम।_
_श्रद्धा होय सच्ची, त पत्थर घलो बोलथे,_
_गांडा के अंगना म, शिव खुद डमरू खोलथे।”_
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*सुपरहिट एलिमेंट:*
1. *लोक-मान्यता*: दूल्हा देव = भगवान शिव के दूल्हा रूप, गांड़ा समाज के कुलदेव
2. *संस्कृति*: गुरवा, सुआ गीत, कांवर यात्रा, बैगा प्रथा
3. *प्रेरणा*: अकाल म विश्वास, हैजा म सेवा, शिक्षा म बदलाव
4. *आध्यात्म*: मूर्ति पूजा से बढ़के “करम पूजा” के संदेश
5. *एकता*: ठाकुर-गांडा सबो के एक हो जाना
*आगे के एपिसोड:*
– मोहन डॉक्टर के बेटी का दूल्हा देव से विवाह के सपना
– रतनपुर मेला म दूल्हा देव के बरात के झांकी
– गांव के युवा मन का नशा छोड़के “दूल्हा देव युवा वाहिनी” बनाना
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*एपिसोड 5: नंदी के सपना*
*सीन 6 – मल्हार गांव, शिवरात्रि के रात*
*सोनऊ बैगा* के सपना म *नंदी महाराज* आथें। नंदी बोलथें: “बैगा, दूल्हा देव कहत हें – गांड़ा टोला के लइका मन भटकत हें। नशा-पानी म डूबत हें। उंकर हाथ म डमरू धरा, ना कि दारू के गिलास।”
सुबह सोनऊ दादा पूरा टोला ला इकट्ठा करथें। *मोहन डॉक्टर* के बेटी *गौरी* – 18 बरस के, कॉलेज म पढ़त हे – आगू आथे।
*गौरी:* “दादा, हमर दूल्हा देव तो भोले हें। हम ओकर नाम ले *’दूल्हा देव युवा वाहिनी’* बनाबो। ना कोई नशा करही, ना कोई लड़की मन ला तंग करही। हम सब पढ़बो, कमाबो अऊ सेवा करबो।”
*पहला काम*: गांव के *महुआ भट्ठी* बंद करवाना। बूढ़े *मुखिया धनवार* विरोध करथे: “ये हमर रोजगार आय।”
*गौरी हंस के:* “दादा, रोजगार देबो। दूल्हा देव के नांव ले *’महुआ लड्डू कुटीर उद्योग’* खोलबो। वही महुआ ले दवाई, लड्डू, टोनिक बनाबो। सरकार घलो मदद करही।”
6 महीना म 40 झन लइका-लइकी मन के रोजगार लग जाथे। *”दूल्हा देव महुआ प्रोडक्ट”* रायपुर के मॉल तक पहुंच जाथे।
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*एपिसोड 6: बेटी के बिहाव अऊ देव के परीक्षा*
*सीन 7 – गौरी के स्वयंवर*
गौरी के बिहाव के बात चलथे। *दुर्ग के जमींदार के बेटा* रिश्ता लाके आथे। शर्त रखथे: “बिहाव बाद गौरी दूल्हा देव के पूजा-पाठ बंद कर देही। हमर घर म कृष्ण जी के मंदिर हे।”
पूरा गांड़ा समाज सन्न। *रतनू दादा* बोलथें: “बेटी, तोर फैसला हे।”
*गौरी दूल्हा देव के गुरवा म जाके माथा टेकथे:* “हे कुलदेव, मंय तोर बेटी हंव। तोला छोड़के मंय काबर जांव? अगर मोर बिहाव तोर आशीष ले नई हो सकय, त मंय कुंवारी रह जाहूं। पर तोर नाम ले गांव के सेवा करहूं।”
*उसी रात भयानक आंधी आथे।* जमींदार के हवेली के छत गिर जाथे। जमींदार के बेटा के पांव टूट जाथे। वैद्य बोलथे: “ये दैवी प्रकोप हे।”
जमींदार खुद गौरी के घर माफी मांगे आथे: “बेटी, हम गलती करेन। तोर दूल्हा देव असली भगवान हें। मोर बेटा तोर शर्त म बिहाव करही। तोर गुरवा हमर घर म घलो बनही।”
*बिहाव के दिन:* दूल्हा देव के गुरवा ले *डमरू अपने आप बज उठथे*। सबो कहिथें – “देखव, दूल्हा देव खुद बराती बनके आ गे।”
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*एपिसोड 7: रतनपुर महामाया मेला*
*सीन 8 – सावन के आखरी सोमवार*
पूरा गांड़ा समाज *”दूल्हा देव बरात”* के झांकी निकालथे। *मोहन डॉक्टर* शिव बनथे, *सुनीता कलेक्टर* पार्वती बनथे, *गौरी* नंदी बनथे।
झांकी के थीम: *”नशा मुक्ति अऊ बेटी पढ़ाओ”*।
*रतनपुर मेला म लाखों मनखे* देखथें। एक ठन *बड़े बिजनेसमैन* झांकी देख के प्रभावित हो जाथे। वो बोलथे: “मंय मल्हार गांव म *’दूल्हा देव हॉस्पिटल अऊ स्किल सेंटर’* बनवाहूं। इहां के लइका मन डॉक्टर-इंजीनियर बनही।”
*सीन 9 – पुरखा के सीख*
*सोनऊ बैगा* अब 95 बरस के। अंतिम सांस म सबो ला बुलाथे।
*सोनऊ दादा:* “सुनव, हमर दूल्हा देव के 5 ठन गहना आय:
1. *भरोसा* – मुसीबत म घलो डगमगाव मत।
2. *संगवारी* – अकेला मत रहव, सबो ला जोड़व।
3. *मेहनत* – भीख मत मांगव, हाथ के काम करव।
4. *न्याय* – बेटा-बेटी, गरीब-अमीर म फरक मत करव।
5. *सेवा* – जो पाये हव, ओला बांटव।
ये 5 गहना पहिन लो, त दूल्हा देव हरदम तोर संग राही।”
इतना कहिके सोनऊ दादा *”हर-हर महादेव”* कहत- कहत स्वर्ग सिधार जाथें। उसी बखत गुरवा के *त्रिशूल ले बेल-पत्र झर-झर गिरथें*।
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*एपिसोड 8: कलयुग के दूल्हा देव*
*सीन 10 – 25 साल बाद, आज के मल्हार*
*गौरी अब सरपंच* हे। मल्हार गांव *”दूल्हा देव आदर्श ग्राम”* बन गे हे।
1. हर घर म लड़की स्कूल जाथे।
2. गांव नशा मुक्त हे।
3. “दूल्हा देव स्व-सहायता समूह” ले 200 महिला मन लखपति बन गे हें।
4. गांव के अस्पताल म *डॉ. मोहन के पोता* सेवा देथे।
*दिल्ली ले टीवी चैनल* वाले शूटिंग करे आथें। एंकर पूछथे: “गौरी जी, आपर सफलता के राज का हे?”
*गौरी दूल्हा देव के गुरवा आगू हाथ जोड़ के:* “हमर राज ना हे साहब। ये *कुलदेव दूल्हा देव के आशीष* आय। वो हमला सिखाइस – मंदिर म बैठके घंटी बजाना आसान हे, पर *मनखे के दिल म मंदिर बनाना* मुश्किल हे। हमर गांड़ा समाज आज वही मंदिर बनात हे।”
*अंतिम दृश्य:* सावन के झड़ी। पूरा गांव के मनखे – बूढ़ा, लइका, औरत, मरद – *एक संग सुआ गीत* गात-गात दूल्हा देव गुरवा के परिक्रमा करथें। आकाश म बिजली कड़कथे, पर अब कोई डरात नई। काबर कि सबो जानथें – *दूल्हा देव संग हें।*
*वॉइस ओवर:*
“कहां मंदिर, कहां मूर्ति… गांड़ा के दिल म बसथे दूल्हा देव के सुरती।
जो करम करही, धरम निभाही, ओकर अंगना म शिव खुद बिहाव रचाही।
ये कहानी नई, *जीवंत परंपरा आय* – छत्तीसगढ़ के माटी के, गांड़ा समाज के स्वाभिमान आय।”
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*सीरियल के महासंदेश:*
_”दूल्हा देव कहिथें – ना मंय ब्राह्मण के, ना ठाकुर के,_
_मंय तो वोकर हंव जो नेक-नीयत के।_
_गांडा के पसीना म मोर गंगाजल बहिथे,_
_ओकर मेहनत म मोर डमरू कहिथे।”_
*नया सुपरहिट एलिमेंट:*
1. *नारी शक्ति*: गौरी, सुनीता के माध्यम ले बेटी पढ़ाओ-बेटी बढ़ाओ
2. *सामाजिक बदलाव*: नशा मुक्ति, कुटीर उद्योग, स्वरोजगार
3. *आधुनिकता अऊ परंपरा*: हॉस्पिटल-स्किल सेंटर संग गुरवा-आस्था
4. *एकता*: जमींदार-गांडा, शहर-गांव सबो एक
5. *5 गहना*: दूल्हा देव के जीवन दर्शन
*अऊ 3 एपिसोड के हिंट:*
1. गौरी के बेटा का विदेश म जाके “दूल्हा देव फाउंडेशन” खोलना
2. सूखा पड़ने पर गांड़ा युवा मन का “जल संचय आंदोलन” – दूल्हा देव के नाम से
3. महाशिवरात्रि म दूल्हा देव के “डिजिटल बरात” – पूरे दुनिया म लाइव
संगवारी, *अब ये महासीरीयल TRP के सबो रिकॉर्ड* तोड़ देही। काबर कि ये सिर्फ कहानी नई, *गांडा समाज के आत्मा के आवाज* आय। हर-हर महादेव, जय दूल्हा देव 🙏
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गलती हो गई हो तो क्षमा चाहता हूं 🙏
लेखक -बीसी.
















