*By – ग्रामीण भारत न्यूज | रायपुर ब्यूरो*
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### *रायपुर, छत्तीसगढ़*
शनिवार 25 जुलाई 2026 का दिन छत्तीसगढ़ के दो गांवों के लिए काला दिन बन गया। मानसून की पहली तेज बारिश के साथ आई आकाशीय बिजली ने कोरबा और एमसीबी जिले में तांडव मचा दिया।
*कोरबा के सलोरा-छुरी गांव में खेत में रोपाई कर रहे 3 ग्रामीणों की मौके पर मौत हो गई।*
*वहीं एमसीबी के बैकुंठपुर के खरवत गांव में बिजली गिरने से 6 महिलाएं घायल हो गईं, जिनमें 2 की हालत अभी भी गंभीर है।*
ये हादसा हमें फिर याद दिलाता है कि प्रकृति के सामने इंसान कितना बेबस है। और सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों को है जो रोजी-रोटी के लिए खुले खेतों में काम करते हैं। ग्रामीण भारत न्यूज की ये रिपोर्ट आपको बताएगी कि आखिर हुआ क्या था, प्रशासन ने क्या किया और ऐसे हादसों से कैसे बचा जाए।
### *1. कोरबा: सलोरा-छुरी में मातम, 3 घर उजड़े*
*समय: दोपहर करीब 2:30 बजे*
*जगह: कटघोरा थाना क्षेत्र, सलोरा-छुरी गांव, छुरी बकरा बाजार सब-स्टेशन के पीछे*
यहां करीब 25 से 30 ग्रामीण एक साथ धान की रोपाई कर रहे थे। मानसून शुरू हो चुका था, इसलिए सभी किसान खेत में जुटे थे। आसमान में काले बादल थे लेकिन किसी ने सोचा नहीं था कि कुछ मिनट में क्या होगा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अचानक तेज आवाज के साथ खेत की मेड़ पर आकाशीय बिजली गिरी। बिजली सीधे 3 लोगों पर पड़ी।
*मृतकों की पहचान:*
1. *रामसाय कंवर* – उम्र 42 साल
2. *सुखराम यादव* – उम्र 38 साल
3. *बिसाहू दास* – उम्र 45 साल
तीनों बुरी तरह झुलस गए थे। साथ में काम कर रहे ग्रामीण तुरंत उन्हें लेकर *सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटघोरा* भागे। लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया।
*कटघोरा सीएचसी के बाहर का मंजर*
जैसे ही खबर गांव पहुंची, पूरे गांव में कोहराम मच गया। परिजन और ग्रामीण अस्पताल के बाहर जमा हो गए। चीख-पुकार से पूरा अस्पताल परिसर गूंज उठा। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मर्ग कायम किया और पंचनामा की कार्रवाई शुरू की।
एक मृतक के बेटे ने रोते हुए कहा “पिताजी सुबह कहकर गए थे कि आज रोपाई पूरी कर लेंगे। शाम को खाने के लिए बोलेंगे। लेकिन वो लौटे ही नहीं।”
### *2. एमसीबी: बैकुंठपुर के खरवत में 6 महिलाएं घायल, 2 गंभीर*
*समय: दोपहर करीब 3:15 बजे*
*जगह: बैकुंठपुर विकासखंड, खरवत गांव*
इधर कोरबा में हादसा हुआ, उधर 200 KM दूर एमसीबी जिले में भी बिजली गिरी। खरवत गांव की महिलाएं सामूहिक रूप से खेत में धान रोप रही थीं। बारिश शुरू हुई तो सभी पेड़ के नीचे शरण लेने की बजाय काम करती रहीं।
तभी अचानक बिजली गिरी और 6 महिलाएं उसकी चपेट में आ गईं।
*घायल महिलाएं:*
– *सुशीला बाई* – हालत गंभीर
– *पुष्पा कंवर* – हालत गंभीर
– *गीता, राधा, सीता, मंगली* – हालत स्थिर
सभी को तुरंत *जिला अस्पताल बैकुंठपुर* ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार 4 महिलाओं को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। लेकिन सुशीला और पुष्पा को ICU में रखा गया है। उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
अस्पताल के डॉक्टर ने बताया “बिजली लगने से शरीर के कई हिस्से झुलस गए हैं। 48 घंटे तक खतरा टला नहीं है।”
### *3. प्रशासन की तरफ से क्या मदद?*
दोनों जिलों के कलेक्टर ने तुरंत संज्ञान लिया।
*कोरबा कलेक्टर* ने कहा:
– मृतकों के परिजनों को *राज्य आपदा राहत कोष से 4-4 लाख रुपये* की सहायता दी जाएगी
– घायलों का पूरा इलाज सरकारी खर्च पर होगा
– कटघोरा तहसीलदार को गांव भेजकर पंचनामा रिपोर्ट 24 घंटे में मांगी गई
*एमसीबी कलेक्टर* ने कहा:
– गंभीर घायल महिलाओं को 50-50 हजार रुपये तत्काल सहायता
– बिजली गिरने वाले इलाकों में मुनादी कराकर किसानों को सतर्क किया जाएगा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी दोनों हादसों पर दुख जताया और अधिकारियों को त्वरित राहत देने के निर्देश दिए।
### *4. मानसून में आकाशीय बिजली: आंकड़े डराते हैं*
छत्तीसगढ़ में हर साल मानसून के दौरान बिजली गिरने से 100 से ज्यादा लोगों की मौत होती है। NCRB के अनुसार 2025 में छत्तीसगढ़ में बिजली से 118 मौतें हुई थीं।
*सबसे ज्यादा खतरा किसे?*
1. *किसान और मजदूर* – जो खुले खेत में काम करते हैं
2. *पशु चराने वाले*
3. *पेड़ के नीचे खड़े लोग*
4. *तालाब और नदी किनारे मछली पकड़ने वाले*
विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई-अगस्त में दोपहर 2 से शाम 6 बजे के बीच बिजली गिरने की घटनाएं सबसे ज्यादा होती हैं।
### *5. विशेषज्ञ क्या कहते हैं: बिजली गिरने पर क्या करें और क्या न करें*
हमने मौसम वैज्ञानिक डॉ. एचपी चंद्रा और आपदा प्रबंधन अधिकारी से बात की। उन्होंने 10 जरूरी टिप्स दिए:
*अगर आप खेत में हैं और बादल गरजें तो:*
*क्या करें:*
1. *तुरंत खेत छोड़ें* – खुले में बिल्कुल न रहें
2. *पक्के मकान या गाड़ी में जाएं* – ये सबसे सुरक्षित जगह है
3. *जमीन पर बैठ जाएं* – घुटने मोड़कर, सिर झुकाकर। दोनों पैर जमीन पर न रखें
4. *समूह में न रहें* – 10-10 मीटर की दूरी बनाएं
5. *मोबाइल बंद कर दें* – टावर से कनेक्शन काट दें
*क्या न करें:*
1. *पेड़ के नीचे न खड़े हों* – सबसे ज्यादा बिजली पेड़ पर गिरती है
2. *धातु की चीज न पकड़ें* – कुदाल, फावड़ा, छाता फेंक दें
3. *पानी में न जाएं* – तालाब, नदी, गीली जमीन से दूर रहें
4. *खुले में दौड़ें नहीं*
5. *अफवाह न फैलाएं*
डॉक्टर का कहना है “बिजली लगने के बाद तुरंत CPR दें और अस्पताल ले जाएं। कई बार समय पर मदद से जान बच जाती है।”
### *6. गांव वालों की आपबीती: “भगवान ने बचा लिया”*
ग्रामीण भारत न्यूज की टीम सलोरा-छुरी पहुंची। वहां के ग्रामीण अभी भी सहमे हुए हैं।
*रोपाई में शामिल रही सुमित्रा बाई*: “हम 30 लोग थे। बादल गरजा तो हम हंस रहे थे कि बारिश होगी। अचानक तेज रोशनी और आवाज आई। धुआं उठा। जब देखा तो 3 लोग गिरे थे। हम सब भाग गए।”
*ग्राम पटेल*: “सरकार को चाहिए कि हर गांव में बिजली गिरने का सायरन लगे। मोबाइल पर अलर्ट आए। हमारे किसान भाई ऐसे ही मर जाएंगे।”
### *7. क्या है सरकारी व्यवस्था? लाइटनिंग कंडक्टर और अलर्ट सिस्टम*
छत्तीसगढ़ सरकार ने 2023 से “Lightning Resilient India Campaign” के तहत कुछ कदम उठाए हैं:
1. *SMS अलर्ट*: मौसम विभाग 30 मिनट पहले मोबाइल पर अलर्ट भेजता है
2. *लाइटनिंग कंडक्टर*: स्कूल और पंचायत भवन में लगाए जा रहे हैं
3. *जागरूकता*: आशा कार्यकर्ता और पटवारी गांव में जानकारी देते हैं
लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि 80% किसान को इन अलर्ट की जानकारी नहीं है। नेटवर्क न होने से SMS भी नहीं पहुंचता।
विशेषज्ञों की मांग है कि हर ग्राम पंचायत में सायरन और हर खेत में शेड बनाया जाए।
### *8. बीमा और मुआवजा: पीड़ितों को कैसे मिलेगा पैसा*
1. *प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना*: अगर फसल के साथ किसान को नुकसान हो तो क्लेम मिलता है
2. *राज्य आपदा कोष*: मौत पर 4 लाख, गंभीर चोट पर 50 हजार
3. *मुख्यमंत्री सहायता कोष*: अतिरिक्त सहायता के लिए आवेदन
पीड़ित परिवारों को तहसीलदार के पास 7 दिन के अंदर आवेदन देना होगा। साथ में मृत्यु प्रमाण पत्र, पंचनामा और बैंक खाता लगेगा।
### *9. 3 दिन का मौसम अलर्ट: फिर हो सकती है बिजली*
मौसम विभाग ने अगले 3 दिन के लिए येलो अलर्ट जारी किया है।
– *कोरबा, रायगढ़, सरगुजा, बिलासपुर* में तेज बारिश और बिजली की संभावना
– किसानों से अपील: सुबह 10 से शाम 5 बजे तक खेत में न जाएं
– स्कूलों को कहा गया है कि बच्चे घर जल्दी पहुंचें
### *10. निष्कर्ष: सावधानी ही बचाव है*
आज सलोरा-छुरी और खरवत के 3 घरों का चूल्हा बुझ गया। 6 महिलाएं अस्पताल में जिंदगी और मौत से लड़ रही हैं।
ये हादसा सिर्फ खबर नहीं है। ये उन लाखों किसानों की कहानी है जो पेट भरने के लिए जान जोखिम में डालकर खेत में काम करते हैं।
सरकार, प्रशासन और समाज तीनों की जिम्मेदारी है:
1. *सरकार*: हर गांव तक अलर्ट सिस्टम पहुंचाए
2. *प्रशासन*: मुआवजा 7 दिन में दिलाए
3. *समाज*: बादल गरजते ही खेत छोड़ने की आदत डालें
*ग्रामीण भारत न्यूज की अपील*:
भाइयों, 2 घंटे की रोपाई बाद में भी हो जाएगी। लेकिन जान गई तो वापस नहीं आएगी। बादल दिखे तो घर आ जाओ।
ईश्वर मृतकों की आत्मा को शांति दे और घायलों को जल्दी ठीक करे। 🙏
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*आपके लिए जरूरी नंबर:*
– *आपदा हेल्पलाइन*: 1077
– *एम्बुलेंस*: 108
– *पुलिस*: 112




















