ग्रामीण भारत न्यूज़ (Gramin Bharat News) विशेष रिपोर्ट :-
प्रस्तावना:
मौसम विभाग (IMD) रायपुर द्वारा 1 जून 2026 से 23 जुलाई 2026 तक के बारिश के आंकड़े जारी कर दिए गए हैं। ग्रामीण भारत न्यूज़ के विश्लेषण में यह बात सामने आई है कि धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में इस साल मानसूनी बारिश का भारी असंतुलन देखने को मिल रहा है। कहीं किसान खेतों में भरे पानी से खुश हैं, तो कहीं आसमान से एक बूंद के लिए तरस रहे हैं।
प्रादेशिक विवेचना (State-Level Analysis)

छत्तीसगढ़ राज्य के समग्र आंकड़ों पर नज़र डालें तो प्रदेश में कुल मिलाकर मानसूनी बारिश को ‘सामान्य’ (Normal) श्रेणी में रखा गया है। 1 जून से 23 जुलाई तक राज्य में औसतन 395.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्यत: इस अवधि में 469.7 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी।
पूरे राज्य में बारिश में 16% की कमी दर्ज की गई है। भले ही मौसम विभाग के पैमानों पर यह ‘सामान्य’ हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि राज्य के भीतर एक बड़ा मौसम-विभाजन (Weather Divide) पैदा हो गया है। राज्य के मध्य और कुछ पूर्वी हिस्सों में मेहरबान मानसून ने खेती के लिए अनुकूल हालात बनाए हैं, जबकि उत्तर (सरगुजा संभाग) और दक्षिण (बस्तर संभाग) के बड़े हिस्से सूखे के मुहाने पर खड़े हैं। धान की रोपाई के इस पीक सीजन में यह असंतुलन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के लिए गहरी चिंता का विषय है।
जिलेवार विवेचना (District-Wise Analysis)
जिलेवार आंकड़ों का विश्लेषण करने पर राज्य को हम बारिश के आधार पर मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांट सकते हैं:
1. अत्यधिक मेहरबान मानसून (Large Excess & Excess Rainfall) – जलभराव का खतरा:
इन जिलों में किसानों के लिए पानी की कोई कमी नहीं है, बल्कि कुछ जगह अधिक बारिश से फसल प्रबंधन की चुनौती है।
- सारंगढ़-बिलाईगढ़: यहाँ मानसून पूरी तरह से मेहरबान है। सामान्य (381 मिमी) के मुकाबले यहाँ 636.1 मिमी (67% अधिक) बारिश हुई है, जिसे मौसम विभाग ने ‘लार्ज एक्सेस’ (Large Excess) माना है।
- जांजगीर, मुंगेली और बलौदा बाजार: इन तीनों जिलों में भी सामान्य से बहुत अच्छी बारिश (Excess) दर्ज की गई है। जांजगीर में 38%, मुंगेली में 30% और बलौदा बाजार में 28% अधिक पानी बरसा है।
2. सूखे की मार और संकट में किसान (Deficient Rainfall) – रेड अलर्ट:
राज्य के लगभग 11 जिले ऐसे हैं जहाँ बारिश सामान्य से 20% से लेकर 49% तक कम हुई है। यहाँ खरीफ की फसलों और खासकर धान की बुवाई पर संकट मंडरा रहा है।
- सबसे बुरा हाल सरगुजा और जशपुर का: सरगुजा जिले में सबसे ज्यादा 49% बारिश की कमी दर्ज की गई है। इसी तरह जशपुर में -46% और कांकेर में -44% की भारी कमी है।
- बस्तर और दुर्ग संभाग के कई जिले प्रभावित: बस्तर (-38%), बेमेतरा (-38%), कोंडागांव (-37%), सुकमा (-36%), मोहला-मानपुर-चौकी (-32%), बीजापुर (-27%) और सूरजपुर (-20%) में बारिश की भारी कमी (Deficient) है। इन जिलों के किसानों को तुरंत सिंचाई के वैकल्पिक साधनों की दरकार है।
3. राहत की सांस (Normal Rainfall):
राजधानी रायपुर सहित 18 जिलों में बारिश सामान्य श्रेणी (-19% से +19% के बीच) में रही है।
- बिलासपुर (18% अधिक) और रायपुर (13% अधिक) में स्थिति काफी अच्छी है।
- इसके अलावा दुर्ग, बालोद, राजनांदगांव, कोरबा, रायगढ़ और धमतरी जैसे जिलों में बारिश थोड़ी कम या ज्यादा होने के बावजूद सामान्य स्थिति में है, जिससे यहाँ खेती-किसानी की रफ्तार सही दिशा में है।
निष्कर्ष:
ग्रामीण भारत न्यूज़ के इस विश्लेषण से स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ सरकार और कृषि विभाग को उन 11 जिलों (विशेषकर सरगुजा, जशपुर, कांकेर, बस्तर, और बेमेतरा) पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है जहाँ बारिश 30% से 50% तक कम हुई है। अगर अगले एक-दो हफ्तों में यहाँ अच्छी बारिश नहीं हुई, तो राज्य को आंशिक सूखे की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।





















