रायपुर:-डिजिटल डकैती: पूरा पेमेंट लेने के बाद IT कंपनी ने किया न्यूज पोर्टल के डोमेन पर कब्जा, BNS और साइबर क्राइम के तहत FIR की तैयारी
डिजिटल युग में वेबसाइट और डोमेन किसी भी व्यवसाय की सबसे बड़ी संपत्ति होते हैं, लेकिन इंदौर में एक वेब डेवलपमेंट कंपनी द्वारा इसी डिजिटल संपत्ति को बंधक बनाने (Domain Hijacking) का सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक स्थानीय न्यूज पोर्टल ने ‘Boot Alpha Soft Technology’ नाम की कंपनी पर डोमेन हड़पने, WHOIS डिटेल्स छिपाने और फुल एडमिन (cPanel) एक्सेस न देने का गंभीर आरोप लगाया है।
शिकायतकर्ता के पास भुगतान के सभी पक्के सबूत मौजूद हैं और अब इस मामले में पुलिस के साइबर सेल और उपभोक्ता फोरम (Consumer Court) में जाने की तैयारी की जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता के अनुसार, सितंबर 2025 में Boot Alpha Soft Technology को एक न्यूज वेबसाइट बनाने का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था, जिसके लिए तय की गई पूरी राशि का भुगतान कर दिया गया। लेकिन भुगतान होने के बाद कंपनी ने कथित तौर पर निम्नलिखित धोखाधड़ी को अंजाम दिया:
डोमेन पर कब्जा और पहचान छिपाना: कंपनी ने पोर्टल के मुख्य डोमेन graminbharatnews.com को अपने नियंत्रण में ले लिया और उस पर Private WHOIS लगा दिया, ताकि डोमेन के असली मालिक की जानकारी इंटरनेट पर कोई न देख सके।
फुल एक्सेस देने से इनकार: वेबसाइट के मालिक को cPanel (कंट्रोल पैनल) और डोमेन का एडमिन एक्सेस देने से साफ मना कर दिया गया। मालिक को कोड एडिट करने का कोई अधिकार नहीं दिया गया।
फर्जी एडमिन आईडी का झांसा: जब शिकायतकर्ता ने फुल एडमिनिस्ट्रेशन एक्सेस मांगा, तो कंपनी ने सिर्फ “ब्यूरो रिपोर्ट” नाम की एक डमी/सीमित एक्सेस वाली आईडी थमा दी और दावा किया कि “यही मेन एडमिन आईडी है।”
संपत्ति लौटाने से इनकार: जब विवाद बढ़ा और शिकायतकर्ता ने अपना डोमेन और होस्टिंग वापस मांगी, तो कंपनी ने उसे ट्रांसफर करने से साफ इनकार कर दिया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिकायत:
इस मनमानी के खिलाफ डोमेन रजिस्ट्रार GoDaddy और इंटरनेट की सर्वोच्च संस्था ICANN टिकट नंबर 01630711 में शिकायत दर्ज करा दी गई है (Gटिकट #01704913), जिसकी जांच जारी है।
कानूनी पहलू: पुलिस कौन सी BNS और IT Act की धाराएं लगा सकती है?
चूंकि अब भारत में IPC की जगह भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू है, इसलिए कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार इस कृत्य पर साइबर कानूनों के साथ-साथ BNS की गंभीर आपराधिक धाराएं लगाई जा सकती हैं:
1. भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संभावित धाराएं:
धारा 316 (आपराधिक विश्वासघात – Criminal Breach of Trust): शिकायतकर्ता ने कंपनी पर भरोसा करके उसे पैसे और डोमेन रजिस्टर करने का काम सौंपा था। संपत्ति (डोमेन) को न लौटाना विश्वासघात की श्रेणी में आता है (यह पुरानी IPC की धारा 406 के समकक्ष है)।
धारा 318 (धोखाधड़ी – Cheating): पैसे लेने के बाद वादे के मुताबिक सेवा न देना और असली मालिक को उसके अधिकार से वंचित रखना। (यह पुरानी IPC की धारा 420 के समकक्ष है)।
धारा 324 (Mischief / रिष्टि): किसी व्यक्ति की संपत्ति (इस मामले में डिजिटल संपत्ति) को नुकसान पहुंचाना या उसमें ऐसा बदलाव करना जिससे उसका मूल्य या उपयोगिता कम हो जाए।
2. इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) एक्ट, 2000 की धाराएं:
IT Act 43: असली मालिक की अनुमति के बिना कंप्यूटर, कंप्यूटर सिस्टम या नेटवर्क (cPanel/होस्टिंग) तक पहुंच रोकना या इनकार करना। इसमें भारी जुर्माने का प्रावधान है।
IT Act 66: कंप्यूटर से जुड़े अपराध और बेईमानी से किया गया काम।
IT Act 66C और 66D: इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर, पासवर्ड या पहचान चुराना और कंप्यूटर रिसोर्स का इस्तेमाल करके धोखाधड़ी (Cheating by personation) करना।
उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum) क्या कर सकता है?
यह मामला विशुद्ध रूप से “सेवा में कमी” (Deficiency in Service) और “अनुचित व्यापार व्यवहार” (Unfair Trade Practice) का है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत उपभोक्ता फोरम के पास इस तरह के मामलों में बेहद सख्त अधिकार हैं:
डोमेन/cPanel वापस दिलाने का आदेश: फोरम कंपनी को तुरंत आदेश दे सकता है कि वह बिना किसी देरी के डोमेन का ऑथराइजेशन कोड (EPP Code), cPanel का फुल एक्सेस और होस्टिंग का बैकअप असली मालिक को ट्रांसफर करे।
रिफंड मय ब्याज: यदि शिकायतकर्ता अब इस कंपनी की सेवाएं नहीं चाहता है, तो फोरम कंपनी को वेबसाइट बनाने के लिए ली गई पूरी रकम ब्याज (आमतौर पर 9% से 12%) सहित वापस करने का आदेश दे सकता है।
मानसिक प्रताड़ना और हर्जाना: डोमेन पर कब्जे के कारण न्यूज पोर्टल को जो आर्थिक नुकसान, समय की बर्बादी और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी है, उसके लिए फोरम भारी हर्जाना (Compensation) लगा सकता है।
मुकदमे का खर्च: कानूनी कार्रवाई और वकीलों की फीस का खर्च भी कंपनी को ही वहन करने का निर्देश दिया जा सकता है।
कंपनी का पक्ष नदारद:
इस पूरे विवाद पर फिलहाल Boot Alpha Soft Technology की तरफ से कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण नहीं आया है। न्यूज पोर्टल प्रबंधन का कहना है कि अगर कंपनी जल्द ही डोमेन और एक्सेस ट्रांसफर नहीं करती है, तो वह पुलिस कमिश्नर के साइबर सेल में नामजद FIR दर्ज कराएंगे। कंपनी का जो भी पक्ष सामने आएगा, उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
संवाददाता – विक्रम भगत





















