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दो माह से मानदेय रुका, ऊपर से झाड़ू-पोंछा और टॉयलेट साफ कराने का आरोप!
खरसिया के कोटवार पहुंचे कलेक्टर दरबार, बोले—“हमसे ड्यूटी के नाम पर बेगारी क्यों?”
रायगढ़/खरसिया।05/अक्टुबर/2026| खरसिया तहसील क्षेत्र के कोटवारों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। सोमवार को बड़ी संख्या में कोटवार जिला मुख्यालय पहुंचे और कलेक्टर जनदर्शन में ज्ञापन सौंपकर दो माह से रुके मानदेय का भुगतान कराने की गुहार लगाई। कोटवारों ने तहसील कार्यालय में उनसे कथित तौर पर झाड़ू-पोंछा करवाने और टॉयलेट साफ करवाने का गंभीर आरोप भी लगाया है।
कोटवारों का कहना है कि लंबे समय से मानदेय नहीं मिलने के कारण उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। परिवार चलाने में परेशानी हो रही है, लेकिन इसके बावजूद उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
🔥 “ड्यूटी हमारी, लेकिन काम कौन-कौन सा?”
कोटवारों ने आरोप लगाया कि उन्हें अनावश्यक रूप से विभिन्न कार्यों के लिए ड्यूटी लगाकर परेशान किया जा रहा है। उनका कहना है कि तहसील कार्यालय के अंदर और बाहर साफ-सफाई, झाड़ू-पोंछा जैसे कार्य भी उनसे करवाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, कोटवारों ने आरोप लगाया कि उनसे टॉयलेट तक साफ करवाया जा रहा है।
इस मामले को लेकर कोटवारों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि शासन द्वारा निर्धारित जिम्मेदारियों के अलावा उनसे इस तरह के कार्य कराया जाना उचित नहीं है।
⚠️ शासन के निर्देशों की अनदेखी का आरोप
कोटवार संघ ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि शासन के निर्देशों के बावजूद उनसे उनके निर्धारित कर्तव्यों के अतिरिक्त कथित रूप से बेगारी के कार्य लिए जा रहे हैं। कोटवारों ने इस व्यवस्था पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
💥 कलेक्टर से दो टूक मांग—पहले मानदेय दिलाइए, फिर बंद कराइए बेगारी!
कोटवार संघ ने कलेक्टर से मांग की है कि दो माह से लंबित मानदेय का शीघ्र भुगतान कराया जाए, साथ ही तहसील कार्यालय में कोटवारों से कराए जा रहे कथित अतिरिक्त कार्यों की जांच कराकर उन पर तत्काल रोक लगाई जाए।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या खरसिया के कोटवारों को उनके निर्धारित दायित्व से हटकर साफ-सफाई जैसे कार्य करवाए जा रहे हैं? यदि आरोप सही हैं तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? फिलहाल कोटवारों की शिकायत के बाद मामले ने प्रशासनिक हलकों में भी हलचल बढ़ा दी है।
संवाददाता:– विनोद कुमार चौहान
ग्रामीण भारत न्यूज रायगढ़




















