ग्रामीण भारत न्यूज
बड़ी खबर: लोढ़ाझर विद्युत सबस्टेशन के रक्षा पाली फीडर में बिजली संकट! दिन में पचासों बार बिजली गुल, छह महीने से जनता बेहाल
खरसिया क्षेत्र में विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, बच्चों की पढ़ाई, किसानों की खेती, कारोबार और कार्यालयीन कामकाज प्रभावित; शिकायतों के बावजूद सुधार नहीं होने से उपभोक्ताओं में बढ़ रहा आक्रोश
दिन में पचासों बार बिजली की आंख-मिचौली आखिर कब रुकेगी? लोढ़ाझर सबस्टेशन के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी जवाब दें—मेंटेनेंस हो रहा है तो बिजली व्यवस्था बदहाल क्यों?
संवाददाता: झसकेतन राजहंस
स्थान: ग्राम लोढ़ाझर, विकासखंड एवं तहसील खरसिया, जिला रायगढ़, छत्तीसगढ़।
छह महीने से अधिक समय से बिजली की आंख-मिचौली, दिन में पचासों बार बिजली गुल होने से जनजीवन अस्त-व्यस्त
खरसिया। रायगढ़ जिले के खरसिया विकासखंड एवं तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम लोढ़ाझर स्थित विद्युत सबस्टेशन से संबंधित रक्षा पाली फीडर क्षेत्र में बिजली की बदहाल व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्रवासियों की शिकायतों के अनुसार, पिछले छह महीने से अधिक समय से बिजली की आंख-मिचौली लगातार जारी है। हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि दिन में पचासों बार बिजली गुल हो जाती है। बार-बार बिजली बंद होने और फिर कुछ समय बाद चालू होने की इस समस्या ने आम जनता की दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है।
बच्चों की पढ़ाई हो, बुजुर्गों की दिनचर्या, किसानों के कृषि कार्य, छोटे-बड़े कारोबार, घरेलू जरूरतें या कार्यालयों का कामकाज—बिजली की इस अनिश्चितता से हर वर्ग परेशान है। बिजली कब आएगी और कब चली जाएगी, इसका भरोसा नहीं रहने से लोग अपने जरूरी काम भी व्यवस्थित ढंग से नहीं कर पा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पिछले छह महीने से अधिक समय से दिन में पचासों बार बिजली गुल होने की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो लोढ़ाझर विद्युत सबस्टेशन और रक्षा पाली फीडर से संबंधित जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी अब तक स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाल पाए हैं?
क्या विद्युत लाइनों का नियमित मेंटेनेंस नहीं हो रहा है? क्या तकनीकी खराबियों की पहचान नहीं की जा रही है? क्या शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है? आखिर उपभोक्ताओं को बार-बार बिजली गुल होने की परेशानी से राहत कब मिलेगी?
विद्युत विभाग को इन सवालों का जवाब देना चाहिए। जनता को नियमित बिजली चाहिए, न कि दिनभर पचासों बार बिजली आने-जाने की परेशानी!
विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल, छह महीने में समस्या का समाधान क्यों नहीं?
बिजली की आपूर्ति कभी-कभार बाधित होना एक सामान्य तकनीकी समस्या हो सकती है, लेकिन दिन में पचासों बार बिजली गुल होने की स्थिति यदि लगातार बनी हुई है, तो इसे सामान्य परेशानी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
पिछले छह महीने से अधिक समय से समस्या बने रहने की शिकायत विभागीय रखरखाव, तकनीकी निगरानी और शिकायत निवारण व्यवस्था की समीक्षा की मांग करती है।
यदि विद्युत लाइनों, ट्रांसफॉर्मरों या अन्य उपकरणों में बार-बार खराबी आ रही है, तो संबंधित विभाग को उसके मूल कारणों का पता लगाना चाहिए। यदि मेंटेनेंस में कमी है, तो उसे दूर किया जाना चाहिए। यदि उपकरणों में तकनीकी खामी है, तो आवश्यक मरम्मत की जानी चाहिए।
लेकिन सवाल यह है कि रक्षा पाली फीडर क्षेत्र में बिजली की इस समस्या को दूर करने के लिए अब तक क्या ठोस कार्रवाई हुई है? क्या संबंधित अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया है? क्या पिछले छह महीने की शिकायतों और बिजली बंद होने के रिकॉर्ड की समीक्षा की गई है?
यदि मेंटेनेंस नियमित हो रहा है, तो दिन में पचासों बार बिजली गुल होने की नौबत क्यों आ रही है? और यदि मेंटेनेंस में कमी है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
इन सवालों का जवाब विद्युत विभाग के संबंधित अधिकारियों को देना चाहिए।
बच्चों की पढ़ाई से लेकर किसानों की खेती तक प्रभावित
बिजली की अनियमित आपूर्ति का असर केवल घरों की रोशनी और पंखों तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध शिक्षा, रोजगार, कृषि और व्यापार जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों से है।
बिजली बार-बार बंद होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई में व्यवधान उत्पन्न होता है। ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले बच्चों को इंटरनेट और मोबाइल चार्जिंग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। शाम और रात के समय बिजली गुल होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।
किसानों के लिए बिजली की नियमित आपूर्ति जरूरी है। सिंचाई पंप और मोटर चलाने के लिए बिजली पर निर्भर किसानों को बार-बार आपूर्ति बाधित होने से परेशानी हो सकती है। कृषि कार्यों की समय-सारणी प्रभावित हो सकती है और किसानों को उपलब्ध समय में अपना काम पूरा करने में कठिनाई हो सकती है।
छोटे-बड़े कारोबारियों के लिए भी बिजली आवश्यक है। दुकानों में कंप्यूटर, प्रिंटर, इंटरनेट, बिलिंग मशीन और अन्य उपकरणों का संचालन प्रभावित हो सकता है। बार-बार बिजली गुल होने से काम रुकता है और समय की बर्बादी होती है।
सरकारी कार्यालयों में भी कंप्यूटर, इंटरनेट और डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से कई काम किए जाते हैं। ऐसे में बिजली बार-बार बंद होने से कार्यालयीन कार्यों में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
जब बिजली पर निर्भर इतनी सारी गतिविधियां प्रभावित हो रही हों, तब संबंधित विद्युत विभाग को समस्या की गंभीरता समझते हुए तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए
क्षेत्रवासियों की परेशानी के बीच विद्युत विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है। विद्युत आपूर्ति को सुचारु बनाए रखना, तकनीकी खराबियों की पहचान करना, समय पर मेंटेनेंस करना और उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण करना विभागीय व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं।
यदि दिन में पचासों बार बिजली गुल होने की शिकायत लगातार सामने आ रही है, तो संबंधित अधिकारियों को इसकी जांच करानी चाहिए।
यदि समस्या तकनीकी है, तो उसका समाधान किया जाए। यदि मेंटेनेंस में कमी है, तो उसे दूर किया जाए। यदि शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हो रही है, तो शिकायत निवारण व्यवस्था की समीक्षा की जाए।
और यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही प्रमाणित होती है, तो संबंधित नियमों के अनुसार जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
जनता का सवाल है कि आखिर छह महीने से अधिक समय से जारी बिजली संकट की जिम्मेदारी कौन लेगा?
फोन नहीं उठने की शिकायत से बढ़ती परेशानी
क्षेत्रवासियों की शिकायत है कि बिजली संबंधी समस्या उत्पन्न होने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क करने में भी परेशानी होती है। फोन पर जवाब नहीं मिलने की स्थिति में उपभोक्ताओं को यह जानकारी नहीं मिल पाती कि बिजली क्यों बंद हुई है और कब तक बहाल होगी।
ऐसी स्थिति में लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है।
विद्युत विभाग के पास प्रभावी शिकायत व्यवस्था और अधिकृत संपर्क माध्यम होना चाहिए, ताकि उपभोक्ता अपनी समस्या दर्ज करा सकें और उन्हें कार्रवाई की जानकारी मिल सके।
यदि कोई अधिकारी तत्काल फोन नहीं उठा पाता, तो वैकल्पिक शिकायत व्यवस्था के माध्यम से उपभोक्ताओं की समस्या संबंधित तकनीकी टीम तक पहुंचनी चाहिए।
ग्रामीण भारत न्यूज की मांग
लोढ़ाझर विद्युत सबस्टेशन के रक्षा पाली फीडर क्षेत्र में बिजली की अनियमित आपूर्ति को लेकर उठ रहे सवालों पर विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।
- पिछले छह महीने से अधिक समय की बिजली संबंधी शिकायतों की जांच की जाए।
- दिन में पचासों बार बिजली गुल होने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाए।
- संबंधित विद्युत लाइनों, ट्रांसफॉर्मरों और अन्य उपकरणों का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए।
- मेंटेनेंस कार्यों की गुणवत्ता और प्रभावशीलता की समीक्षा की जाए।
- शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जाए।
- जांच में लापरवाही प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
- नियमित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए।
निष्कर्ष: जनता को राहत कब? दिन में पचासों बार बिजली गुल होने की समस्या का स्थायी समाधान जरूरी
ग्राम लोढ़ाझर स्थित विद्युत सबस्टेशन के रक्षा पाली फीडर क्षेत्र में पिछले छह महीने से अधिक समय से बिजली की आंख-मिचौली की शिकायतें गंभीर जांच की मांग करती हैं। दिन में पचासों बार बिजली गुल होने की स्थिति से आम लोगों के दैनिक जीवन, विद्यार्थियों की पढ़ाई, किसानों के कृषि कार्यों और कारोबार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
ऐसे में विद्युत विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को सामने आकर समस्या का वास्तविक कारण स्पष्ट करना चाहिए। मेंटेनेंस व्यवस्था की समीक्षा होनी चाहिए और बिजली की बार-बार आवाजाही रोकने के लिए स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या लोढ़ाझर विद्युत सबस्टेशन के रक्षा पाली फीडर क्षेत्र की जनता को इसी तरह दिन में पचासों बार बिजली गुल होने की परेशानी झेलनी पड़ेगी, या विद्युत विभाग के अधिकारी अब अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए इस समस्या का स्थायी समाधान करेंगे?
जनता को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि बेहतर विद्युत व्यवस्था चाहिए। अब देखना यह है कि विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाते हैं और क्षेत्रवासियों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
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संवाददाता: झसकेतन राजहंस




















