रायपुर/छत्तीसगढ़। संवाददाता विनिता चौहान।
छत्तीसगढ़ में नए जिलों के गठन के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम तो उठाए गए, लेकिन स्थायी अधोसंरचना अब भी पूरी तरह तैयार नहीं हो सकी है। प्रदेश के छह नवगठित जिलों में संयुक्त जिला कार्यालय यानी कलेक्ट्रेट भवन का निर्माण चार वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। इसके चलते इन जिलों में जिला प्रशासन के महत्वपूर्ण कार्यालय अभी भी किराए के भवनों अथवा वैकल्पिक परिसरों से संचालित किए जा रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, छह नए जिलों के लिए संयुक्त जिला कार्यालय भवनों के निर्माण की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को दी गई है। प्रत्येक भवन के निर्माण के लिए करीब 18.75 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इसके बावजूद निर्माण कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सका और लंबे समय से स्थायी कार्यालय भवनों का इंतजार बना हुआ है।
नए जिलों के गठन के बाद शुरू हुई प्रशासनिक व्यवस्था
छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक सुविधाओं को आम लोगों के करीब पहुंचाने और दूरस्थ क्षेत्रों के विकास को गति देने के उद्देश्य से नए जिलों का गठन किया गया। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला 10 फरवरी 2020 को अस्तित्व में आया। इसके बाद वर्ष 2022 में मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सक्ती, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों का गठन किया गया।
नए जिलों के गठन के साथ ही प्रशासनिक ढांचा खड़ा कर दिया गया और कलेक्टर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों की पदस्थापना भी शुरू हो गई। जिला स्तर पर सरकारी योजनाओं की निगरानी, राजस्व प्रशासन, विकास कार्यों का संचालन, कानून-व्यवस्था से संबंधित समन्वय और आम नागरिकों की समस्याओं के निराकरण के लिए कार्यालयों का संचालन शुरू हो गया। हालांकि स्थायी कलेक्ट्रेट भवन नहीं बन पाने के कारण प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे काम करना पड़ रहा है।
किराए के भवनों में संचालित हो रहे कार्यालय
स्थायी संयुक्त जिला कार्यालय भवन उपलब्ध नहीं होने के कारण नए जिलों में अलग-अलग विभागों को विभिन्न किराए के भवनों में जगह देनी पड़ रही है। इससे प्रशासनिक कार्यालयों के बीच समन्वय और आम लोगों की सुविधा को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
एक ही परिसर में जिला प्रशासन के प्रमुख विभागों के कार्यालय होने से आम नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग स्थानों पर भटकना नहीं पड़ता। कलेक्ट्रेट परिसर में राजस्व, पंचायत, समाज कल्याण, खाद्य, महिला एवं बाल विकास सहित कई महत्वपूर्ण विभागों से संबंधित कार्यों के लिए लोग पहुंचते हैं। लेकिन अलग-अलग भवनों में कार्यालय संचालित होने के कारण नागरिकों को कई बार एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक जाना पड़ता है।
करोड़ों रुपये स्वीकृत, फिर भी निर्माण में देरी
छह नए जिलों के संयुक्त जिला कार्यालय भवनों के लिए करीब 18.75 करोड़ रुपये प्रति भवन की स्वीकृति दी गई है। इतनी बड़ी राशि स्वीकृत होने के बावजूद निर्माण कार्य में लंबा समय लगना प्रशासनिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।
नए जिले बनने के साथ जिस तेजी से प्रशासनिक गतिविधियां शुरू की गईं, उसी अनुपात में स्थायी भवनों का निर्माण भी पूरा होना अपेक्षित था। लेकिन चार वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद कई स्थानों पर भवन निर्माण और उससे जुड़े कार्य अभी पूरे नहीं हो सके हैं।
स्थायी भवनों के अभाव में किराए के भवनों में कार्यालय संचालित करने से सरकारी संसाधनों के उपयोग को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। हालांकि किराए के भवनों में कामकाज चलाना एक अंतरिम व्यवस्था है, लेकिन लंबे समय तक यह व्यवस्था जारी रहने से प्रशासनिक ढांचे को स्थायी आधार देने का उद्देश्य प्रभावित होता है।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में सिविल कार्य पूरा
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सभी संयुक्त जिला कार्यालय भवनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के कलेक्ट्रेट भवन का सिविल कार्य पूरा हो चुका है, जबकि फिलहाल फिनिशिंग का काम चल रहा है।
विभाग का दावा है कि निर्माण कार्य को अंतिम रूप देने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है और 30 अक्टूबर तक सभी संयुक्त जिला कार्यालय भवनों का निर्माण पूरा होने की संभावना है।
यदि निर्धारित समयसीमा में निर्माण कार्य पूरा होता है, तो नए जिलों के प्रशासनिक ढांचे को स्थायी आधार मिलने की उम्मीद है। इससे जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों को एक स्थान पर व्यवस्थित रूप से संचालित करने में मदद मिलेगी।
आम जनता को मिलेगी सुविधा
कलेक्ट्रेट किसी भी जिले के प्रशासनिक ढांचे का प्रमुख केंद्र होता है। जिले के विकास, राजस्व प्रशासन, जनकल्याणकारी योजनाओं, आपदा प्रबंधन, कानून-व्यवस्था से जुड़े समन्वय और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच तालमेल में कलेक्ट्रेट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
स्थायी संयुक्त जिला कार्यालय भवन बनने के बाद अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बेहतर कार्यस्थल उपलब्ध होगा। वहीं आम नागरिकों को भी एक ही परिसर में विभिन्न विभागों से संबंधित सेवाएं और अधिकारियों तक पहुंच की सुविधा मिल सकेगी।
विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों से जिला मुख्यालय आने वाले लोगों के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है। किसी प्रमाणपत्र, राजस्व प्रकरण, पेंशन, राशन, सामाजिक सुरक्षा योजना, भूमि संबंधी मामले या अन्य प्रशासनिक कार्य के लिए नागरिकों को अलग-अलग किराए के भवनों में जाने की आवश्यकता कम होगी।
नए जिलों में अधोसंरचना को लेकर चुनौती
नए जिले बनाना केवल प्रशासनिक सीमा निर्धारित करने तक सीमित नहीं होता। इसके साथ जिला मुख्यालय, कलेक्ट्रेट, पुलिस कार्यालय, न्यायिक एवं अन्य विभागीय कार्यालय, आवासीय सुविधाएं, सड़क, बिजली, पानी और अन्य आवश्यक अधोसंरचना विकसित करना भी जरूरी होता है।
छत्तीसगढ़ के इन छह जिलों में प्रशासनिक कामकाज शुरू हुए कई वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन स्थायी कलेक्ट्रेट भवनों का निर्माण पूरा नहीं होने से यह सवाल बना हुआ है कि नए जिलों के गठन के बाद आवश्यक अधोसंरचना को समयबद्ध तरीके से विकसित क्यों नहीं किया जा सका।
हालांकि अब लोक निर्माण विभाग की ओर से अक्टूबर के अंत तक भवनों को पूरा करने की संभावना जताई गई है। ऐसे में आने वाले समय में इन जिलों के नागरिकों को स्थायी कलेक्ट्रेट भवन की सुविधा मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
समय पर पूरा होना जरूरी
नए जिलों के गठन का मूल उद्देश्य प्रशासन को आम जनता के करीब लाना और विकास कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करना है। इसके लिए स्थायी कार्यालय भवनों का होना बेहद जरूरी है। चार साल से अधिक समय से चल रही अंतरिम व्यवस्था को समाप्त कर जल्द से जल्द स्थायी कलेक्ट्रेट भवन उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।
अब निगाहें लोक निर्माण विभाग की ओर हैं कि स्वीकृत राशि से चल रहे इन निर्माण कार्यों को तय समयसीमा में पूरा किया जाता है या नहीं। यदि 30 अक्टूबर तक भवन तैयार हो जाते हैं, तो छह नए जिलों की प्रशासनिक व्यवस्था को स्थायी आधार मिलने के साथ-साथ आम जनता को भी सरकारी कार्यालयों तक पहुंच में बड़ी सुविधा मिल सकती है।
ग्रामीण भारत न्यूज के लिए संवाददाता विनिता चौहान की रिपोर्ट।




















