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*ग्रामीण भारत न्यूज | कोरबा, छत्तीसगढ़*
*रिपोर्ट: Vinod Chouhan
*प्रकाशन तिथि: 21 जुलाई 2026*
*हाइलाइट्स*
– कोरबा की CSBE कॉलोनी से 7 साल के पेड़ काटकर 2 ट्रक लकड़ी गायब
– तस्कर सुनील गुप्ता गिरफ्तार, पहले भी लकड़ी तस्करी में नाम आ चुका
– रेंजर कार्यालय से सिर्फ 100 मीटर दूर हुई घटना, वन विभाग पर सवाल
– पुलिस ने BNS धारा 303(2) में FIR दर्ज की,
लकड़ी रिकवरी जारी
– हसदेव जंगल “मध्य भारत का फेफड़ा” कहलाता है, कटाई से पर्यावरण खतरे में
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### *कोरबा: “ऊर्जाधानी” में वन विभाग पर दाग*
छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” और “जंगलों का प्रदेश” कहा जाता है। कोरबा जिला तो इसकी पहचान ही है। यहां हसदेव का घना जंगल है जिसे पर्यावरण विशेषज्ञ “मध्य भारत का फेफड़ा” कहते हैं। लाखों पेड़ यहां की हवा साफ करते हैं, आदिवासियों की जिंदगी
चलाते हैं।
लेकिन बीते कुछ सालों से इस “फेफड़े” में लगातार छेद हो रहे हैं। पेड़ कट रहे हैं, तस्करी हो रही है और अब तो हालत ये हो गई है कि सरकार की नाक के नीचे, वन विभाग के रेंजर ऑफिस से सिर्फ 100 मीटर दूर से साल के कीमती पेड़ों के तस्कर 2 ट्रक लकड़ी उड़ा कर ले गए।
ये मामला सिर्फ लकड़ी चोरी का नहीं है। ये वन विभाग की कार्यप्रणाली, लापरवाही और मिलीभगत का आईना है।
### *क्या है पूरा मामला? CSBE कॉलोनी की घटना*
घटना कोरबा शहर के बीचों-बीच स्थित *छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल CSBE की आवासीय कॉलोनी* की है।
यहां कुछ सालों के पेड़ सूख चुके थे। कुछ पेड़ “साल बोरर” नामक कीड़े के कारण पूरी तरह खोखले हो गए थे। ये पेड़ कॉलोनी में रहने वाले लोगों के लिए खतरा बन गए थे। तेज आंधी-तूफान में गिर सकते थे।
इसलिए *राजस्व विभाग, वन विभाग और CSBE* की संयुक्त बैठक में फैसला हुआ कि कॉलोनी के *204 चिन्हित पेड़ों* को काटा जाएगा। चूंकि ये जमीन राजस्व की थी, वन की नहीं, इसलिए वन विभाग ने कटाई का खर्चा भी SDM कार्यालय में जमा कर दिया था।
नियम क्या कहता है?
नियम ये कहता है कि कटाई के बाद सभी लकड़ी को सरकारी डिपो में जमा करना होगा। उसकी नीलामी होगी और पैसा सरकारी खजाने में जाएगा।
लेकिन हुआ क्या?
### *कैसे हुआ खेल? रेंजर ने किसे दिया ठेका*
आरोप है कि कोरबा वन मंडल के *रेंजर विक्रांत सिंह कंवर* ने पेड़ कटाई का जिम्मा *सुनील गुप्ता* नामक व्यक्ति को सौंप दिया।
अब सबसे बड़ा सवाल यहीं है। सुनील गुप्ता कौन है?
वन विभाग के रिकॉर्ड और पुरानी FIR खंगालें तो पता चलता है कि सुनील गुप्ता का नाम पहले भी लकड़ी तस्करी में आ चुका है।
1. *मानिकपुर खदान क्षेत्र* – नीलगिरी के पेड़ काटने का मामला
2. *जांजगीर-चांपा* – लकड़ी से भरा ट्रक पकड़ा गया था। उस ट्रक के ट्रांजिट पास TP पर कोरबा वन मंडल के अधिकारी का हस्ताक्षर होने का शक है। उस केस की जांच आज तक अधूरी है।
ऐसे विवादित व्यक्ति को पेड़ काटने का काम क्यों दिया गया? क्या जांच नहीं हुई?
### *100 मीटर दूर से उड़ गई 2 ट्रक लकड़ी*
14 जुलाई 2026 की शाम को ये पूरा खेल हुआ।
वन विभाग ने अभी सिर्फ *7 पेड़ ही काटे थे*। कटे हुए साल के तनों को ट्रकों में लोड किया गया। नियम के अनुसार इन्हें सीधे सरकारी डिपो जाना चाहिए था।
लेकिन सुनील गुप्ता ने अपने लोगों के साथ मिलकर *2 ट्रक लकड़ी* को सीधे रायपुर के किसी प्राइवेट डिपो में भेज दिया। लकड़ी की कीमत लाखों में बताई जा रही है।
सबसे चौंकाने वाली बात – ये सब *रेंजर कार्यालय से सिर्फ 100 मीटर की दूरी* पर हुआ। कॉलोनी में CCTV भी लगा है जिसमें ट्रकों में लोडिंग की फुटेज है।
जब CSBE के कार्यालय अभियंता ने ट्रकों को बाहर जाते देखा तब जाकर अधिकारियों को पता चला कि लकड़ी गायब है।
### *गिरफ्तारी और कबूलनामा*
मामला सामने आते ही हड़कंप मच गया। वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर *रेंजर विक्रांत सिंह कंवर* ने खुद *सुनील गुप्ता* के खिलाफ थाने में शिकायत दी।
कोरबा पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सुनील गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया है।
*SDO कोरबा वन मंडल सूर्यकांत सोनी* ने कहा:
“लकड़ी तस्कर ने कबूल किया है कि उसने अनधिकृत रूप से लकड़ी बेची है। हमारा पूरा फोकस अभी लकड़ी रिकवर करने पर है। अगर विभाग के किसी अधिकारी-कर्मचारी की संलिप्तता मिलती है तो उस पर भी कड़ी कार्रवाई होगी।”
पुलिस ने *BNS की धारा 303(2)* – यानी चोरी के तहत FIR दर्ज की है और मामले की विवेचना शुरू कर दी है।
### *वन विभाग की 5 बड़ी लापरवाही*
इस पूरे मामले ने वन विभाग की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं:
1. *गलत व्यक्ति को ठेका*: जिस व्यक्ति का रिकॉर्ड पहले से खराब है उसे काम क्यों दिया गया?
2. *निगरानी का अभाव*: रेंजर ऑफिस के पास से लकड़ी गई और किसी को पता नहीं चला?
3. *CCTV के बाद भी देरी*: फुटेज था फिर भी कार्रवाई 14 जुलाई की शाम को ही क्यों हुई?
4. *पुराने केस अधूरे*: जांजगीर में TP वाला मामला आज तक क्यों लटका है?
5. *लकड़ी का हिसाब नहीं*: सिर्फ 7 पेड़ कटे थे, बाकी 197 पेड़ों की सुरक्षा का क्या?
### *पर्यावरणविद क्या कह रहे हैं?*
कोरबा के वरिष्ठ पर्यावरण कार्यकर्ता का कहना है:
“हसदेव के जंगल पहले ही कोल माइनिंग और पेड़ कटाई से परेशान हैं। अब शहर के बीच से इस तरह तस्करी होगी तो बचेगा क्या? साल का एक पेड़ 50 साल में तैयार होता है। एक बार कट गया तो 50 साल लगेंगे। वन विभाग को कठोर कदम उठाने होंगे।”
### *आदिवासी और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया*
CSBE कॉलोनी में रहने वाले लोग डरे हुए हैं। उनका कहना है:
“हमने कई बार शिकायत की थी कि सूखे पेड़ गिर सकते हैं। लेकिन हमें नहीं पता था कि काटने के नाम पर लकड़ी ही गायब कर दी जाएगी। ये सरकारी संपत्ति है, ये हमारी संपत्ति है।”
आदिवासी संगठनों ने भी इस घटना की निंदा की है। उनका कहना है कि जंगल उनके देवता हैं। इस तरह तस्करी से न सिर्फ पर्यावरण बल्कि उनकी संस्कृति पर भी चोट है।
### *सरकार और प्रशासन का अगला कदम क्या?*
1. *जांच कमेटी*: वन विभाग ने आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं। 15 दिन में रिपोर्ट मांगी है।
2. *लकड़ी रिकवरी*: पुलिस रायपुर के डिपो में छापा मारकर लकड़ी जब्त करने की कोशिश कर रही है।
3. *निलंबन की मांग*: कई सामाजिक संगठनों ने रेंजर विक्रांत सिंह कंवर के निलंबन की मांग की है।
4. *नए नियम*: अब शहर के अंदर पेड़ कटाई के लिए 3-स्तरीय निगरानी का प्रस्ताव है।
### *छत्तीसगढ़ में लकड़ी तस्करी का पुराना इतिहास*
ये पहला मामला नहीं है।
– *2024 जांजगीर*: 10 ट्रक सागौन पकड़ा गया
– *2025 सरगुजा*: रात में ट्रैक्टर से साल की लकड़ी ले जाते 4 तस्कर गिरफ्तार
– *2025 बिलासपुर*: फर्जी TP पर लकड़ी ले जाते ट्रक जब्त
हर बार जांच होती है, FIR होती है, लेकिन नेटवर्क जस का तस रहता है।
### *कानून क्या कहता है?*
*भारतीय वन अधिनियम 1927* और *BNS 2023 की धारा 303(2)* के तहत सरकारी संपत्ति की चोरी पर 3 से 7 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।
अगर सरकारी अधिकारी की मिलीभगत साबित होती है तो *भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम* भी लगेगा।
### *निष्कर्ष: जवाबदेही तय हो*
कोरबा की ये घटना एक चेतावनी है। अगर रेंजर ऑफिस के पास से लकड़ी चोरी हो सकती है तो जंगल में क्या हाल होगा?
अब जरूरत है:
1. दोषियों पर कड़ी कार्रवाई
2. लकड़ी की पूरी रिकवरी
3. विभाग में पारदर्शिता
4. स्थानीय लोगों को निगरानी में शामिल करना
वरना “मध्य भारत का फेफड़ा” धीरे-धीरे दम तोड़ देगा।
*ग्रामीण भारत न्यूज* इस मामले पर लगातार नजर रखेगा। अगली अपडेट में हम आपको बताएंगे कि लकड़ी रिकवर हुई या नहीं और किस अधिकारी पर गाज गिरी।





















