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विक्रम-1 की ऐतिहासिक सफलता: भारत अब ग्लोबल स्पेस पावर, डॉ. जितेंद्र सिंह बोले- “भारत के लिए अब आसमान भी सीमा नहीं”

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ग्रामीण भारत न्यूज –

श्रीहरिकोटा / नई दिल्ली, 18 जुलाई 2026 : भारत ने आज अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया। हैदराबाद की निजी अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस का रॉकेट विक्रम-1 आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक प्रक्षेपित हुआ और अपने तय कक्ष लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित हो गया। इसके साथ ही भारत दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया जिसकी किसी निजी कंपनी ने जमीन से ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च कर उसे सफलतापूर्वक ऑर्बिट में पहुंचाया।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस ऐतिहासिक मिशन आगमन का लाइव प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा से देखा। उन्होंने कहा कि विक्रम-1 की यह सफलता सिर्फ एक रॉकेट लॉन्च नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि भारत अब तेजी से बढ़ रही ग्लोबल स्पेस इकॉनमी में एक अहम खिलाड़ी के तौर पर उभर चुका है।

PM मोदी के स्पेस सुधारों की बड़ी जीत
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह सफलता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 2020 में लिए गए उस ऐतिहासिक फैसले को सही साबित करती है, जिसके तहत देश के अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोला गया था।

उन्होंने कहा, “अगर प्रधानमंत्री मोदी ने साहसिक कदम उठाकर स्पेस सेक्टर को प्राइवेट कंपनियों के लिए नहीं खोला होता, तो आज हम यह ऐतिहासिक उपलब्धि नहीं देख पाते। इन सुधारों ने भारतीय इनोवेटर्स की अपार क्षमता को नई राह दिखाई है। आज एक ऐसा इकोसिस्टम बन गया है जहां वर्ल्ड-क्लास टेक्नोलॉजी को पूरी तरह भारत में ही सोचा, विकसित और लॉन्च किया जा सकता है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस उपलब्धि पर स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने इसे भारत के बढ़ते स्पेस इकोसिस्टम के लिए गर्व का क्षण और देश की वैज्ञानिक क्षमता, उद्यमिता और इनोवेशन पर आधारित विकास का प्रतीक बताया।

क्या है विक्रम-1? पूरी तरह स्वदेशी रॉकेट
विक्रम-1 भारत का पहला पूरी तरह से निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है। इसकी खास बातें ये हैं:

पेलोड क्षमता: यह रॉकेट लो अर्थ ऑर्बिट में 350 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम है।
ऊंचाई: लगभग 22 मीटर ऊंचा यह रॉकेट पूरी तरह भारत में बना है।
स्वदेशी तकनीक: इसमें भारत का पहला पूरी तरह से कार्बन-कंपोजिट ऑर्बिटल रॉकेट, 100% 3D-प्रिंटेड लिक्विड इंजन, एडवांस्ड न्यूमेटिक सेपरेशन सिस्टम और देश के सबसे लंबे मोनोलीथिक कार्बन-कंपोजिट रॉकेट स्टेज में से एक शामिल है।
प्रमाणित सिस्टम: इस मिशन ने प्रोपल्शन, एवियोनिक्स, टेलीमेट्री, नेविगेशन और फ्लाइट-कंट्रोल जैसे सभी महत्वपूर्ण सिस्टम को सफलतापूर्वक प्रमाणित कर दिया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि दुनिया में आमतौर पर पहले लॉन्च में सिर्फ डमी पेलोड भेजे जाते हैं। लेकिन विक्रम-1 ने अपने पहले ही मिशन में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को परखने के लिए डिजाइन किए गए एक्सपेरिमेंटल पेलोड भेजे। इसमें भारतीय और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के कस्टमर पेलोड और टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन भी शामिल थे। यह भारत की कमर्शियल लॉन्च क्षमताओं में ग्लोबल स्पेस कम्युनिटी के बढ़ते भरोसे को दिखाता है।

स्काईरूट, इसरो और IN-SPACe की तिकड़ी
मंत्री ने इस सफलता का श्रेय स्काईरूट एयरोस्पेस के साथ-साथ इसरो, IN-SPACe और अंतरिक्ष विभाग की टीम को भी दिया। उन्होंने कहा कि यह सफलता पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल की जीत है।

उन्होंने स्काईरूट के संस्थापकों पवन कुमार चंदाना और भरत डाका को विशेष बधाई दी। डॉ. सिंह ने कहा, “मैंने इन युवाओं के सफर को शुरू से देखा है। उनका तकनीकी आत्मविश्वास, क्रिएटिविटी और नए तरीके से सोचने की क्षमता काबिले तारीफ है। आज की कामयाबी सालों की मेहनत और भारत के युवा उद्यमियों के संकल्प का नतीजा है।”

उन्होंने IN-SPACe को भी बधाई दी जिसने निजी कंपनियों और इसरो के बीच समन्वय का एक बेहतरीन फ्रेमवर्क तैयार किया।

भारत की स्पेस इकॉनमी को मिलेगा बूस्ट
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2020 के सुधारों के बाद भारत के स्पेस इकोसिस्टम में जबरदस्त बदलाव आया है। कुछ साल पहले तक जहां एक भी प्राइवेट लॉन्च इकोसिस्टम नहीं था, वहीं आज भारत में 400 से ज्यादा स्पेस स्टार्ट-अप काम कर रहे हैं। भारत को अपना पहला स्पेस यूनिकॉर्न भी मिल चुका है।

वर्तमान में भारत की स्पेस इकॉनमी लगभग 9 बिलियन अमेरिकी डॉलर की है। सरकार का लक्ष्य अगले दशक में इसे बढ़ाकर 44 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक ले जाना है। विक्रम-1 की सफलता इस लक्ष्य को हासिल करने में मील का पत्थर साबित होगी।

मंत्री ने कहा कि इस सफलता से भारत सैटेलाइट लॉन्च के ग्लोबल कमर्शियल मार्केट में एक मजबूत और सस्ता विकल्प बनकर उभरेगा। इससे भारत को विदेशी मुद्रा भी मिलेगी और देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

गांव तक पहुंचेगा फायदा
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष तकनीक का सीधा फायदा देश के गांवों तक पहुंचेगा। सस्ते और तेज सैटेलाइट लॉन्च की सुविधा मिलने से ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट, टेली-मेडिसिन, डिजिटल शिक्षा और मौसम की सटीक जानकारी जैसी सुविधाएं और बेहतर होंगी।

उन्होंने कहा, “जब गांव का किसान अपने मोबाइल पर सटीक मौसम का अलर्ट पाता है, जब दूरदराज का बच्चा ऑनलाइन क्लास करता है, तो उसके पीछे ऐसी ही तकनीक काम करती है। विक्रम-1 ने उस भविष्य का दरवाजा खोल दिया है।”

“अब आसमान भी सीमा नहीं”
अपना संबोधन खत्म करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “विक्रम-1 की सफलता किसी एक मिशन की सफलता से कहीं बढ़कर है। यह एक नए युग की शुरुआत है। इसमें भारतीय इनोवेशन को साहसिक नीतिगत सुधारों और मजबूत पब्लिक-प्राइवेट सहयोग का समर्थन प्राप्त है। यह मिशन अंतरराष्ट्रीय स्पेस सेक्टर में भारत को एक भरोसेमंद, विश्वसनीय और तकनीकी रूप से एडवांस्ड पार्टनर के तौर पर स्थापित करता है।”

उन्होंने अंत में कहा, “भारत के लिए, अब आसमान ही सीमा नहीं है।”

आज़ादी का अमृत महोत्सव को मिली नई उड़ान
यह सफलता आज़ादी का अमृत महोत्सव के दौरान आई है। यह 140 करोड़ भारतीयों के संकल्प, आत्मनिर्भर भारत के विजन और नए भारत की उड़ान का प्रतीक है।

PIB के अनुसार रिलीज आईडी 2286150 को हिंदी के साथ अंग्रेजी, गुजराती, तमिल, तेलुगु और मलयालम में भी जारी किया गया है।

स्रोत: PIB Delhi, अंतरिक्ष विभाग | प्रकाशन समय: 18 जुलाई 2026, शाम 5:15 बजे।

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