🚨 BREAKING NEWS | बरौद में दर्दनाक हादसा
चलते वाहन से कूदे ड्राइवर, पीछे के पहिए ने कुचला… मौके पर गई जान!
SECL क्षेत्र में कार्यरत हरेंद्र यादव की मौत से मचा हड़कंप, दो मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
घरघोड़ा/बरौद, 6 अक्टूबर 2026। औद्योगिक क्षेत्र बरौद में सोमवार देर रात करीब 10:30 बजे एक दर्दनाक और हृदयविदारक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। SECL क्षेत्र में कार्यरत हरेंद्र यादव, निवासी मेरठ (उत्तर प्रदेश) की एक वाहन हादसे में मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई, वहीं साथी कर्मचारियों में शोक की लहर दौड़ गई।
⚠️ प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ऐसे हुआ खौफनाक हादसा
साथ काम करने वाले कर्मचारियों एवं प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हरेंद्र यादव अपना वाहन खाली करने के बाद वापस आ रहे थे। इसी दौरान कथित रूप से वाहन का ब्रेक फेल हो गया। ढलान होने के कारण वाहन तेजी से अनियंत्रित होने लगा।
बताया जा रहा है कि वाहन के ढलान से नीचे गिरने की आशंका को देखते हुए हरेंद्र यादव ने अपनी जान बचाने के लिए चलते वाहन से छलांग लगा दी। लेकिन अगले ही पल ऐसा हादसा हुआ, जिसने सबको स्तब्ध कर दिया।
नीचे कूदते ही हरेंद्र वाहन के पीछे के पहिए की चपेट में आ गए। हादसा इतना भयावह था कि मौके पर ही उनकी जान चली गई।
🏥 एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया, डॉक्टर ने मृत घोषित किया
घटना के तत्काल बाद कंपनी की एंबुलेंस से हरेंद्र यादव को घरघोड़ा अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस हादसे के वास्तविक कारणों और घटनाक्रम के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
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🔥 हादसे के बाद उठे बड़े सवाल—ड्यूटी खत्म होने के बाद भी क्यों कराया जा रहा था काम?
इस दर्दनाक हादसे के बाद अब ड्यूटी टाइम, ओवरटाइम और कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
साथी कर्मचारियों के अनुसार हरेंद्र यादव की निर्धारित ड्यूटी कथित तौर पर दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे तक थी। कर्मचारियों का आरोप है कि इसके बाद भी उनसे काम कराया जा रहा था।
कर्मचारियों की ओर से KLP इंटरप्राइजेज को लेकर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि आवश्यकता के अनुसार कर्मचारियों से ओवरटाइम कराया जाता है और कथित तौर पर ओवरटाइम नहीं करने पर नौकरी से निकालने की धमकी तक दी जाती है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस, श्रम विभाग और संबंधित विभागों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अब सवाल सिर्फ एक हादसे का नहीं, बल्कि व्यवस्था का है—
❓ अगर ड्यूटी का समय समाप्त हो चुका था तो हरेंद्र से आगे काम क्यों कराया गया?
❓ क्या उन्हें पर्याप्त आराम मिला था?
❓ क्या वाहन की ड्यूटी से पहले तकनीकी जांच हुई थी?
❓ क्या ब्रेक सिस्टम पहले से खराब था?
❓ क्या ओवरटाइम के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया?
❓ क्या समय रहते वाहन की खराबी सामने आ जाती तो हादसा टाला जा सकता था?
इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
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💔 एक हादसा… और उजड़ गया पूरा परिवार
हरेंद्र यादव की मौत ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। बताया जा रहा है कि परिवार में कमाने वाला कोई अन्य सदस्य नहीं है। मृतक के दो छोटे बच्चे हैं, जिनकी उम्र करीब 8 से 10 वर्ष बताई जा रही है। उनके अलावा एक छोटा भाई भी है।
जिस पिता के सहारे बच्चों का भविष्य संवरना था, आज वही पिता इस दुनिया में नहीं हैं। एक हादसे ने न सिर्फ एक जिंदगी छीन ली, बल्कि परिवार के सामने रोजी-रोटी और बच्चों के भविष्य का बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
स्थानीय लोगों और सहकर्मियों के अनुसार हरेंद्र यादव मिलनसार एवं व्यवहार कुशल व्यक्ति थे। वे सभी के साथ हिल-मिलकर रहते थे और कार्यस्थल पर उनकी अच्छी पहचान थी।
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🚨 कर्मचारी संघ में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी
हादसे के बाद कर्मचारी संघ में भी नाराजगी देखने को मिल रही है। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मृतक परिवार के साथ उचित न्याय और नियमानुसार मुआवजा नहीं किया गया, तो कर्मचारी संघ हड़ताल एवं आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगा।
संघ का कहना है कि मजदूर और ड्राइवर सिर्फ काम करने वाली मशीन नहीं हैं। उनके पीछे भी परिवार, बच्चे और जिम्मेदारियां हैं। कंपनियों को उत्पादन और काम के साथ-साथ कर्मचारियों की सुरक्षा, ड्यूटी टाइम, आराम और अधिकारों को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।
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⚠️ बरौद हादसे ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े किए गंभीर सवाल
बरौद की इस घटना ने औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या वाहनों की नियमित तकनीकी जांच होती है?
क्या ब्रेक सिस्टम की जांच रिकॉर्ड में दर्ज होती है?
क्या ड्राइवरों को पर्याप्त आराम दिया जाता है?
ड्यूटी खत्म होने के बाद काम कराने की जांच होगी?
क्या ओवरटाइम नियमों का पालन किया गया?
क्या मृतक के परिवार को नियमानुसार उचित मुआवजा मिलेगा?
फिलहाल इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। वहीं मृतक के परिजनों और कर्मचारी संघ की निगाहें अब KLP इंटरप्राइजेज एवं संबंधित जिम्मेदार पक्षों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
💔 एक जिंदगी चली गई… एक परिवार बेसहारा हो गया…
दो मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस हादसे के बाद जिम्मेदारी तय होगी या यह मामला भी महज एक दुर्घटना बनकर फाइलों में दब जाएगा?
संवाददाता:– विष्णु चौहान, घरघोड़ा
ग्रामीण भारत न्यूज, रायगढ़ छत्तीसगढ़




















