ग्रामीण भारत न्यूज | संवाददाता विनोद चौहान
देश में विधायक बनने के बाद मिलने वाला वेतन हर राज्य में एक जैसा नहीं है। संविधान के तहत विधायकों के वेतन और भत्ते तय करने का अधिकार राज्यों की विधानसभाओं के पास है। यही वजह है कि एक राज्य के विधायक को मिलने वाला मासिक पैकेज दूसरे राज्य के विधायक से काफी अधिक या कम हो सकता है।
विधायकों की कमाई को समझने के लिए केवल मूल वेतन देखना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता, कार्यालय खर्च, टेलीफोन, आवास, वाहन और चिकित्सा जैसी सुविधाओं को भी ध्यान में रखना पड़ता है।
🥇 सबसे ज्यादा वेतन किस राज्य में?
उपलब्ध 2025 की रिपोर्ट के अनुसार तेलंगाना के विधायक सबसे अधिक वेतन पाने वाले विधायकों में शीर्ष पर रहे हैं। रिपोर्ट में तेलंगाना के विधायकों को वेतन और विभिन्न भत्तों को मिलाकर करीब ₹2.75 लाख प्रतिमाह मिलने की जानकारी दी गई थी।
बताया गया था कि तेलंगाना में विधायक का कुल मासिक पैकेज पहले करीब ₹1.25 लाख था, जिसे बढ़ाकर लगभग ₹2.75 लाख किया गया।
इस आंकड़े का मतलब यह नहीं है कि विधायक को ₹2.75 लाख केवल मूल वेतन के रूप में मिलता है। इसमें अलग-अलग भत्ते भी शामिल हैं। इसलिए राज्यों की तुलना करते समय कुल मासिक पैकेज और बेसिक सैलरी में अंतर समझना बेहद जरूरी है।
तमिलनाडु का नया फैसला क्यों चर्चा में है?
तमिलनाडु में विधायकों को सरकारी वाहन उपलब्ध कराने तथा वाहन के पेट्रोल-डीजल और रखरखाव के लिए ₹75,000 प्रतिमाह और सहायक के लिए ₹25,000 प्रतिमाह की अतिरिक्त सुविधा देने की व्यवस्था चर्चा में है।
इस हिसाब से विधायक को वेतन के अलावा करीब ₹1 लाख प्रतिमाह की अतिरिक्त सुविधा मिल सकती है। इसके अलावा स्वास्थ्य बीमा कवर बढ़ाने की भी बात सामने आई है।
यानी किसी विधायक की वास्तविक सरकारी सुविधा को केवल उसके बैंक खाते में आने वाली सैलरी से नहीं आंका जा सकता।
केरल में वेतन कम, लेकिन सुविधाएं अलग
उपलब्ध जानकारी के अनुसार केरल के विधायक का मासिक वेतन करीब ₹70,000 है। इसमें विभिन्न प्रकार के भत्ते शामिल हैं।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि केरल के विधायक को केवल ₹70 हजार का ही सरकारी लाभ मिलता है। यात्रा, आवास, चिकित्सा, दैनिक भत्ता और अन्य सुविधाएं नियमों के अनुसार अलग से उपलब्ध हो सकती हैं।
यही अंतर विधायक वेतन की तुलना को थोड़ा जटिल बनाता है।
हरियाणा में घर और कार के लिए बड़ा लोन
हरियाणा में विधायकों को वेतन और भत्तों के अलावा आवास तथा वाहन संबंधी सुविधाएं भी मिलती हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार विधायक घर या मोटर कार अथवा दोनों के लिए ₹1 करोड़ तक का लोन लेने की सुविधा पा सकते हैं।
इसके अलावा मकान की मरम्मत और आवश्यक बदलाव के लिए भी एडवांस की व्यवस्था हो सकती है। विधायक और उनके परिवार के सदस्यों के लिए चिकित्सा सुविधाएं भी नियमों के तहत उपलब्ध हैं।
विधायक विकास निधि को वेतन समझना गलत
ओडिशा में वित्त वर्ष 2025-26 से प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए ₹5 करोड़ की विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास राशि का प्रावधान बताया गया है।
लेकिन यह पैसा विधायक की निजी आय नहीं है। यह सार्वजनिक धन है, जिसका उपयोग सड़क, शिक्षा और अन्य विकास कार्यों में किया जाता है।
इसलिए विधायक की व्यक्तिगत सैलरी और विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए मिलने वाली सरकारी राशि को अलग-अलग समझना जरूरी है।
आखिर राज्यों में इतना अंतर क्यों?
विधायकों के वेतन में अंतर के पीछे कई वजहें हैं। राज्य की आर्थिक स्थिति, जीवन-यापन की लागत, निर्वाचन क्षेत्र का आकार, यात्रा की आवश्यकता और राज्य की राजनीतिक प्राथमिकताएं इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इसके अलावा समय-समय पर राज्य की विधानसभा कानून बनाकर वेतन और भत्तों में संशोधन कर सकती है।
विवेचनात्मक निष्कर्ष
यदि वेतन और उपलब्ध रिपोर्ट में बताए गए भत्तों को मिलाकर कुल मासिक पैकेज की बात की जाए, तो उपलब्ध 2025 के आंकड़ों में तेलंगाना करीब ₹2.75 लाख प्रतिमाह के साथ सबसे ऊपर दिखाई देता है।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है—“सबसे अधिक वेतन” और “सबसे अधिक कुल सरकारी सुविधा” एक ही बात नहीं है।
किसी राज्य में विधायक को अधिक नकद वेतन मिल सकता है, जबकि दूसरे राज्य में कम वेतन के बावजूद सरकारी आवास, वाहन, चिकित्सा, यात्रा, स्टाफ और अन्य सुविधाओं का मूल्य काफी अधिक हो सकता है।
इसीलिए देश के विधायकों की आर्थिक सुविधाओं की वास्तविक तुलना करने के लिए तीन चीजों को अलग-अलग देखना चाहिए—मूल वेतन, नकद भत्ते और गैर-नकद सरकारी सुविधाएं।
ग्रामीण भारत न्यूज के लिए संवाददाता विनोद चौहान





















