11 सितंबर तक भुगतान नहीं किया तो कट सकते हैं कनेक्शन, सरकारी विभागों पर हजारों करोड़ रुपये की देनदारी
रायपुर/छत्तीसगढ़ | ग्रामीण भारत न्यूज | संवाददाता विनोद चौहान
छत्तीसगढ़ में बिजली बिल के बकाये को लेकर अब सरकारी विभागों पर भी सख्ती शुरू हो गई है। आम उपभोक्ताओं से समय पर बिजली बिल जमा कराने के लिए कार्रवाई करने वाला बिजली विभाग अब सरकारी कार्यालयों से भी बकाया वसूली के लिए कड़ा कदम उठा रहा है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) ने बकाया बिजली बिल वाले सरकारी विभागों और कार्यालयों को भुगतान के लिए 11 सितंबर 2026 तक की अंतिम समय-सीमा दी है। निर्धारित अवधि में बकाया राशि जमा नहीं होने पर संबंधित सरकारी कार्यालयों के बिजली कनेक्शन काटे जाने की कार्रवाई की जा सकती है।
इस कार्रवाई ने सरकारी विभागों में हलचल बढ़ा दी है। बिजली कंपनी का स्पष्ट संदेश है कि बिजली का उपयोग करने वाले सरकारी संस्थानों को भी अपने बिलों का भुगतान निर्धारित समय पर करना होगा। लंबे समय से लंबित भुगतान के कारण बिजली कंपनी पर वित्तीय दबाव बढ़ने की बात सामने आ रही है।
सरकारी विभागों पर तीन हजार करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया
उपलब्ध जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ के विभिन्न सरकारी विभागों और उनसे संबंधित संस्थानों पर बिजली बिल की बकाया राशि 3,000 करोड़ रुपये से अधिक है। यह राशि लगभग ₹3,432 करोड़ बताई जा रही है। इतनी बड़ी रकम लंबे समय से लंबित होने के कारण बिजली वितरण कंपनी ने अब बकायेदार सरकारी कार्यालयों के खिलाफ चरणबद्ध कार्रवाई तेज कर दी है।
बताया जा रहा है कि बकाया राशि में नगरीय निकायों और पंचायत एवं ग्रामीण विकास से जुड़े संस्थानों की हिस्सेदारी काफी बड़ी है। अकेले नगरीय निकायों पर करीब ₹1,596 करोड़ तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े संस्थानों पर लगभग ₹1,121 करोड़ का बकाया बताया गया है।
बिजली कंपनी के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी संस्थानों से नियमित भुगतान नहीं होने पर वितरण व्यवस्था और कंपनी की वित्तीय स्थिति पर असर पड़ता है।
खैरागढ़ नगर पालिका में पहले ही दिखी कार्रवाई
बकाया भुगतान को लेकर बिजली विभाग की सख्ती का असर कुछ स्थानों पर पहले ही दिखाई दे चुका है। खैरागढ़ नगर पालिका का बिजली कनेक्शन बकाया बिल के चलते काटे जाने की जानकारी सामने आई है। कनेक्शन कटने के बाद कार्यालय में कर्मचारियों को टॉर्च की रोशनी में काम करना पड़ा।
यह घटना सरकारी संस्थानों के लिए एक तरह का संकेत भी मानी जा रही है कि अब बिजली बिल के भुगतान में लापरवाही को पहले की तरह नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
रायपुर जिला न्यायालय के बार रूम में भी अंधेरा
बकाया बिजली बिल को लेकर कार्रवाई का असर रायपुर में भी देखने को मिला। जानकारी के मुताबिक रायपुर जिला न्यायालय के बार रूम का बिजली कनेक्शन भी काटा गया, जिसके बाद वहां अंधेरे की स्थिति निर्मित हो गई।
सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों के बिजली कनेक्शन काटे जाने की घटनाओं ने बिजली बिल भुगतान की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। एक तरफ आम उपभोक्ताओं से समय पर भुगतान की अपेक्षा की जाती है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी संस्थानों में बड़ी मात्रा में बिल लंबित रहने से बिजली कंपनी को कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
बिलासपुर में स्ट्रीट लाइटों पर भी कार्रवाई
बिलासपुर क्षेत्र में भी बकाया बिजली बिल को लेकर कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। कुछ इलाकों में स्ट्रीट लाइटों के कनेक्शन काटे जाने के बाद बड़ी संख्या में सड़क की लाइटें बंद हो गईं। इससे रात के समय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
स्ट्रीट लाइटें सार्वजनिक सुविधा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में बिजली बिल के भुगतान में देरी का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ सकता है। यही कारण है कि बिजली कंपनी की कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है।
जुलाई में भी काटे गए थे हजारों कनेक्शन
बिजली बकाये के खिलाफ यह पहली बड़ी कार्रवाई नहीं है। इससे पहले जुलाई 2026 में करीब 10 हजार सरकारी कार्यालयों के बिजली कनेक्शन काटे जाने की जानकारी सामने आई थी। बाद में सरकारी संस्थानों की ओर से लगभग ₹51 करोड़ का आंशिक भुगतान किए जाने के बाद कई कनेक्शनों को दोबारा जोड़ा गया था।
हालांकि बड़ी मात्रा में बकाया राशि अभी भी लंबित रहने के कारण बिजली कंपनी ने एक बार फिर सरकारी विभागों को भुगतान के लिए समय दिया है। अब 11 सितंबर की समय-सीमा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब सरकारी कार्यालयों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर
बकाया बिजली बिल की समस्या से निपटने के लिए राज्य में सरकारी कार्यालयों के लिए नई व्यवस्था भी लागू की गई है। जानकारी के अनुसार 1 अगस्त 2026 से ब्लॉक स्तर और उससे ऊपर के सरकारी कार्यालयों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की व्यवस्था शुरू की गई है।
प्रीपेड व्यवस्था में सरकारी कार्यालयों को बिजली इस्तेमाल करने से पहले अपने मीटर में राशि रिचार्ज करनी होगी। जिस तरह मोबाइल फोन में पहले रिचार्ज कराने के बाद सेवाओं का इस्तेमाल किया जाता है, उसी तरह प्रीपेड बिजली व्यवस्था में भी भुगतान पहले और बिजली का उपयोग बाद में होगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य बिजली बिल के लगातार बढ़ते बकाये को रोकना और सरकारी संस्थानों में बिजली के इस्तेमाल को अधिक जवाबदेह बनाना बताया जा रहा है।
बिजली की खपत और भुगतान पर बढ़ेगी निगरानी
प्रीपेड स्मार्ट मीटर व्यवस्था लागू होने के बाद सरकारी कार्यालयों में बिजली की खपत और भुगतान दोनों पर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि किस कार्यालय ने कितनी बिजली खर्च की और उसके लिए कितनी राशि का भुगतान किया गया।
वर्तमान व्यवस्था में कई सरकारी कार्यालयों में बिजली की खपत होती रही, लेकिन समय पर बिल भुगतान नहीं होने से बकाया राशि बढ़ती गई। अब प्रीपेड व्यवस्था के माध्यम से इस प्रक्रिया में बदलाव लाने की कोशिश की जा रही है।
विभागों के सामने चुनौती
सरकारी विभागों के लिए सबसे बड़ी चुनौती पुराने बकाये का भुगतान करना है। हजारों करोड़ रुपये की देनदारी होने के कारण सभी विभागों और स्थानीय निकायों को अपने-अपने स्तर पर भुगतान की व्यवस्था करनी होगी।
यदि समय-सीमा के भीतर भुगतान नहीं होता है तो बिजली कंपनी द्वारा कनेक्शन काटने की कार्रवाई से सरकारी कार्यालयों का नियमित कामकाज प्रभावित हो सकता है। इससे नागरिक सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका है।
आम जनता के लिए भी अहम संदेश
सरकारी कार्यालयों पर कार्रवाई का यह मामला आम बिजली उपभोक्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश देता है। बिजली विभाग की ओर से लंबे समय से यह अपील की जाती रही है कि उपभोक्ता अपने बिजली बिल का भुगतान समय पर करें। अब सरकारी संस्थानों पर भी उसी तरह सख्ती किए जाने से यह संकेत मिलता है कि बकाया भुगतान के मामले में विभाग सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं पर समान रूप से कार्रवाई करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
हालांकि, सरकारी कार्यालयों की बिजली कटौती से पहले आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं, अस्पतालों, जलापूर्ति, कानून-व्यवस्था और अन्य संवेदनशील संस्थानों के संबंध में क्या अलग व्यवस्था होगी, यह संबंधित विभागों और बिजली कंपनी के निर्देशों पर निर्भर करेगा।
11 सितंबर की समय-सीमा पर नजर
फिलहाल सभी की नजर 11 सितंबर 2026 की अंतिम समय-सीमा पर है। यदि इस अवधि तक बकाया राशि जमा नहीं की जाती है तो कई सरकारी कार्यालयों और संस्थानों के बिजली कनेक्शन पर कार्रवाई की संभावना है।
छत्तीसगढ़ में हजारों करोड़ रुपये के सरकारी बिजली बिल बकाये का मुद्दा केवल बिजली विभाग की वसूली से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि यह सरकारी वित्तीय प्रबंधन और सार्वजनिक संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल से भी जुड़ा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकारी विभाग कितना बकाया जमा करते हैं और बिजली कंपनी कितने संस्थानों पर वास्तविक रूप से कनेक्शन काटने की कार्रवाई करती है।
ग्रामीण भारत न्यूज की नजर इस पूरे मामले पर बनी रहेगी। सरकारी विभागों के बकाया भुगतान, कनेक्शन कटौती और प्रीपेड स्मार्ट मीटर व्यवस्था से संबंधित नई जानकारी सामने आने पर पाठकों तक इसकी विस्तृत जानकारी पहुंचाई जाएगी।
— संवाददाता विनोद चौहान
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