कोरबा | संवाददाता विनोद चौहान
कोरबा जिले में SECL और उसकी आउटसोर्सिंग कंपनी TMC प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ लालपुर और भेजीनारा गांव के ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विवादित स्थल पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। खास बात यह रही कि लगातार हो रही बारिश के बावजूद ग्रामीण आंदोलन स्थल पर डटे रहे और उनके साथ गांव के स्कूली बच्चे भी धरने में शामिल हुए।
ग्रामीणों का आरोप है कि SECL और TMC की ओर से पूर्व में किए गए लिखित समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया गया। इसी के विरोध में ग्रामीणों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय प्रशासन के माध्यम से उन्हें नोटिस जारी किए गए, जिससे उनका आक्रोश और बढ़ गया।
1987 में जमीन अधिग्रहण का मामला
ग्रामीणों के अनुसार लालपुर और भेजीनारा गांवों की बड़ी आबादी आदिवासी समुदाय से जुड़ी है। ग्रामीणों का दावा है कि वर्ष 1987 में सिंघाली खदान के लिए उनकी जमीन का अधिग्रहण किया गया था। उस समय रोजगार और अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर किसानों से भू-राजस्व पर्चियां ले ली गई थीं, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी मूल पर्चियां वापस नहीं की गईं।
ग्रामीणों का कहना है कि भू-राजस्व पर्चियां उपलब्ध नहीं होने के कारण कई आदिवासी परिवारों को अपने बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनवाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके कारण बच्चों की उच्च शिक्षा तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी दिक्कत आने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है।
आठ सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन
ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को लेकर आठ सूत्रीय मांगपत्र रखा है। इनमें सिंघाली खदान में 275 ग्रामीणों को दिए गए रोजगार और मुआवजे से संबंधित पूरी लिखित जानकारी सार्वजनिक करने की मांग प्रमुख है। ग्रामीण यह भी चाहते हैं कि लालपुर और भेजीनारा को जोड़ने वाले पुराने मुख्य मार्ग को बाधित न किया जाए तथा रास्ते को व्यवस्थित किया जाए।
इसके अलावा गांव के सार्वजनिक निस्तारी तालाब को पाटे जाने के मामले की जांच कराने की मांग भी की गई है। ग्रामीणों ने यह स्पष्ट करने की मांग की है कि तालाब पाटने की अनुशंसा किस स्तर से की गई थी।
पेयजल और रोजगार की भी मांग
लालपुर और भेजीनारा के ग्रामीणों ने दोनों गांवों में स्थायी एवं स्वच्छ पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।
वहीं स्थानीय भू-विस्थापितों को TMC कंपनी में प्राथमिकता के आधार पर वैकल्पिक रोजगार देने की मांग भी आंदोलनकारियों ने रखी है। ग्रामीणों का कहना है कि जिन परिवारों की जमीन परियोजनाओं के लिए प्रभावित हुई है, उनके परिवारों के लिए रोजगार और पुनर्वास से जुड़े अधिकारों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
निजी जमीन पर रास्ता बनाने का आरोप
ग्रामीणों ने खसरा नंबर 217/16क, 16ख और 16ग की निजी जमीन पर कथित रूप से जबरन रास्ता बनाए जाने के मामले में भी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि निजी भूमि से संबंधित मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए।
इसके साथ ही ग्रामीणों ने अपने पूर्वजों के मुक्तिधाम को कथित रूप से ध्वस्त किए जाने के मामले में संबंधित कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग भी उठाई है।
भू-राजस्व पर्चियां वापस करने की मांग
ग्रामीणों की आठ सूत्रीय मांगों में वर्ष 1987 से रोकी गई मूल भू-राजस्व पर्चियों को वापस करने और राजस्व रिकॉर्ड को दुरुस्त कराने की मांग सबसे महत्वपूर्ण बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन से जुड़े मूल दस्तावेज उनके परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और इन्हें वापस किया जाना चाहिए।
विधायक और प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील
आंदोलन कर रहे ग्रामीणों ने कटघोरा विधायक तथा प्रशासनिक अधिकारियों से मौके पर पहुंचकर पूरी स्थिति का जायजा लेने और उनकी मांगों पर न्यायसंगत निर्णय लेने की अपील की है।
ग्रामीणों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक उनका अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रहेगा। भारी बारिश के बीच ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की मौजूदगी ने आंदोलन को लेकर प्रशासन और संबंधित कंपनियों के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की आठ सूत्रीय मांगों पर क्या कदम उठाता है और SECL तथा TMC की ओर से इस पूरे मामले में क्या जवाब सामने आता है।
ग्रामीण भारत न्यूज के लिए — संवाददाता विनोद चौहान





















