जयपुर। संवाददाता विनोद चौहान। राजस्थान की राजधानी जयपुर में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाली तस्वीर सामने आई है। मुख्यमंत्री आवास, शिक्षा मंत्री के कार्यालय, विधानसभा और सचिवालय से महज करीब 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जवाहर नगर क्षेत्र के टीला नंबर-6 की बस्ती में संचालित एक प्राथमिक सरकारी स्कूल बेहद जर्जर और बदहाल स्थिति में संचालित होने की बात सामने आई है। यहां पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों की पढ़ाई एक जर्जर कमरे में संचालित होने की स्थिति बताई गई है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब राजस्थान सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों में मीडिया और बाहरी लोगों की एंट्री, फोटोग्राफी तथा वीडियोग्राफी को लेकर रोक संबंधी आदेश को लेकर भी चर्चा चल रही है। ऐसे में राजधानी के बीचों-बीच स्थित एक सरकारी स्कूल की कथित बदहाली ने शिक्षा व्यवस्था, बच्चों की सुरक्षा और सरकारी स्कूलों में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
खंडहरनुमा कमरों में पढ़ाई का संकट
प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार स्कूल में पहले से मौजूद दो पुराने कमरे बेहद खराब हालत में पहुंच चुके हैं। इन कमरों की छत, जमीन और दीवारों की स्थिति ऐसी बताई गई है कि वहां नियमित रूप से बच्चों को बैठाना जोखिम भरा हो सकता है। इसके चलते स्कूल की पढ़ाई वर्तमान में पहली मंजिल पर स्थित एक कमरे में संचालित होने की बात सामने आई है।
सबसे गंभीर स्थिति यह है कि कक्षा पहली से लेकर पांचवीं तक के बच्चों को एक ही कमरे में पढ़ाई करनी पड़ रही है। अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त कमरे उपलब्ध नहीं होने से शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के सामने कठिनाइयां पैदा होना स्वाभाविक है।
स्कूल के कमरे की दीवारों में गहरी दरारें दिखाई देने, प्लास्टर उखड़ने तथा लंबे समय से रंग-रोगन नहीं होने की बात रिपोर्ट में कही गई है। यदि भवन वास्तव में इस स्तर तक जर्जर है तो यह केवल शिक्षा के माहौल का सवाल नहीं, बल्कि छोटे बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय भी बन जाता है।
बारिश होते ही रास्ता बन जाता है तालाब
जयपुर जैसे महानगर में स्थित स्कूल में विद्यार्थियों को बारिश के दौरान जिस परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वह भी व्यवस्था पर सवाल उठाती है। रिपोर्ट के मुताबिक स्कूल की पहली मंजिल तक पहुंचने वाला रास्ता थोड़ी बारिश में ही पानी से भर जाता है। कई बार यहां घुटनों तक पानी भरने की स्थिति बन जाती है।
ऐसी परिस्थिति में छोटे बच्चों का स्कूल तक पहुंचना और वापस घर लौटना मुश्किल हो जाता है। बारिश के दौरान जलभराव के कारण स्कूल में पढ़ाई प्रभावित होने और अघोषित छुट्टी जैसी स्थिति बनने की बात भी सामने आई है।
छात्राओं के स्कूल में शौचालय तक नहीं
स्कूल की सबसे बुनियादी जरूरतों में शामिल शौचालय की सुविधा को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए हैं। रिपोर्ट में स्कूल परिसर में शौचालय नहीं होने की बात कही गई है।
यदि छात्राओं के लिए संचालित स्कूल में पर्याप्त और सुरक्षित शौचालय उपलब्ध नहीं है तो यह बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वच्छता और गरिमा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। खासकर प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय की सुविधा किसी भी स्कूल की अनिवार्य आवश्यकता मानी जाती है।
मिड-डे मील की रसोई पर भी सवाल
स्कूल में बच्चों को मिलने वाले मध्याह्न भोजन की व्यवस्था भी कथित तौर पर संतोषजनक नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक मिड-डे मील का किचन लंबे समय से बंद पड़ा हुआ दिखाई देता है।
मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य बच्चों को स्कूल में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति और निरंतरता बढ़ाना भी है। ऐसे में रसोई के बंद रहने की स्थिति पर संबंधित विभाग को जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
स्कूल के आसपास गंदगी और नाले का पानी
स्कूल भवन के आसपास की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली बताई गई है। पहाड़ी के नीचे स्थित स्कूल के आसपास कूड़े-कचरे का ढेर और गंदगी होने की बात सामने आई है। स्कूल के बाहर नाले का गंदा पानी जमा रहने से विद्यार्थियों को उसी रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है।
छोटे बच्चों के लिए गंदे पानी और कचरे से होकर स्कूल पहुंचना न केवल असुविधाजनक है, बल्कि स्वच्छता और संक्रमण के लिहाज से भी चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों के हवाले से यह भी बताया गया है कि गंदगी और दुर्गंध के कारण बच्चे अक्सर बीमार पड़ते हैं तथा अभिभावकों में बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर चिंता रहती है।
राजधानी में यह हाल तो ग्रामीण स्कूलों का क्या होगा?
जयपुर राजस्थान की राजधानी है और राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था का प्रमुख केंद्र भी है। मुख्यमंत्री आवास, सचिवालय, विधानसभा और शिक्षा विभाग के प्रमुख कार्यालयों से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर यदि किसी सरकारी स्कूल में भवन, शौचालय, जल निकासी, स्वच्छता और कक्षाओं जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव सामने आता है, तो यह पूरे सरकारी स्कूल तंत्र के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है।
राजधानी के शहरी क्षेत्र में यदि किसी प्राथमिक स्कूल के बच्चे जर्जर भवन, जलभराव, गंदगी और अपर्याप्त कक्षाओं जैसी समस्याओं के बीच पढ़ने को मजबूर हैं, तो राज्य के दूरस्थ ग्रामीण, आदिवासी और पहाड़ी इलाकों में संचालित स्कूलों की वास्तविक स्थिति की समीक्षा की जरूरत और भी बढ़ जाती है।
मीडिया पर रोक के बीच उठे पारदर्शिता के सवाल
राजस्थान में सरकारी स्कूलों में मीडिया और बाहरी लोगों की प्रवेश, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी को लेकर जारी आदेश के बीच इस स्कूल की स्थिति चर्चा का विषय बन गई है।
सरकारी स्कूल सार्वजनिक व्यवस्था का हिस्सा हैं और वहां पढ़ने वाले बच्चे समाज के भविष्य हैं। स्कूलों की व्यवस्था में कमियां हैं तो उनका समाधान होना चाहिए। मीडिया की भूमिका भी इन्हीं समस्याओं को सामने लाकर प्रशासन और सरकार का ध्यान आकर्षित करने की होती है।
हालांकि किसी भी सरकारी आदेश की वास्तविक मंशा और कानूनी स्थिति का अंतिम आकलन संबंधित सरकारी दस्तावेजों और आधिकारिक स्पष्टीकरण के आधार पर ही किया जाना चाहिए। लेकिन स्कूल की बदहाल तस्वीरें और जमीनी स्थिति सामने आने के बाद पारदर्शिता तथा जवाबदेही को लेकर बहस जरूर तेज हो सकती है।
बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता हो
प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे बेहद कम उम्र के होते हैं। ऐसे में जर्जर भवन, दीवारों में दरारें, जलभराव, गंदा पानी और शौचालय जैसी सुविधाओं का अभाव किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यदि भवन वास्तव में असुरक्षित है तो संबंधित विभाग को तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराना चाहिए। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए आवश्यकता पड़ने पर वैकल्पिक कक्षों की व्यवस्था की जानी चाहिए। साथ ही जल निकासी, साफ-सफाई, शौचालय और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं को तत्काल दुरुस्त किया जाना चाहिए।
प्रशासन से जवाब और कार्रवाई की उम्मीद
जयपुर के इस सरकारी स्कूल की स्थिति को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिम्मेदार विभाग को इसकी जानकारी है या नहीं और यदि जानकारी है तो अब तक सुधारात्मक कदम क्यों नहीं उठाए गए।
राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को चाहिए कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर स्कूल भवन की तकनीकी स्थिति सार्वजनिक करे। यदि भवन जर्जर पाया जाता है तो उसकी मरम्मत या पुनर्निर्माण की समयबद्ध योजना बनाई जाए। बच्चों के लिए पर्याप्त कक्षाएं, सुरक्षित रास्ता, शौचालय, स्वच्छ पेयजल, मिड-डे मील की नियमित व्यवस्था और स्कूल परिसर की साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए।
सरकारी स्कूल केवल एक भवन नहीं होता, बल्कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के भविष्य का आधार होता है। इसलिए राजधानी के बीचों-बीच स्थित इस स्कूल की बदहाली को केवल स्थानीय समस्या मानकर छोड़ना उचित नहीं होगा।
ग्रामीण भारत न्यूज का सवाल: जब राजधानी जयपुर में मुख्यमंत्री आवास से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर प्राथमिक स्कूल के बच्चे कथित तौर पर जर्जर कमरे और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पढ़ने को मजबूर हैं, तो प्रदेश के दूरदराज इलाकों के सरकारी स्कूलों की नियमित निगरानी और स्थिति की समीक्षा कितनी गंभीरता से की जा रही है?
ग्रामीण भारत न्यूज | संवाददाता — विनोद चौहान





















