रायगढ़/धरमजयगढ़। संवाददाता विनोद चौहान।
रायगढ़ जिले के छाल क्षेत्र की खुली कोयला खदान में ठेका कंपनी के खिलाफ मजदूरों द्वारा की गई गंभीर शिकायतों को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। श्रमिकों की ओर से 9 सूत्रीय शिकायत सामने आने के बाद कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी मयंक चतुर्वेदी ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय संयुक्त जांच दल का गठन किया है। प्रशासन ने जांच दल को तत्काल मौके पर पहुंचकर तथ्यों की जांच करने और संबंधित दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं। जांच दल को अपनी रिपोर्ट स्पष्ट निष्कर्ष और आवश्यक अनुशंसाओं के साथ सात दिनों के भीतर कलेक्टर कार्यालय में प्रस्तुत करनी होगी।
मामला एसईसीएल के छाल क्षेत्र की खुली खदान के सिम-3 विस्तार में काम कर रहे श्रमिकों से जुड़ा बताया जा रहा है। मजदूरों ने ठेका कंपनी सुनील कुमार अग्रवाल (एसकेए) के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन से शिकायत की थी। शिकायत में श्रमिकों ने काम के घंटे, वेतन, साप्ताहिक अवकाश, हाई पावर कमेटी (HPC) दर, वेतन से कथित कटौती, पे-स्लिप, सुरक्षा उपकरण, बोनस तथा श्रमिकों को नौकरी से हटाने की कथित धमकी जैसे मुद्दे उठाए हैं।
8 घंटे के बजाय 12 घंटे काम कराने का आरोप
श्रमिकों की शिकायत के अनुसार उनसे निर्धारित कार्य अवधि से अधिक समय तक काम कराया जा रहा है। मजदूरों ने आरोप लगाया है कि जहां सामान्य रूप से आठ घंटे की ड्यूटी होनी चाहिए, वहां उनसे करीब 12 घंटे तक काम लिया जा रहा है। इसके अलावा महीने में लगातार 30 से 31 दिनों तक काम कराने और साप्ताहिक अवकाश नहीं देने की बात भी शिकायत में कही गई है।
यदि शिकायतों की जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो इससे श्रमिकों के कार्य समय और वैधानिक सुविधाओं से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल सामने आ सकते हैं। इसी वजह से प्रशासन ने जांच का दायरा केवल शिकायत के कागजी परीक्षण तक सीमित न रखते हुए मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का सत्यापन करने का निर्णय लिया है।
HPC दर का लाभ नहीं मिलने की शिकायत
श्रमिकों ने वेतन भुगतान को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि एसईसीएल की ओर से बजट उपलब्ध कराए जाने के बावजूद उन्हें निर्धारित हाई पावर कमेटी यानी HPC दर के अनुरूप भुगतान का लाभ नहीं मिल रहा है।
मजदूरों ने प्रशासन से यह भी शिकायत की है कि घर से आने-जाने वाले कर्मचारियों के वेतन से कमरे और भोजन के नाम पर कथित रूप से छह हजार रुपये तक की राशि काटी जा रही है। इस कथित कटौती की वास्तविकता क्या है, कितनी राशि किन परिस्थितियों में काटी गई और उसका कोई अधिकृत रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी।
पे-स्लिप, सुरक्षा किट और बोनस को लेकर भी सवाल
शिकायत में श्रमिकों ने पे-स्लिप उपलब्ध नहीं कराने, सुरक्षा किट नहीं मिलने तथा बोनस जैसी सुविधाओं से वंचित रखने के आरोप लगाए हैं। श्रमिकों का कहना है कि वेतन भुगतान की प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है।
खनन क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में जांच दल द्वारा यह भी देखा जाएगा कि कार्यस्थल पर कर्मचारियों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं या नहीं और सुरक्षा मानकों का पालन किस स्तर तक किया जा रहा है।
आवाज उठाने वाले मजदूरों को नौकरी से हटाने की कथित धमकी
श्रमिकों ने अपनी शिकायत में यह आरोप भी लगाया है कि अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर आवाज उठाने वाले कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। प्रशासन द्वारा शिकायतकर्ताओं और कंपनी प्रबंधन के बयान दर्ज किए जाने के दौरान इस आरोप की भी वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।
जांच के दौरान यह महत्वपूर्ण होगा कि शिकायत करने वाले श्रमिक बिना किसी दबाव के अपनी बात जांच दल के सामने रख सकें। इसके लिए मौके पर श्रमिकों के बयान और संबंधित रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा।
पांच सदस्यीय संयुक्त जांच दल करेगा जांच
कलेक्टर के आदेश के अनुसार मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय संयुक्त जांच दल गठित किया गया है। टीम की अध्यक्षता डिप्टी कलेक्टर शिल्पा भगत करेंगी।
जांच दल में सहायक श्रम आयुक्त घनश्याम पाणिग्राही, उप संचालक औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा राहुल पटेल, खनिज अधिकारी रमाकांत सोनी तथा संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार को सदस्य बनाया गया है।
इस बहु-विभागीय जांच टीम के गठन का उद्देश्य श्रमिकों से संबंधित शिकायतों के साथ-साथ श्रम कानून, औद्योगिक सुरक्षा, खनन गतिविधियों और भुगतान संबंधी पहलुओं की अलग-अलग स्तर पर जांच करना है।
मस्टर रोल और वेतन रिकॉर्ड की होगी जांच
जांच दल को कंपनी के मस्टर रोल, वेतन भुगतान पंजी तथा HPC दर के क्रियान्वयन से संबंधित दस्तावेजों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। दस्तावेजों के रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति का मिलान किया जाएगा।
इसके अलावा शिकायतकर्ता श्रमिकों तथा ठेका कंपनी के प्रबंधन के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि मजदूरों द्वारा लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या है और कंपनी की ओर से इन आरोपों के संबंध में क्या जवाब दिया जाता है।
सिर्फ छाल खदान तक सीमित नहीं रहेगी जांच
जिला प्रशासन ने मामले को व्यापक रूप देते हुए जांच का दायरा जिले की अन्य खदानों तक भी बढ़ाया है। आदेश के अनुसार जांच दल एसईसीएल छाल क्षेत्र के साथ रायगढ़ जिले में संचालित अन्य खदानों में भी ठेका कंपनियों के कार्यों का निरीक्षण करेगा।
इस दौरान यह देखा जाएगा कि विभिन्न खदानों में कार्यरत ठेका कंपनियां श्रम कानूनों, न्यूनतम मजदूरी, औद्योगिक सुरक्षा मानकों और श्रमिकों को मिलने वाली वैधानिक सुविधाओं का पालन कर रही हैं या नहीं।
प्रशासन द्वारा अन्य खदानों में औचक निरीक्षण किए जाने की संभावना से ठेका कंपनियों में भी हलचल बढ़ सकती है। विशेष रूप से श्रमिकों के वेतन, कार्य अवधि, सुरक्षा व्यवस्था और कथित वेतन कटौती से संबंधित रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
5 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो काम बंद करने की चेतावनी
श्रमिकों ने प्रशासन को यह चेतावनी भी दी है कि यदि पांच दिनों के भीतर उनकी शिकायतों पर निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई नहीं की गई तो छाल उपक्षेत्र में काम बंद करने का निर्णय लिया जा सकता है।
मजदूरों की इस चेतावनी को देखते हुए प्रशासन के सामने एक ओर श्रमिकों के वैधानिक अधिकारों से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच करने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर खनन क्षेत्र में औद्योगिक शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है।
सात दिनों में रिपोर्ट सौंपने का आदेश
कलेक्टर द्वारा 11 अगस्त 2026 को जारी आदेश के अनुसार संयुक्त जांच दल को छाल क्षेत्र की संबंधित खदान सहित जिले की अन्य खदानों में स्थिति का परीक्षण कर सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। रिपोर्ट में जांच के निष्कर्षों के साथ आवश्यक कार्रवाई के संबंध में स्पष्ट अनुशंसा भी किए जाने के निर्देश हैं।
अब सभी की नजरें जांच दल की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि जांच के दौरान श्रमिकों द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित ठेका कंपनी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की स्थिति बन सकती है। वहीं यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो प्रशासन की जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी।
श्रमिकों के अधिकार और खनन सुरक्षा पर निगाह
छाल क्षेत्र में बड़ी संख्या में श्रमिक खनन गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में श्रमिकों को निर्धारित कार्य अवधि, उचित मजदूरी, साप्ताहिक अवकाश, सुरक्षा उपकरण और अन्य वैधानिक सुविधाएं मिलना महत्वपूर्ण है।
प्रशासन द्वारा गठित संयुक्त जांच दल की कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि जांच में केवल एक शिकायत का निपटारा ही नहीं, बल्कि जिले की अन्य खदानों में ठेका कंपनियों द्वारा अपनाई जा रही व्यवस्थाओं की भी पड़ताल की जानी है।
अब जांच दल के मौके पर पहुंचने, श्रमिकों और कंपनी प्रबंधन के बयान दर्ज करने तथा दस्तावेजों के सत्यापन के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि शिकायतों में कितनी सच्चाई है और आगे प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।
ग्रामीण भारत न्यूज के लिए — संवाददाता विनोद चौहान।





















