रायपुर। संवाददाता अतुल अग्निहोत्री
छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों में वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों के सामने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करने की नई चुनौती खड़ी हो गई है। रायपुर जिले में ही 1,300 से अधिक शिक्षक इस व्यवस्था से प्रभावित बताए जा रहे हैं। शिक्षक संगठनों ने इसे लेकर विरोध का बिगुल फूंक दिया है और अपने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने की तैयारी शुरू कर दी है।
शिक्षकों का कहना है कि जब उनकी नियुक्ति हुई थी, उस समय उनके लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य नहीं था। कई शिक्षक पिछले दो से ढाई दशक से सरकारी स्कूलों में नियमित रूप से बच्चों को पढ़ा रहे हैं। ऐसे में सेवा के अंतिम वर्षों में उनके लिए TET उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता लागू होने से उनके सामने नई चिंता पैदा हो गई है।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद बढ़ी चुनौती
मामला विशेष रूप से उन प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों से जुड़ा है, जिनकी नियुक्ति वर्ष 2001 से 2011 के बीच हुई थी। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद ऐसे शिक्षकों को निर्धारित अवधि में शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने की शर्त का सामना करना पड़ रहा है। इसके लिए 21 अगस्त 2028 तक की समय-सीमा बताई गई है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि लंबे समय से सरकारी स्कूलों में सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए यह स्थिति काफी कठिन है। उनका तर्क है कि जिन शिक्षकों ने वर्षों तक कक्षा में बच्चों को पढ़ाया, परीक्षा परिणाम दिए और विभागीय जिम्मेदारियां निभाईं, उन्हें अब सेवा के अंतिम चरण में TET की नई बाध्यता से गुजरना पड़ रहा है।
विशेष चिंता पदोन्नति को लेकर है। शिक्षकों का कहना है कि यदि पदोन्नति के लिए भी TET को अनिवार्य बनाया गया तो लंबे समय से सेवा दे रहे अनेक शिक्षक वरिष्ठता के बावजूद पदोन्नति के अवसर से वंचित हो सकते हैं।
‘छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा’ का गठन
TET की अनिवार्यता, पदोन्नति, पेंशन, वेतन विसंगति तथा नए भर्ती-पदोन्नति नियमों जैसे मुद्दों को लेकर विभिन्न शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा का गठन किया है।
शिक्षक नेताओं संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे और केदार जैन ने वर्चुअल बैठक के माध्यम से मोर्चे के गठन की घोषणा की। मोर्चे की ओर से शिक्षकों के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर चरणबद्ध तरीके से आंदोलन चलाने की तैयारी की जा रही है।
मोर्चे की ओर से 16 अगस्त को सभी जिलों में विचार एवं समन्वय बैठकें आयोजित की गईं। इसके बाद 18 अगस्त को शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव तथा लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया गया है।
वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति की मांग
शिक्षकों की प्रमुख मांगों में वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति शामिल है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय की ओर से 2028 तक दी गई समय-सीमा को ध्यान में रखते हुए लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को उनकी वरिष्ठता के आधार पर रिक्त पदों पर पदोन्नति का अवसर दिया जाना चाहिए।
शिक्षक संगठनों का तर्क है कि पदोन्नति की प्रक्रिया में TET की शर्त को लागू करने से उन शिक्षकों के साथ अन्याय होगा, जिन्होंने नियुक्ति के समय ऐसी किसी अनिवार्यता का सामना नहीं किया था।
उनका कहना है कि वर्षों की सेवा, अनुभव और वरिष्ठता को भी पदोन्नति का महत्वपूर्ण आधार माना जाना चाहिए।
पेंशन और वेतन विसंगति का मुद्दा भी उठेगा
शिक्षकों का आंदोलन केवल TET तक सीमित नहीं रहने वाला है। मोर्चे की ओर से पेंशन और वेतन विसंगति से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।
शिक्षकों की मांग है कि उनकी पूर्व सेवा अवधि की गणना करते हुए उन्हें पूर्ण पेंशन का लाभ दिया जाए। इसके साथ ही केंद्रीय वेतनमान के आधार पर छत्तीसगढ़ के शिक्षकों का वेतन निर्धारण करने और वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग भी रखी जाएगी।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि वेतन संबंधी विसंगतियों का सीधा प्रभाव कर्मचारियों के वर्तमान वेतन के साथ-साथ भविष्य के आर्थिक लाभों पर भी पड़ता है। इसलिए इस मामले में सरकार को स्पष्ट और प्रभावी निर्णय लेना चाहिए।
13 फरवरी 2026 के नए भर्ती-पदोन्नति नियमों का विरोध
शिक्षक संघर्ष मोर्चा 13 फरवरी 2026 को जारी नए भर्ती एवं पदोन्नति नियमों को निरस्त करने की मांग भी सरकार के सामने रखेगा।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि नए नियमों के कारण पदोन्नति प्रक्रिया और शिक्षकों के कैरियर से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न पैदा हुए हैं। उनका आग्रह है कि सरकार शिक्षक संगठनों के साथ चर्चा कर नियमों की समीक्षा करे और ऐसी व्यवस्था बनाए जिसमें लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के हित सुरक्षित रहें।
B.Ed. के लिए विभागीय ब्रिज कोर्स की मांग
प्रशिक्षित सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याताओं के लिए B.Ed. से संबंधित विभागीय ब्रिज कोर्स कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की जाएगी।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि अलग-अलग समय पर नियुक्त हुए शिक्षकों की शैक्षणिक और प्रशिक्षण संबंधी परिस्थितियां अलग रही हैं। ऐसे में वर्तमान नियमों को लागू करते समय सेवा में कार्यरत शिक्षकों को उचित अवसर और प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराना आवश्यक है।
उनका मानना है कि विभागीय स्तर पर ब्रिज कोर्स जैसी व्यवस्था से शिक्षकों को आवश्यक योग्यता पूरी करने में मदद मिल सकती है और लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के हितों की भी रक्षा की जा सकती है।
शिक्षकों की प्रमुख मांगें
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा की ओर से जिन प्रमुख मांगों को उठाया जा रहा है, उनमें शामिल हैं—
पहली मांग: वरिष्ठता के आधार पर TET की शर्त के बिना व्याख्याता, शिक्षक, प्रधान पाठक पूर्व माध्यमिक शाला और प्रधान पाठक प्राथमिक शाला के रिक्त पदों पर पदोन्नति का अवसर दिया जाए।
दूसरी मांग: पूर्व सेवा अवधि की गणना करते हुए शिक्षकों को पूर्ण पेंशन का लाभ दिया जाए।
तीसरी मांग: केंद्रीय वेतनमान के आधार पर छत्तीसगढ़ के शिक्षकों का वेतन निर्धारण किया जाए और वेतन विसंगतियां दूर की जाएं।
चौथी मांग: 13 फरवरी 2026 को जारी नए भर्ती एवं पदोन्नति नियम को निरस्त किया जाए।
पांचवीं मांग: प्रशिक्षित सहायक शिक्षक, शिक्षक एवं व्याख्याताओं के लिए B.Ed. हेतु विभागीय ब्रिज कोर्स कराया जाए।
वर्षों की सेवा के बाद परीक्षा की चिंता
शिक्षक संगठनों का कहना है कि वर्तमान परिस्थिति में सबसे बड़ी चिंता उन शिक्षकों की है जिन्होंने अपनी नौकरी के दौरान लंबे समय तक शिक्षा व्यवस्था में योगदान दिया है। कई शिक्षक सेवा के अंतिम वर्षों में हैं और उनके लिए अब परीक्षा की तैयारी करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
शिक्षकों का कहना है कि वे शिक्षा की गुणवत्ता और आवश्यक योग्यता के महत्व को समझते हैं, लेकिन नियमों को लागू करते समय नियुक्ति की परिस्थितियों, सेवा अवधि, वरिष्ठता और अनुभव को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
उनका कहना है कि सरकार यदि शिक्षकों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करती है तो विवाद का समाधान संवाद के माध्यम से निकाला जा सकता है।
18 अगस्त को सौंपा जाएगा ज्ञापन
शिक्षक संगठनों ने अपने आंदोलन के अगले चरण के तहत 18 अगस्त को शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव और लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है।
अब देखना होगा कि शिक्षक संगठनों की मांगों पर राज्य सरकार और शिक्षा विभाग का रुख क्या रहता है। फिलहाल TET की अनिवार्यता, पदोन्नति और नए भर्ती-पदोन्नति नियमों को लेकर छत्तीसगढ़ के सरकारी शिक्षकों के बीच असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है।
शिक्षक संगठन अपनी मांगों को लेकर सरकार के समक्ष पक्ष रखने की तैयारी में हैं। वहीं शिक्षकों की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार उनके लंबे सेवा अनुभव, वरिष्ठता, पदोन्नति और पेंशन से जुड़े मुद्दों पर क्या निर्णय लेती है।
ग्रामीण भारत न्यूज के लिए — संवाददाता अतुल अग्निहोत्री, रायपुर।





















