ग्रामीण भारत न्यूज संवाददाता: अतुल अग्निहोत्री स्थान: सूरजपुर, छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोलने वाली खबर सामने आई है। यहां विकास और बुनियादी ढांचे के नाम पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये सचमुच पानी में बह गए। जिले के प्रतापपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम धोंधा में नदी पर बना करोड़ों का पुल पहली ही भारी बारिश का कहर झेल नहीं पाया और ताश के पत्तों की तरह ढह गया।
रात के अंधेरे में बह गए विकास के दावे
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार को पूरे राज्य में मूसलाधार बारिश का दौर जारी था। सूरजपुर और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी झमाझम बारिश हो रही थी। रात भर मौसम का मिजाज बिगड़ा रहा। शुक्रवार की सुबह जब गांव के लोग अपनी दिनचर्या के लिए घरों से बाहर निकले, तो नदी की ओर का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। लगभग 10 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया वह विशाल पुल नदी की तेज धार में पूरी तरह से बह चुका था। मौके पर अब केवल पुल के टूटे हुए अवशेष और बर्बादी का मंजर ही बचा है।
निर्माण के समय से ही उठ रहे थे गुणवत्ता पर सवाल
‘ग्रामीण भारत न्यूज’ की पड़ताल और स्थानीय लोगों से बातचीत में यह बात सामने आई है कि यह हादसा केवल प्राकृतिक आपदा का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे भ्रष्टाचार की नींव रखी गई थी। ग्रामीणों का सीधा और गंभीर आरोप है कि पुल के निर्माण में व्यापक स्तर पर धांधली और अनियमितताएं बरती गई हैं।
निर्माण कार्य की शुरुआत से ही इसकी गुणवत्ता को लेकर गांव वालों ने कई बार सवाल खड़े किए थे। लोगों का कहना है कि ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से निर्माण में दोयम दर्जे की घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। आलम यह था कि बनने के कुछ ही समय बाद पुल के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी-बड़ी दरारें साफ दिखाई देने लगी थीं, जो भविष्य में होने वाले किसी बड़े हादसे का स्पष्ट संकेत दे रही थीं।
ग्रामीणों की टूटी जीवन रेखा, जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त
ग्राम धोंधा और आसपास के कई अन्य गांवों के लिए यह पुल केवल सीमेंट और लोहे का ढांचा नहीं था, बल्कि यह उनकी ‘जीवन रेखा’ था। इस पुल के माध्यम से ही किसान अपनी उपज मंडियों तक ले जाते थे, बच्चे स्कूल जाते थे और बीमार लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जाता था। अब पुल के जमींदोज हो जाने से इन गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से पूरी तरह कट गया है। ग्रामीणों के सामने अब आवाजाही का एक भयानक संकट खड़ा हो गया है। आपातकालीन स्थिति में अब लोगों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ सकती है।
ग्रामीणों में भारी आक्रोश, उच्च स्तरीय जांच की मांग
इस घटना के बाद से पूरे इलाके में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने इस पूरी घटना को सरकारी खजाने की खुली लूट करार दिया है। ग्रामीण भारत न्यूज के माध्यम से स्थानीय लोगों ने सरकार से निम्नलिखित मांगें की हैं:
- निष्पक्ष जांच: पुल निर्माण के टेंडर से लेकर निर्माण पूरा होने तक की पूरी प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच कमेटी द्वारा निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- सख्त कार्रवाई: इस भ्रष्ट्राचार में शामिल ठेकेदार और आंखें मूंद कर बैठे लोक निर्माण विभाग (PWD) के दोषी अधिकारियों पर तत्काल प्रभाव से एफआईआर (FIR) दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए।
- वैकल्पिक व्यवस्था: ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए तुरंत कोई सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग तैयार किया जाए ताकि रोजमर्रा का जीवन पटरी पर लौट सके।
अब देखना यह होगा कि क्या छत्तीसगढ़ की सरकार और स्थानीय जिला प्रशासन 10 करोड़ रुपये की इस बर्बादी पर कोई सख्त कदम उठाता है, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह जांच की फाइलों में दबकर रह जाएगा। ग्रामीण भारत न्यूज इस जमीनी मुद्दे पर अपनी नजर बनाए रखेगा और जब तक ग्रामीणों को न्याय नहीं मिल जाता, हम यह आवाज उठाते रहेंगे।





















