धर्मजयगढ़। रायगढ़ जिले के धर्मजयगढ़ क्षेत्र में नीचेपरा स्थित नदी पुल पर सड़क के बीचों-बीच बना बड़ा गड्ढा राहगीरों और वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा बन गया है। पुल से प्रतिदिन बड़ी संख्या में दोपहिया, चारपहिया सहित अन्य वाहन गुजरते हैं। ऐसे में पुल के बीच बने इस गड्ढे के कारण कभी भी गंभीर सड़क हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से तत्काल मरम्मत की मांग की है।
बताया जा रहा है कि नीचेपरा नदी पुल क्षेत्र के आवागमन का महत्वपूर्ण मार्ग है। इस रास्ते से स्थानीय ग्रामीणों के अलावा आसपास के गांवों के लोग भी नियमित रूप से आवागमन करते हैं। पुल पर सड़क के बीच बने गड्ढे की स्थिति ऐसी है कि वाहन चालकों को इससे बचने के लिए अचानक वाहन मोड़ना पड़ता है। इस दौरान सामने से आने वाले वाहनों से टक्कर की आशंका भी बनी रहती है।
बारिश में बढ़ जाता है खतरा
वर्तमान में बारिश का मौसम होने के कारण पुल पर बने गड्ढे की समस्या और भी गंभीर हो गई है। बारिश का पानी गड्ढे में भर जाने के बाद इसकी वास्तविक गहराई का अंदाजा वाहन चालकों को नहीं हो पाता।
कई बार चालक सामान्य सड़क समझकर वाहन आगे बढ़ा देते हैं और अचानक गड्ढे में पहिया चले जाने से वाहन का संतुलन बिगड़ सकता है।
खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति बेहद जोखिमपूर्ण है। यदि कोई बाइक या स्कूटी चालक तेज गति से इस गड्ढे के पास पहुंचता है और उसे समय रहते गड्ढा दिखाई नहीं देता, तो वाहन अनियंत्रित होकर गिर सकता है। इससे चालक और पीछे बैठे व्यक्ति को गंभीर चोट लगने की आशंका बनी हुई है।
रात में स्थिति और खतरनाक
दिन के समय तो किसी तरह वाहन चालक गड्ढे को देखकर अपने वाहन को किनारे से निकाल लेते हैं, लेकिन रात के समय खतरा कई गुना बढ़ जाता है। पुल पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने की स्थिति में गड्ढा दूर से दिखाई नहीं देता। सामने से आने वाले वाहन की हेडलाइट के कारण भी चालक को सड़क की वास्तविक स्थिति समझने में परेशानी हो सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस गड्ढे की मरम्मत नहीं की गई तो किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदार विभाग की नींद खुलेगी। लोगों ने सवाल उठाया है कि आखिर किसी दुर्घटना का इंतजार क्यों किया जा रहा है?
पुल जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर लापरवाही क्यों?
नदी पर बना पुल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। पुल पर सड़क की खराब स्थिति केवल सामान्य असुविधा का विषय नहीं है, बल्कि यह सीधे लोगों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। पुल के बीचों-बीच गड्ढा होने से वाहन चालकों को अपनी लेन छोड़कर दूसरी ओर जाने की मजबूरी पैदा होती है।
यदि इसी दौरान सामने से कोई वाहन आ जाए तो टक्कर की स्थिति बन सकती है। भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान यह खतरा और अधिक बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क और पुल की नियमित जांच तथा आवश्यकतानुसार मरम्मत की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि छोटी समस्या आगे चलकर बड़े हादसे का कारण न बने।
ग्रामीणों ने तत्काल मरम्मत की मांग की
स्थानीय नागरिकों ने संबंधित विभाग, प्रशासन और सड़क की देखरेख करने वाली एजेंसी से मांग की है कि नीचेपरा नदी पुल पर बने गड्ढे का तत्काल निरीक्षण कराया जाए। इसके बाद स्थायी रूप से सड़क की मरम्मत कराकर आवागमन को सुरक्षित बनाया जाए।
लोगों का कहना है कि जब तक स्थायी मरम्मत नहीं होती, तब तक कम से कम गड्ढे के आसपास चेतावनी संकेतक, बैरिकेड या अन्य सुरक्षा व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि रात के समय वाहन चालकों को खतरे का पता चल सके।
हादसे के बाद कार्रवाई का इंतजार क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि किसी संभावित हादसे से पहले इस समस्या का समाधान क्यों नहीं किया जा रहा है। सड़क पर मौजूद गड्ढा दिखाई दे रहा है और प्रतिदिन लोगों की आवाजाही भी हो रही है, इसके बावजूद यदि समय रहते मरम्मत नहीं होती तो किसी दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी होगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को ऐसी समस्याओं पर संज्ञान लेने के लिए दुर्घटना का इंतजार नहीं करना चाहिए। सड़क और पुल की सुरक्षा से जुड़े मामलों में पहले से कार्रवाई करना ही बेहतर व्यवस्था मानी जाती है।
लापरवाही भारी पड़ सकती है
नीचेपरा नदी पुल पर बना गड्ढा फिलहाल एक छोटी सड़क समस्या दिखाई दे सकता है, लेकिन बारिश, रात का समय और लगातार वाहनों की आवाजाही इसे गंभीर खतरे में बदल रहे हैं। यदि किसी तेज रफ्तार वाहन का चालक अचानक गड्ढे की चपेट में आता है तो वाहन का संतुलन बिगड़ सकता है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से अपील की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग को तत्काल निर्देश जारी किए जाएं और पुल की सड़क की मरम्मत कराई जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए पुल और सड़क की नियमित निगरानी भी सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि सड़क की मरम्मत किसी हादसे के बाद नहीं, बल्कि हादसा होने से पहले होनी चाहिए। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस गंभीर समस्या पर कब तक कार्रवाई करता है।
संवाददाता — विनोद चौहान
ग्रामीण भारत न्यूज





















