शासन की नई पहल से जिले के 12 गौठानों का होगा विकास, पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से होगा संचालन
संवाददाता : विनिता चौहान
ग्रामीण भारत न्यूज | रायगढ़
रायगढ़। छत्तीसगढ़ सरकार ने गौवंश संरक्षण एवं संवर्धन को नई दिशा देने के उद्देश्य से प्रदेश में गौधाम योजना को लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी क्रम में रायगढ़ जिले के 12 गौठानों का चयन गौधाम के रूप में किया गया है। शासन का उद्देश्य इन चयनित गौठानों को विकसित कर उन्हें सुव्यवस्थित गौधाम के रूप में स्थापित करना है, ताकि निराश्रित एवं बेसहारा गौवंशों के संरक्षण, उपचार, चारे की व्यवस्था तथा बेहतर देखभाल सुनिश्चित की जा सके।
जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने प्रदेश में कुल 100 गौधाम स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए छत्तीसगढ़ राज्य गौसेवा आयोग में पंजीकृत संस्थाओं को संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी। आयोग की अनुशंसा के आधार पर संस्थाओं को आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे गौसेवा के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं को प्रोत्साहन मिलेगा और गौवंश संरक्षण को मजबूती मिलेगी।
रायगढ़ जिले में जिन स्थानों का चयन किया गया है उनमें कोसमनारा, संबलपुरी, बरपाली, झलमला, लिंजीर, राजपुर, नारायणपुर, बीरसिंघा, गेरूपानी, केन्दाटिकरा, झरन तथा कोड़ासिया शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर आवश्यक अधोसंरचना विकसित कर गौधाम स्थापित किए जाएंगे।
सूत्रों के अनुसार वर्तमान में इन गौठानों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। कई स्थानों पर गौवंश मौजूद नहीं हैं तथा रखरखाव की व्यवस्था भी कमजोर बताई जा रही है। ऐसे में सरकार की नई योजना के माध्यम से इन गौठानों को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जाएगा।
गौधाम योजना के अंतर्गत सबसे पहले इच्छुक संस्थाओं का राज्य गौसेवा आयोग में पंजीयन कराया जाएगा। इसके पश्चात चयनित गौठानों का निरीक्षण एवं आवश्यक व्यवस्थाओं का परीक्षण किया जाएगा। आयोग की स्वीकृति मिलने के बाद शासन द्वारा चरणबद्ध तरीके से आर्थिक सहायता जारी की जाएगी।
गौरतलब है कि पूर्व में संचालित गौठान योजना के दौरान कुछ स्थानों पर अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप भी सामने आए थे। ऐसे मामलों को देखते हुए इस बार शासन निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी कर रहा है, ताकि योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से गौसेवा और ग्रामीण विकास के लिए मिल सके।
स्थानीय नागरिकों एवं पशुपालकों का मानना है कि यदि योजना का संचालन पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ किया गया तो इससे बेसहारा गौवंशों को सुरक्षित आश्रय मिलेगा, किसानों की फसलों को आवारा मवेशियों से होने वाले नुकसान में कमी आएगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि गौधाम केवल पशुओं के संरक्षण का केंद्र नहीं होगा, बल्कि भविष्य में जैविक खेती, गोबर आधारित उत्पाद, वर्मी कम्पोस्ट निर्माण तथा ग्रामीण स्वरोजगार को भी बढ़ावा देने का माध्यम बन सकता है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
रायगढ़ जिले में गौधाम योजना के क्रियान्वयन को लेकर प्रशासनिक तैयारियां प्रारंभ हो चुकी हैं। आने वाले समय में संस्थाओं के पंजीयन, निरीक्षण तथा वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित गौठानों में विकास कार्य शुरू होने की संभावना है। जिले के ग्रामीणों और पशुपालकों को उम्मीद है कि यह योजना गौसंरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगी।





















