संवाददाता : विनिता चौहान
ग्रामीण भारत न्यूज | रायगढ़, छत्तीसगढ़
रायगढ़ जिले सहित आसपास के क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण महानदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। नदी के उफान पर आने से रायगढ़ जिले के पुसौर विकासखंड तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सरिया क्षेत्र के अनेक गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। कई स्थानों पर नदी का पानी खेतों से होते हुए रिहायशी इलाकों तक पहुंच गया, जिससे ग्रामीणों में भय और चिंता का माहौल बन गया। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अलर्ट जारी कर दिया है तथा राहत एवं बचाव के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं।
लगातार बारिश के कारण महानदी ने अपना रौद्र रूप धारण कर लिया है। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण पुसौर ब्लॉक के सूरजगढ़, पड़ीगांव, सिंघपुरी, चंघोरी, बाराडोली, टिनमिनी सहित कई गांव प्रभावित हुए हैं। वहीं सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सरिया क्षेत्र के परसामपुर, लिप्ती, रानीडीह, सुरसी, कोर्रा, पोरथ, ठेंगागुड़ी, नदीगांव, रतनपाली, छोटे नावापारा, बोरिदा, खपरापाली और रायपाली सहित अनेक गांवों में बाढ़ का पानी फैल गया है।
बाढ़ के चलते हजारों एकड़ कृषि भूमि पानी में डूब गई है। खेतों में खड़ी धान, गन्ना तथा विभिन्न प्रकार की सब्जियों की फसल को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि उन्होंने हाल ही में धान की रोपाई की थी तथा फसल की बेहतर वृद्धि के लिए उर्वरकों का उपयोग किया था, लेकिन लगातार जलभराव के कारण उर्वरक बह गए और फसल पूरी तरह प्रभावित हो रही है। यदि जल्द पानी नहीं उतरा तो किसानों को दोहरी आर्थिक मार झेलनी पड़ सकती है।
सब्जी उत्पादक किसानों की स्थिति सबसे अधिक गंभीर बताई जा रही है। क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान टमाटर, मिर्च, भिंडी, लौकी, करेला तथा अन्य मौसमी सब्जियों की खेती करते हैं। जलभराव के कारण अधिकांश सब्जी की फसलें नष्ट होने की कगार पर हैं, जिससे किसानों की मेहनत और निवेश दोनों पर संकट गहरा गया है।
कई गांवों में नदी का पानी रिहायशी इलाकों तक पहुंच गया। पोरथ गांव के नदी किनारे स्थित मंदिर का बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया। वहीं रानीडीह और सूरजगढ़ में भी कई घरों के आसपास पानी भर गया, जिससे ग्रामीण पूरी रात जागकर हालात पर नजर रखने को मजबूर रहे।
स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी है। गांवों में मुनादी कराकर लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है। प्रशासन ने राहत शिविरों की व्यवस्था कर वहां स्वच्छ पेयजल, भोजन, दवाइयों तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, एनडीआरएफ तथा एसडीआरएफ की टीमों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए नावों एवं बचाव दल की व्यवस्था की गई है। अलग-अलग क्षेत्रों के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लिया तथा संबंधित अधिकारियों को राहत कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने राहत शिविरों में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के साथ स्वास्थ्य विभाग को भी संभावित बीमारियों से बचाव के लिए सतर्क रहने को कहा है।
महानदी में लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए ओडिशा स्थित हीराकुंड बांध के 12 गेट खोले गए हैं। अधिकारियों के अनुसार इससे जल प्रवाह को नियंत्रित करने में कुछ राहत मिली है और धीरे-धीरे नदी का जलस्तर स्थिर होने लगा है। हालांकि यदि ऊपरी कैचमेंट क्षेत्रों में लगातार वर्षा जारी रहती है तो स्थिति दोबारा गंभीर हो सकती है।
प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में फसलों के नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है। पानी पूरी तरह उतरने के बाद वास्तविक क्षति का आकलन किया जाएगा, जिसके आधार पर शासन द्वारा राहत एवं मुआवजा प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
ग्रामीणों ने शासन से मांग की है कि प्रभावित किसानों को शीघ्र आर्थिक सहायता, फसल क्षति का उचित मुआवजा तथा आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे इस प्राकृतिक आपदा से उबर सकें।
फिलहाल प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। मौसम विभाग द्वारा आगामी दिनों में भी वर्षा की संभावना जताई गई है, इसलिए नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने तथा प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।





















