रिपोर्ट – आषिश पटेल
*जशपुर, छत्तीसगढ़*
ग्रामीण भारत में घर-गृहस्थी के झगड़े अक्सर पंचायत तक सिमट जाते हैं। लेकिन जशपुर जिले के दुलदुला थाना क्षेत्र के भिंजपुर गांव में 7 नवंबर 2025 की रात जो हुआ उसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। एक पत्नी ने घरेलू विवाद के बाद पति की हत्या कर दी। फिर शव को सूटकेस में भरकर ठिकाने लगाने की कोशिश की। जब कामयाब नहीं हुई तो खुद मुंबई भागने की योजना बना ली। लेकिन पुलिस ने रास्ते में ही उसे पकड़ लिया।
इस बहुचर्चित मामले में कुनकुरी के द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने सुनवाई पूरी कर आरोपित पत्नी मंगरीता बाई को दोषी माना और आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अर्थदंड भी लगाया गया है।
*गांव में कैसा था माहौल*
भिंजपुर जशपुर जिले का एक सामान्य आदिवासी गांव है। यहां खेती और मजदूरी से जीवन चलता है। संतोष भगत और मंगरीता बाई की शादी कई साल पहले हुई थी। गांव के लोगों के अनुसार शादी के बाद से ही दोनों के बीच छोटी-छोटी बातों पर विवाद होता रहता था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंगरीता बाई कुछ समय पहले रोजगार की तलाश में मुंबई चली गई थी। लंबे समय बाद जब वह वापस गांव लौटी तो घर का माहौल फिर से बिगड़ गया। 7 नवंबर 2025 की रात को दोनों के बीच एक रिश्तेदार को लेकर कहासुनी शुरू हुई। बात इतनी बढ़ गई कि मंगरीता बाई ने गुस्से में घर में रखा मसाला पीसने वाला बट्टा उठाकर पति संतोष के सिर पर दे मारा।
*खून से सना फर्श और सूटकेस की योजना*
सिर पर गहरी चोट और अत्यधिक रक्तस्राव की वजह से संतोष भगत की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद मंगरीता बाई ने जो किया उसने सबको चौंका दिया। उसने पति के शव को घर में रखे एक बड़े ट्राली सूटकेस में ठूंस दिया। घर के फर्श पर फैले खून को साफ किया। दरवाजे को बाहर से बंद कर दिया।
उसकी योजना शव को किसी दूर जगह ठिकाने लगाने की थी। लेकिन सूटकेस का वजन ज्यादा होने के कारण वह अकेले उसे ले जाने में सफल नहीं हो पाई। अगले दिन वह घर में ताला लगाकर मुंबई भागने के इरादे से रायगढ़ की तरफ निकल गई।
*कैसे खुला राज*
संतोष भगत दूसरे दिन भी घर से बाहर नहीं निकला। पड़ोसियों और रिश्तेदारों को शक हुआ। जब काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला तो गांव वालों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस की मौजूदगी में जब दरवाजा तोड़ा गया तो अंदर का नजारा देखकर सभी दंग रह गए। घर के अंदर खून के निशान थे और सूटकेस में संतोष का शव रखा हुआ था।
जशपुर पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की। सीसीटीवी और लोकेशन के आधार पर पता चला कि मंगरीता बाई मुंबई जाने वाली बस में सवार है। पुलिस की टीम ने उसे रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिया।
*कोर्ट में क्या हुआ*
पुलिस ने मामले की जांच पूरी कर कुनकुरी न्यायालय में चार्जशीट पेश की। अभियोजन पक्ष ने गवाहों और सबूतों के आधार पर बताया कि यह हत्या पूर्व नियोजित नहीं थी लेकिन हत्या के बाद शव को छिपाने की कोशिश ने इसे संगीन बना दिया।
कुनकुरी के द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश बलराम देवांगन ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। उन्होंने कहा कि इस तरह की जघन्य हत्या में किसी प्रकार की नरमी न्याय और समाज दोनों के हित में नहीं है।
कोर्ट ने मंगरीता बाई को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 एक हत्या के आरोप में आजीवन कारावास और 1000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं धारा 238 साक्ष्य मिटाने के आरोप में 3 साल का सश्रम कारावास और 500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया। *ग्रामीण इलाकों में बढ़ रहे घरेलू विवाद*
यह घटना सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है। ग्रामीण भारत में आजकल पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ रहे हैं। कारण कई हैं। रोजगार के लिए पलायन, मोबाइल और सोशल मीडिया का प्रभाव, आर्थिक तंगी और आपसी विश्वास की कमी।
भिंजपुर जैसे गांव में पंचायत और बुजुर्ग पहले मामले सुलझा देते थे। लेकिन अब कई बार बात इतनी बढ़ जाती है कि पुलिस और कोर्ट तक पहुंच जाती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि गांवों में काउंसलिंग और महिला पुरुष दोनों के लिए संवाद की जरूरत है।
*पुलिस और समाज की प्रतिक्रिया*
जशपुर पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि इस मामले में समय रहते कार्रवाई की गई। अगर मंगरीता बाई फरार हो जाती तो शव को ठिकाने लगाना मुश्किल हो जाता। उन्होंने कहा कि घरेलू हिंसा के मामलों में लोग तुरंत पुलिस को सूचना दें।
गांव के सरपंच ने कहा कि ऐसी घटनाएं गांव की छवि खराब करती हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि गुस्से में कोई बड़ा कदम न उठाएं। जरूरत पड़े तो पंचायत या सामाजिक संगठनों की मदद लें।
*पीड़ित परिवार पर क्या असर*
संतोष भगत के परिवार में मातम का माहौल है। गांव के लोग बताते हैं कि संतोष मेहनती व्यक्ति था। उसकी मौत से घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है। वहीं आरोपित महिला के परिवार वाले भी सदमे में हैं।
कानून अपना काम कर रहा है लेकिन इस घटना ने गांव में कई सवाल छोड़ दिए हैं। क्या संवाद की कमी इतनी बड़ी सजा दिला सकती है। क्या पलायन और वापस लौटने से रिश्तों में दरार आती है।
*कानूनी विशेषज्ञ क्या कहते हैं*
स्थानीय वकीलों का कहना है कि बीएनएस की धारा 103 एक हत्या के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। वहीं धारा 238 के तहत साक्ष्य नष्ट करने पर भी सजा होती है। कोर्ट ने दोनों धाराओं में सजा सुनाकर साफ संदेश दिया है कि अपराध के बाद उसे छिपाने की कोशिश भी उतनी ही गंभीर है।
*गांव में जागरूकता की जरूरत*
इस घटना के बाद दुलदुला और आसपास के गांवों में पुलिस और प्रशासन ने बैठकें शुरू की हैं। लोगों को बताया जा रहा है कि घरेलू विवाद को हिंसा तक न ले जाएं। महिला हेल्पलाइन और काउंसलिंग सेंटर के नंबर भी बांटे जा रहे हैं।
शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता स्कूलों में बच्चों को बता रहे हैं कि गुस्से पर काबू कैसे पाया जाए। पंचायतें भी अब ऐसे मामलों में बीच-बचाव की भूमिका निभा रही हैं।
*निष्कर्ष*
भिंजपुर का यह हत्याकांड हमें सोचने पर मजबूर करता है। ग्रामीण भारत अब बदल रहा है। लोग काम के लिए शहर जाते हैं, नए विचार लेकर लौटते हैं। लेकिन उसी के साथ रिश्तों में टकराव भी बढ़ रहा है।
मंगरीता बाई को कोर्ट ने सजा सुना दी है। संतोष अब इस दुनिया में नहीं है। पीछे बचे हैं दो टूटे हुए परिवार और एक गांव जो इस घटना को लंबे समय तक याद रखेगा।
जरूरत है कि हम संवाद को जिंदा रखें। छोटी बात को बड़ा न बनाएं। और अगर बात बिगड़े तो हिंसा का रास्ता न चुनें। क्योंकि एक पल का गुस्सा पूरी जिंदगी बर्बाद कर देता है।
*रिपोर्ट: ग्रामीण संवाददाता आषिश पटेल*
*प्रकाशन तिथि: 31 जुलाई 2026*
*स्थान: जशपुर, छत्तीसगढ़*
——-
🔱 बोल बम कांवड़ियों 🔱
सावन में भगवा ड्रेस पर ऑफर!
पुरुष, महिला, बच्चे, बुजुर्ग सभी के लिए 👇
https://www.amazon.in/s?k=bhagwa+dress&tag=graminbharatnews21
हर हर महादेव 🙏
——————————————————–





















