*ग्रामीण भारत न्यूज डेस्क| नई दिल्ली | PIB रिलीज ID: 2290911*
*प्रविष्टि तिथि: 29 जुलाई 2026 | समय: 9:58 AM*
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*प्रधानमंत्री मोदी ने दी अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस की शुभकामनाएं, बाघ संरक्षण को बताया भारत की संस्कृति का हिस्सा*
*नई दिल्ली।* अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री *श्री नरेंद्र मोदी* ने मंगलवार को देशवासियों और पूरे विश्व के वन्यजीव प्रेमियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी विज्ञप्ति में PM मोदी ने कहा कि भारत को इस बात पर गर्व है कि दुनिया भर में पाए जाने वाले बाघों की *लगभग 70 प्रतिशत आबादी हमारे देश में निवास करती है*।
29 जुलाई 2026 को सुबह 9:58 बजे PIB दिल्ली द्वारा जारी रिलीज ID 2290911 में प्रधानमंत्री ने बाघ संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि हमारे प्रयास *”विज्ञान आधारित संरक्षण, सामुदायिक भागीदारी और सतत विकास”* के तीन स्तंभों पर आधारित हैं।
*”बाघ संरक्षण हमारी सदियों पुरानी संस्कृति से प्रेरित” – PM मोदी*
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारत में बाघ संरक्षण के प्रयास कोई नई पहल नहीं हैं, बल्कि ये हमारी उस संस्कृति से प्रेरित हैं जिसमें प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की परंपरा हजारों सालों से चली आ रही है।
PM मोदी ने ‘एक्स’ पर किए गए पोस्ट में लिखा:
> “अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर सभी वन्यजीव प्रेमियों को हार्दिक शुभकामनाएं। भारत को इस बात पर गर्व है कि वैश्विक बाघों की लगभग 70 प्रतिशत आबादी हमारे देश में निवास करती है। भारत में बाघ संरक्षण के प्रयास प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की हमारी सदियों पुरानी संस्कृति से प्रेरित हैं और हमारे लोगों की सामूहिक इच्छाशक्ति से संचालित हैं।”
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि भारत सरकार प्रकृति और विकास के बीच संतुलन बनाते हुए बाघों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित करने के लिए लगातार काम कर रही है।
*भारत बना बाघ संरक्षण का वैश्विक मॉडल*
पीआईबी की विज्ञप्ति के अनुसार, भारत आज दुनिया के लिए बाघ संरक्षण का सबसे बड़ा उदाहरण बन चुका है। 1973 में शुरू हुआ *’प्रोजेक्ट टाइगर’* आज 50 साल से ज्यादा का सफर तय कर चुका है।
*आंकड़े क्या कहते हैं:*
1. *विश्व के 70% बाघ* – WWF और NTCA के संयुक्त सर्वेक्षण के अनुसार दुनिया में लगभग 5680 जंगली बाघ हैं, जिनमें से 3682 बाघ अकेले भारत में हैं।
2. *53 टाइगर रिजर्व* – देश में 53 टाइगर रिजर्व हैं जो 75,000 वर्ग किमी से ज्यादा क्षेत्र में फैले हैं।
3. *2010 से 2022 तक दोगुनी आबादी* – 2010 में जहां 1706 बाघ थे, वहीं 2022 की गणना में यह संख्या बढ़कर 3682 हो गई।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सफलता सिर्फ सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि *वन कर्मियों, वैज्ञानिकों, संरक्षणवादियों और स्थानीय समुदायों* के सामूहिक प्रयासों से संभव हुई है।
*3 स्तंभों पर टिका है भारत का बाघ संरक्षण मॉडल*
पीएम मोदी ने विज्ञप्ति में बाघ संरक्षण की सफलता के पीछे 3 मुख्य कारण गिनाए:
*1. विज्ञान आधारित संरक्षण*
भारत अब बाघों की गिनती के लिए कैमरा ट्रैप, AI, ड्रोन और DNA तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। हर 4 साल में होने वाली बाघ गणना दुनिया में सबसे बड़ी वन्यजीव सर्वेक्षण मानी जाती है। 2022 की गणना में 52000 से ज्यादा कैमरे लगाए गए थे।
*2. सामुदायिक भागीदारी*
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि बाघ तभी बचेंगे जब जंगल के आसपास रहने वाले लोग उन्हें अपना मित्र समझेंगे। इसी सोच के साथ सरकार ने *”ईको-डेवलपमेंट कमेटी”* और *”वन्यजीव मित्र”* योजना शुरू की है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में आदिवासी समुदाय अब टाइगर सफारी और होमस्टे चलाकर अपनी आजीविका कमा रहे हैं।
*3. सतत विकास और मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी*
PM मोदी ने कहा कि भारत की नीति “विकास भी और वन्यजीव भी” की है। सड़क, रेल और नहरों में *”वाइल्डलाइफ कॉरिडोर”* बनाए जा रहे हैं ताकि बाघ एक जंगल से दूसरे जंगल तक सुरक्षित जा सकें। साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए मुआवजा राशि और त्वरित रेस्क्यू टीमों का गठन किया गया है।
*फ्रंटलाइन वॉरियर्स को सलाम*
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से उन *वन कर्मियों* की तारीफ की जो जान जोखिम में डालकर जंगलों की निगरानी करते हैं। उन्होंने कहा, “हमारे वन कर्मियों, वैज्ञानिकों और संरक्षणवादियों के प्रयासों और समर्पण ने भी बाघ संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।”
पिछले साल अकेले 42 वन रक्षकों ने ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाई। सरकार ने उनके परिवारों के लिए 25 लाख तक की सहायता राशि की घोषणा भी की है।
*राज्यों का योगदान: मध्य प्रदेश से लेकर अरुणाचल तक*
**राज्य** **बाघों की संख्या 2022** **प्रमुख टाइगर रिजर्व**
**मध्य प्रदेश** 785 बांधवगढ़, कान्हा, पन्ना
**कर्नाटक** 563 बांदीपुर, नागरहोल
**उत्तराखंड** 560 जिम कॉर्बेट
**महाराष्ट्र** 444 ताड़ोबा, पेंच
**तमिलनाडु** 306 मुदुमलाई, कलक्कड़
पीएम मोदी ने कहा कि हर राज्य ने अपने स्तर पर नवाचार किए हैं। जैसे राजस्थान में “बाघ मित्र” योजना और असम में बाढ़ के समय बाघों को बचाने का अभियान।
*अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहल*
भारत ने बाघ संरक्षण के लिए *Global Tiger Forum* और *TX2 लक्ष्य* में भी अहम भूमिका निभाई है। 2010 में TX2 का लक्ष्य था 2022 तक बाघों की संख्या दोगुनी करना। भारत ने इस लक्ष्य को 2018 में ही हासिल कर लिया था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के साथ मिलकर *”ट्रांस-बाउंड्री कॉरिडोर”* पर काम कर रहा है ताकि बाघों का आना-जाना सुरक्षित हो।
*स्थानीय समुदायों का सशक्तिकरण*
पीआईबी रिलीज में सबसे महत्वपूर्ण बात यह कही गई कि सरकार अब सिर्फ जंगल बचाने पर नहीं, बल्कि *जंगल के लोगों को सशक्त बनाने* पर ध्यान दे रही है।
1. *आजीविका:* टाइगर रिजर्व के आसपास 10 लाख से ज्यादा लोगों को इको-टूरिज्म, शहद, जड़ी-बूटी से रोजगार मिला है।
2. *शिक्षा:* बच्चों को वन्यजीव संरक्षण के बारे में स्कूलों में पढ़ाया जा रहा है।
3. *तकनीक:* मोबाइल ऐप के जरिए ग्रामीण अब सीधे वन विभाग को बाघ दिखने की सूचना दे सकते हैं।
*चुनौतियां और आगे का रास्ता*
प्रधानमंत्री ने माना कि अभी भी चुनौतियां हैं। शिकार, आवास का सिकुड़ना और जलवायु परिवर्तन बड़े खतरे हैं। लेकिन उन्होंने भरोसा दिलाया कि 2047 तक भारत “विकसित भारत” के साथ “विकसित वन्यजीव” का लक्ष्य भी हासिल करेगा।
पीएम ने कहा, “बाघ सिर्फ एक जानवर नहीं है। वो हमारे जंगल के स्वस्थ होने का प्रतीक है। अगर बाघ सुरक्षित है तो मतलब हमारा पानी, जंगल और हवा भी सुरक्षित है।”
*जनता की प्रतिक्रिया*
प्रधानमंत्री के ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर #InternationalTigerDay और #70PercentTigersInIndia ट्रेंड करने लगा। बॉलीवुड एक्टर, क्रिकेटर और आम लोग बाघ संरक्षण का संकल्प ले रहे हैं।
*निष्कर्ष: ग्रामीण भारत न्यूज का संपादकीय*
भारत के लिए बाघ सिर्फ राष्ट्रीय पशु नहीं, बल्कि हमारी जैव विविधता की रीढ़ हैं। 29 जुलाई 2026 को PM मोदी का संदेश साफ है – बाघ बचेंगे तो देश बचेगा।
सरकार, विज्ञान, समाज और वन्यजीवों का ये रिश्ता ही भारत को दुनिया में सबसे अलग बनाता है। सभी पाठकों से अपील करता है कि इस अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर हम भी संकल्प लें – प्लास्टिक कम करेंगे, जंगल नहीं काटेंगे और वन्यजीवों का सम्मान करेंगे।
क्योंकि जंगल बचेगा तभी गांव बचेगा और गांव बचेगा तभी भारत बचेगा।
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*स्रोत:* प्रधानमंत्री कार्यालय, प्रेस सूचना ब्यूरो, भारत सरकार
*रिलीज आईडी:* 2290911
*प्रकाशन तिथि और समय:* 29 जुलाई 2026, 9:58 AM
*रिपोर्ट:* ग्रामीण भारत न्यूज ब्यूरो, नई दिल्ली




















