*बीजापुर क्राईम। Sat, Jul 25, 2026 | Updated 12:00 AM IST*
बस्तर में लाल आतंक को जड़ से खत्म करने के लिए चल रहे ऑपरेशन में सुरक्षाबलों को एक बार फिर बड़ी सफलता मिली है। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के पीड़िया-हिरमगुंडा के घने जंगलों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और कोबरा बटालियन के जवानों ने माओवादियों के 6 खतरनाक डंप बरामद कर उन्हें ध्वस्त कर दिया।
इन डंपों को सुरक्षा बलों ने “बारूद बैंक” का नाम दिया है, क्योंकि यहां IED बनाने का पूरा सामान, विस्फोटक और डेटोनेटर छिपाकर रखे गए थे। अधिकारियों का मानना है कि इनका इस्तेमाल भविष्य में जवानों को निशाना बनाने के लिए किया जाना था।
### *कैसे हुई बरामदगी?*
22 जुलाई 2026 को आसूचना के आधार पर CRPF की *199वीं और 85वीं वाहिनी* के साथ *202 कोबरा बटालियन* ने संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया। पीड़िया-हिरमगुंडा का इलाका पहले माओवादियों का गढ़ माना जाता था।
जवानों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर चरणबद्ध तरीके से तलाशी ली। करीब 6 घंटे की मशक्कत के बाद जंगल के अलग-अलग हिस्सों में जमीन के नीचे छिपाकर रखे गए *6 माओवादी डंप* मिले।
बरामदगी के दौरान किसी प्रकार की मुठभेड़ या जनहानि नहीं हुई।
### *डंपों से क्या-क्या बरामद हुआ?*
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार इन 6 डंपों से करीब *30 प्रकार की सामग्री* जब्त की गई है। इसमें शामिल हैं:
1. *IED बनाने का सामान* – प्रेशर कुकर IED, पाइप IED के पार्ट्स
2. *विस्फोटक सामग्री* – गन पाउडर, जिलेटिन रॉड, कॉर्डेक्स वायर
3. *डेटोनेटर और बीजीएल शेल* – रिमोट से ब्लास्ट करने वाले उपकरण
4. *संचार उपकरण* – वायरलेस रेडियो सेट, बैटरी
5. *अन्य सामान* – माओवादी साहित्य, दवाइयां, नक्सली वर्दी
अधिकारियों ने बताया कि ये सभी सामान पॉलीथीन में पैक कर जमीन में गाड़ दिए गए थे ताकि बारिश और नमी से खराब न हों। बम निरोधक दस्ते ने मौके पर ही अधिकांश सामान को नष्ट कर दिया।
### *क्यों था ये इलाका अहम?*
हिरमगुंडा और पीड़िया कभी बस्तर में माओवादियों का सबसे मजबूत बेस एरिया था। यहां से वे बीजापुर-गंगालूर मार्ग पर जवानों की गाड़ियों को निशाना बनाते थे।
लेकिन पिछले 2 सालों में सरकार ने यहां नए सुरक्षा शिविर खोले, सड़कें बनाईं और प्रशासन की पहुंच बढ़ाई। लगातार ऑपरेशन के कारण माओवादियों का जनाधार खत्म हो गया। अब वो इस इलाके से भाग गए हैं, लेकिन जंगलों में अपना हथियार और बारूद का जखीरा छोड़ गए हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “31 मार्च 2026 के बाद बस्तर में माओवादी हिंसा पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है। अब हमारा फोकस इन छिपे हुए डंपों को खोजकर नष्ट करना है ताकि भविष्य में कोई बड़ी घटना न हो।”
### *पिछले 4 महीनों में बड़ी बरामदगियां*
ये पहली बार नहीं है जब जंगलों से इस तरह का जखीरा मिला है। पिछले कुछ महीनों में बस्तर में लगातार डंप बरामद हो रहे हैं:
*1. 12 मई 2026, बीजापुर – अबूझमाड़ क्षेत्र*
सुरक्षा बलों ने एक डंप से करीब *1 करोड़ रुपये नकद*, AK-47, BGL लॉन्चर, BGL शेल, डेटोनेटर और भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद किया था। इसे पिछले सालों की सबसे बड़ी बरामदगी माना गया।
*2. मई 2026, कांकेर*
संयुक्त अभियान में हाई-प्रेशर कुकर IED, पाइप IED, पेट्रोल बम, कार्डेक्स वायर से भरा डंप मिला था।
*3. 26 जून 2026, नारायणपुर – अबूझमाड़*
दो डंपों से *24 लाख रुपये नकद*, हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री मिली थी।
इन बरामदगियों से साफ है कि भले ही माओवादियों का सैन्य ढांचा कमजोर हुआ हो, लेकिन उनका लॉजिस्टिक नेटवर्क अभी भी जंगलों में फैला हुआ है।
### *सुरक्षाबलों की नई रणनीति*
अब CRPF, STF और कोबरा बटालियन की रणनीति बदल गई है। पहले फोकस मुठभेड़ पर था, अब फोकस है *”डंप हंटिंग ऑपरेशन”* पर।
ड्रोन, ह्यूमन इंटेलिजेंस और सैटेलाइट मैपिंग की मदद से उन जगहों को चिन्हित किया जा रहा है जहां माओवादियों ने 10-15 साल पहले सामान छिपाया था। हर बरामदगी के बाद उस रूट पर गश्त बढ़ा दी जाती है।
बीजापुर SP ने कहा, “हमारा मकसद बस्तर को बारूद मुक्त करना है। एक-एक डंप नष्ट होगा तो जवानों की जान बचेगी और गांव वाले भी सुरक्षित खेती कर पाएंगे।”
### *स्थानीय लोगों पर असर*
पीड़िया-हिरमगुंडा के गांव वाले पिछले 20 सालों से डर के साए में जी रहे थे। IED के डर से जंगल में लकड़ी काटने या तेंदूपत्ता तोड़ने नहीं जा पाते थे।
इस बरामदगी के बाद गांव में खुशी का माहौल है। एक ग्रामीण ने कहा, “अब लग रहा है कि हमारे बच्चे स्कूल जा सकेंगे। जंगल में बम नहीं रहेंगे तो हम आजादी से काम कर पाएंगे।”
### *आगे की चुनौती*
विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर में अभी ऐसे दर्जनों डंप हो सकते हैं। मानसून के बाद अक्टूबर से फिर बड़े ऑपरेशन चलाए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य 2026 के अंत तक बस्तर को नक्सल मुक्त घोषित करना है।
गृह मंत्रालय भी इस अभियान पर नजर रखे हुए है। केंद्र से अतिरिक्त फंड और ड्रोन की मांग की गई है।
### *निष्कर्ष*
बीजापुर में 6 डंपों की बरामदगी सिर्फ एक ऑपरेशन नहीं है। ये इस बात का सबूत है कि सुरक्षाबल अब रक्षात्मक नहीं बल्कि आक्रामक मोड में हैं। जंगल में दबा हर बारूद का डिब्बा निकलेगा और बस्तर में शांति लौटेगी।
जवानों की इस बहादुरी को सलाम।
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*रिपोर्ट:* ग्रामीण भारत न्यूज, बीजापुर ब्यूरो -विक्रम भगत
*स्रोत:* CRPF प्रेस नोट, बीजापुर पुलिस
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