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*भिलाई क्राईम। Fri, Jul 24, 2026 | Updated 11:36 PM IST*
क्रिकेट के मैदान पर अपनी ऑफ स्पिन से बल्लेबाजों को परेशान करने वाले टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर *राजेश चौहान* अब धोखाधड़ी के आरोपों से घिर गए हैं। छत्तीसगढ़ के भिलाई में मोहन नगर पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर उनके खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि उन्होंने एक ठेकेदार को ओडिशा के जिंदल इस्पात लिमिटेड में ट्रांसपोर्ट का ठेका दिलाने का झांसा देकर 17 लाख 52 हजार रुपये ठग लिए।
इस मामले ने खेल जगत से लेकर बिजनेस जगत तक हलचल मचा दी है। पीड़ित का कहना है कि भरोसा जीतने के लिए फर्जी वर्क ऑर्डर और कानूनी दस्तावेज तक दिखाए गए। अब पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है।
### *क्या है पूरा मामला?*
नईदुनिया की रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ता *दिनकर विश्वमित्र* भिलाई के रहने वाले हैं और ट्रांसपोर्ट का कारोबार करते हैं। उनकी मुलाकात उनके दोस्त *सरोज कुमार* के जरिए राजेश चौहान से हुई थी।
शिकायत में दिनकर ने बताया कि राजेश चौहान ने खुद को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बताया और कहा कि उद्योगपति नवीन जिंदल से उनकी अच्छी जान-पहचान है। चौहान ने दावा किया कि उनकी कंपनी *गोविंद ट्रांसपोर्ट* को ओडिशा के क्योंझर स्थित जिंदल इस्पात लिमिटेड से बड़ा ट्रांसपोर्ट ठेका मिला है।
इसके बाद राजेश चौहान ने दिनकर को ऑफर दिया कि अगर वो भी इस काम में साझेदारी करें तो उन्हें ट्रकों के जरिए काम मिलेगा और भारी मुनाफा होगा। भरोसा बढ़ाने के लिए जिंदल इस्पात लिमिटेड के नाम से एक कथित *फर्जी वर्क ऑर्डर* और अन्य कानूनी कागजात भी दिखाए गए।
### *कैसे फंसे ठेकेदार?*
पीड़ित के अनुसार 30 जुलाई 2021 को दोनों पक्षों के बीच लिखित इकरारनामा हुआ। इकरारनामे में ठेके में साझेदारी और मुनाफे के बंटवारे की बात लिखी गई थी।
रकम देने का सिलसिला इसके बाद शुरू हुआ:
1. *पहली किश्त:* 2 लाख 51 हजार रुपये नकद दिए गए
2. *दूसरी और तीसरी किश्त:* राजेश चौहान के कहने पर गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी के खाते में 2 अलग-अलग ट्रांजेक्शन में 15 लाख 1 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए
इस तरह कुल *17 लाख 52 हजार रुपये* राजेश चौहान को दिए गए। आरोप है कि रकम लेने के बाद काम शुरू करने को लेकर लगातार टालमटोल की जाने लगी।
### *कब खुला फर्जीवाड़े का राज?*
कई महीने बीत जाने के बाद भी जब काम शुरू नहीं हुआ तो दिनकर को शक हुआ। वो खुद ओडिशा के क्योंझर जाकर जिंदल इस्पात लिमिटेड के प्लांट पहुंचे। वहां कंपनी के अधिकारियों से मुलाकात के दौरान बड़ा खुलासा हुआ।
कंपनी अधिकारियों ने बताया कि न तो राजेश चौहान को और न ही उनकी गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी को जिंदल इस्पात से कोई ट्रांसपोर्ट ठेका दिया गया है। साथ ही दिनकर को दिखाए गए वर्क ऑर्डर और दस्तावेज भी *फर्जी* बताए गए।
इसके बाद दिनकर के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्हें समझ आ गया कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है।
### *पुलिस और कोर्ट तक का सफर*
पीड़ित दिनकर ने सबसे पहले मोहन नगर थाने में शिकायत दी। इसके बाद दुर्ग पुलिस अधीक्षक कार्यालय में भी आवेदन दिया। लेकिन शुरुआती स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
आखिरकार दिनकर ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई *न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ऐश्वर्या दीवान* की अदालत में हुई। अदालत ने शिकायतकर्ता के द्वारा पेश किए गए तथ्यों और सबूतों को देखने के बाद पुलिस को निर्देश दिया कि राजेश चौहान के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया जाए।
कोर्ट के आदेश के बाद *24 जुलाई 2026* को मोहन नगर पुलिस ने राजेश चौहान के खिलाफ IPC की धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं में FIR दर्ज कर ली है। अब पुलिस मामले की जांच कर रही है।
### *राजेश चौहान कौन हैं?*
राजेश चौहान भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑफ स्पिन गेंदबाज हैं। उन्होंने 1990 के दशक में भारत के लिए टेस्ट और वनडे मैच खेले हैं। घरेलू क्रिकेट में वो मध्य प्रदेश की तरफ से खेलते थे। रिटायरमेंट के बाद वो क्रिकेट कमेंट्री और कोचिंग से भी जुड़े रहे हैं।
इस वजह से इस मामले ने और ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं।
### *कानूनी विशेषज्ञ क्या कहते हैं?*
भिलाई के वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना है कि इस मामले में IPC की धारा 420 – धोखाधड़ी, धारा 406 – आपराधिक विश्वासघात और धारा 467, 468 – फर्जी दस्तावेज बनाने जैसी धाराएं लग सकती हैं।
“अगर आरोप सिद्ध होते हैं तो आरोपी को 3 से 7 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है। फर्जी दस्तावेज बनाने का आरोप सबसे गंभीर है,” अधिवक्ता ने बताया।
### *कंपनी का पक्ष*
फिलहाल जिंदल इस्पात लिमिटेड की तरफ से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। वहीं राजेश चौहान से भी संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल पाया। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
### *इस केस से क्या सीखें?*
1. *किसी भी बड़े ठेके से पहले कंपनी से डायरेक्ट वेरिफिकेशन करें* – बिचौलियों के भरोसे न रहें
2. *वर्क ऑर्डर की ऑथेंटिसिटी चेक करें* – कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट या HR से कन्फर्म करें
3. *बड़ी रकम का लेन-देन लिखित एग्रीमेंट और बैंक ट्रांजेक्शन से करें*
4. *जल्दबाजी में फैसला न लें* – लालच में आकर फर्जी स्कीम में न फंसें
### *भिलाई में बढ़ रहे हैं ठगी के मामले*
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में “ठेका दिलाने” के नाम पर ठगी के 3-4 मामले सामने आए हैं। ज्यादातर मामलों में पीड़ितों को बड़े उद्योगपतियों से जान-पहचान का झांसा दिया जाता है।
SP दुर्ग ने लोगों से अपील की है कि अगर कोई व्यक्ति सरकारी या निजी कंपनी में ठेका दिलाने के नाम पर पैसे मांगे तो पहले उसकी पूरी जांच करें।
### *आगे क्या होगा?*
मोहन नगर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है और राजेश चौहान को नोटिस भेजने की तैयारी है। साथ ही बैंक ट्रांजेक्शन और फर्जी दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जाएगी। कोर्ट ने पुलिस को 2 महीने में जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
*निष्कर्ष:*
क्रिकेट के स्टार पर लगे इस आरोप ने सभी को चौंका दिया है। अब देखना होगा कि जांच में क्या निकलकर आता है। पीड़ित को इंसाफ मिलता है या नहीं, ये आने वाले समय में साफ होगा।
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*रिपोर्ट:* ग्रामीण भारत न्यूज डेस्क, विक्रम भगत भिलाई
*स्रोत:* कोर्ट दस्तावेज, पुलिस FIR, पीड़ित का बयान
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