जीबीएन-ब्यूरो रिपोर्ट -नयी दिल्ली
*विलनियस, लिथुआनिया से नई दिल्ली। 19 जुलाई 2026।*
देश के लिए गर्व का पल। लिथुआनिया की राजधानी विलनियस में 12 से 19 जुलाई तक चली दुनिया की सबसे कठिन विज्ञान प्रतियोगिताओं में से एक “37वें अंतरराष्ट्रीय जीवविज्ञान ओलम्पियाड 2026” में भारत के चारों छात्रों ने पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
टीम इंडिया ने 1 स्वर्ण और 3 रजत पदक अपने नाम किए। सबसे बड़ी बात – चारों बच्चे भारत के अलग-अलग राज्यों के छोटे शहरों और गांवों से हैं। न कोई दिल्ली का, न मुंबई का।
“azadi ka amrit mahotsav” के साल में ये जीत दिखाती है कि भारत का दिमाग अब गांव-गांव तक पहुंच गया है।
अणु ऊर्जा विभाग और HBCSE-TIFR मुंबई ने आज PIB के जरिए इसकी आधिकारिक घोषणा की।
### पदक विजेता: 4 बच्चे, 4 राज्य, एक ही जुनून
*1. भव्या गुंवाल – स्वर्ण पदक*
पता: महेंद्रगढ़, हरियाणा।
भव्या ने पूरे भारत का सिर ऊंचा कर दिया। 78 देशों के 307 छात्रों में से टॉप पर आकर गोल्ड जीता। हरियाणा की बेटी ने साबित किया कि बेटियां किसी से कम नहीं।
*2. सौमिल मैटि – रजत पदक*
पता: हावड़ा, पश्चिम बंगाल।
हावड़ा के इस छात्र ने बंगाल का नाम रोशन किया।
*3. निशित कलानी – रजत पदक*
पता: पाली, राजस्थान।
रेगिस्तान की धरती से निकला ये बेटा आज दुनिया में चमका।
*4. अनमोल कुमार – रजत पदक*
पता: मंसा, पंजाब।
पंजाब के किसान परिवार का बेटा। खेतों की मिट्टी से उठकर वर्ल्ड स्टेज तक पहुंचा।
चारों के साथ टीम लीडर के रूप में प्रो. रेखा वर्तक और डॉ. अनुपमा रोनाड HBCSE-TIFR मुंबई से गईं थीं। वैज्ञानिक पर्यवेक्षक डॉ. रंजीतसिंह देवकार और डॉ. सिद्धेश घाग ने बच्चों को हर कदम पर गाइड किया।
### IBO 2026 था कितना मुश्किल?
ये कोई आम परीक्षा नहीं थी। इसे “जीवविज्ञान की ओलंपिक” कहा जाता है।
इस साल 78 देशों के 307 सबसे होनहार छात्र विलनियस आए थे। कुल 31 गोल्ड, 61 सिल्वर और 91 ब्रॉन्ज बांटे गए। यानी हर 3 में से 1 बच्चे को ही पदक मिला।
परीक्षा को विलनियस यूनिवर्सिटी लाइफ साइंसेस सेंटर ने बनाया था। 2 भाग थे:
*पहला: 6 घंटे की प्रैक्टिकल परीक्षा*
4 लैब में बच्चों को हाथ से प्रयोग करने थे।
1. *मॉलिक्यूलर बायोलॉजी लैब*: प्लास्मिड का रेस्ट्रिक्शन डाइजेशन करना था। फिर एगरोज़ जेल पर उसका विश्लेषण। साथ में एंजाइम का बायोकेमिकल टेस्ट। ये वो काम है जो बड़े-बड़े रिसर्च लैब में होता है।
2. *एनिमल फिजियोलॉजी लैब*: यहां एस्पिरिन की दवा शरीर में कैसे काम करती है, ये नापना था। सिम्युलेटेड खून के सैंपल में दवा के टूटने को एक खास ऐप और लाइट बॉक्स कलरिमीटर से मापा गया।
3. *एनिमल मॉर्फोलॉजी लैब*: कीड़े-मकोड़ों के मुंह के हिस्से का डिसेक्शन करके उनका वर्गीकरण करना था। एकदम बारीकी का काम।
4. *प्लांट कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी लैब*: सबसे आधुनिक। ImageJ सॉफ्टवेयर से पौधे की जड़ की लंबाई मापनी थी। अलग-अलग पौधों का मैक्रोफेनोटाइप एनालिस और ट्रांसक्रिप्टोम एनालिस करना था।
*दूसरा: 6 घंटे की थ्योरी परीक्षा*
ये भी 2 हिस्सों में 3-3 घंटे की थी। 100 सवाल। लेकिन रटने वाले नहीं। सब सवाल असली रिसर्च डेटा और फील्ड स्टडी पर आधारित थे।
सवाल थे: सेल और मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, जेनेटिक्स, इवोल्यूशन, इकोलॉजी, बिहेवियर और बायो-सिस्टेमैटिक्स से। मतलब बच्चे को सिर्फ किताब नहीं, सोचने की ताकत भी चाहिए थी।
### गांव के बच्चों ने कैसे मारी बाजी?
अणु ऊर्जा विभाग की विज्ञप्ति में साफ कहा गया कि इस जीत के पीछे देशभर के शिक्षकों और HBCSE के बायोलॉजी ओलम्पियाड सेल की मेहनत है।
कहानी ऐसे शुरू होती है:
1. *स्टेज 1 – NSEB*: पहले नेशनल स्टैंडर्ड एग्जाम होता है। इसमें लाखों बच्चे बैठते हैं।
2. *स्टेज 2 – INBO*: फिर इंडियन नेशनल बायोलॉजी ओलम्पियाड। यहां से टॉप 30 चुने जाते हैं।
3. *स्टेज 3 – OCSC*: मुंबई के HBCSE में 2 हफ्ते का ट्रेनिंग कैम्प। यहां प्रोफेसर बच्चे को लैब वर्क, थ्योरी सब सिखाते हैं। यही “प्री-डिपार्चर कैम्प” था।
4. *फाइनल टीम*: इन 30 में से 4 बेस्ट बच्चों को टीम इंडिया में चुना जाता है।
भव्या, सौमिल, निशित और अनमोल इसी प्रोसेस से निकले। सरकार और विज्ञान विभागों ने फंडिंग की। नेशनल स्टीयरिंग कमिटी ने पूरा सिस्टम चलाया।
### आंकड़े चीख-चीख कर बोल रहे हैं
ये भारत की IBO में 26वीं बार भागीदारी थी।
अब तक कुल 104 भारतीय बच्चे जा चुके हैं।
– *17 गोल्ड*
– *69 सिल्वर*
– *17 ब्रॉन्ज*
– *1 सम्मानजनक उल्लेख*
पिछले 10 साल का रिकॉर्ड देखो तो भारत की सफलता दर कमाल है:
*गोल्ड – 25%* और *सिल्वर – 68%*।
मतलब हर 4 में से 1 बच्चा गोल्ड लाता है। ये किसी भी देश से कम नहीं।
### हरियाणा की भव्या: “मां कहती थी पढ़ लिखकर देश का नाम रोशन करना”
महेंद्रगढ़ की भव्या गुंवाल के घर में जश्न का माहौल है। पिता किसान हैं। भव्या ने बताया “मैं रोज 8 घंटे पढ़ती थी। HBCSE के कैम्प में सर-मैडम ने बहुत मेहनत कराई। जब रिजल्ट आया और गोल्ड मिला तो सबसे पहले मां को फोन किया।”
भव्या आगे रिसर्चर बनना चाहती हैं। उनका सपना है भारत के लिए कैंसर की नई दवा खोजना।
### पंजाब के अनमोल: “खेत से लैब तक का सफर”
मंसा के अनमोल के पिता गेहूं उगाते हैं। अनमोल कहते हैं “गांव में लैब नहीं थी। यूट्यूब और किताबों से सीखा। सिल्वर मिलने के बाद गांव वाले मिठाई बांट रहे हैं।”
### राजस्थान के निशित और बंगाल के सौमिल
पाली के निशित और हावड़ा के सौमिल दोनों का कहना है कि इस जीत का श्रेय उनके स्कूल टीचर को जाता है। जिन्होंने कम संसाधनों में भी उन्हें आगे बढ़ाया।
### सरकार और वैज्ञानिकों का बयान
अणु ऊर्जा विभाग ने कहा “हम सभी छात्रों और डेलीगेशन को बधाई देते हैं। ये भारत के युवाओं की प्रतिभा का सबूत है।”
HBCSE ने कहा “हमारे शिक्षक ही असली हीरो हैं। उन्होंने बच्चों को तराशा।”
### इसका मतलब क्या है ग्रामीण भारत के लिए?
1. *टैलेंट हर जगह है*: टॉपर दिल्ली-मुंबई से नहीं, महेंद्रगढ़, मंसा, पाली से निकले।
2. *विज्ञान अब दूर नहीं*: सरकारी मदद से गांव का बच्चा भी वर्ल्ड लेवल की लैब में काम कर सकता है।
3. *नई पीढ़ी रिसर्च की तरफ*: ये बच्चे आगे जाकर डॉक्टर, वैज्ञानिक, रिसर्चर बनेंगे। भारत को आत्मनिर्भर बनाएंगे।
4. *बेटियां आगे*: भव्या का गोल्ड बताता है कि STEM में लड़कियां लीड कर रही हैं।
### आगे क्या?
अगला IBO 2027 में फिलीपींस में होगा। HBCSE ने तैयारी शुरू कर दी है। सरकार का लक्ष्य है कि हर साल कम से कम 2 गोल्ड आएं।
स्कूलों में भी अब ओलम्पियाड की कोचिंग शुरू होगी। ताकि और बच्चे इस प्लेटफॉर्म तक पहुंचें।
### निष्कर्ष
19 जुलाई 2026 का दिन इतिहास में लिखा जाएगा। जिस दिन 4 भारतीय बच्चों ने लिथुआनिया की धरती पर तिरंगा लहराया।
ये जीत सिर्फ 4 बच्चों की नहीं है। ये हर उस टीचर की जीत है जो गांव में पढ़ाता है। हर उस मां-बाप की जीत है जो फीस के लिए मेहनत करता है। हर उस छात्र की जीत है जो सपने देखता है।
प्रधानमंत्री ने भी कहा था “विकसित भारत 2047” युवाओं से ही बनेगा। भव्या, सौमिल, निशित और अनमोल उसी विकसित भारत की नींव रख रहे हैं।
देश को नाज है इन बच्चों पर।
जय हिंद। भारत माता की जय।
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