GBN- ब्यूरो रिपोर्ट-
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नई दिल्ली, 19 जुलाई 2026। संसद का मानसून सत्र
शुरू होने से ठीक एक दिन पहले केंद्र सरकार ने सभी राजनीतिक दलों के साथ सर्वदलीय बैठक की। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में देश के 40 राजनीतिक दलों के 58 वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक का मकसद था आगामी सत्र को सुचारू रूप से चलाना और जरूरी बिलों पर आम सहमति बनाना।
संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने बैठक बुलाई थी। उनके साथ राज्यसभा के नेता सदन और स्वास्थ्य मंत्री श्री जेपी नड्डा, कानून मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल और संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन भी मौजूद रहे।
### बैठक की शुरुआत और सत्र की तारीखें तय
बैठक शाम 4:20 बजे संसद भवन परिसर में शुरू हुई। सबसे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सभी नेताओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की खूबसूरती इसी में है कि मतभेद के बावजूद हम एक मेज पर बैठकर बात करते हैं।
इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सत्र की पूरी रूपरेखा बताई। उन्होंने कहा कि मानसून सत्र 2026 सोमवार 20 जुलाई से शुरू होगा और गुरुवार 13 अगस्त तक चलेगा। यानी कुल 25 दिन का सत्र होगा जिसमें 19 बैठकें होंगी।
रिजिजू ने बताया कि सत्र के लिए विधायी कार्यसूची पहले ही 16 जुलाई को संसद के दोनों सचिवालयों द्वारा बुलेटिन भाग-2 में जारी कर दी गई है। यानी कौन-कौन से बिल आएंगे, किस दिन क्या चर्चा होगी, ये सब पहले से तय है।
### सरकार का रुख: “हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार”
बैठक में सरकार की तरफ से साफ संदेश दिया गया। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि सरकार संसद के नियमों के अनुसार किसी भी जरूरी मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। चाहे वो महंगाई हो, बाढ़ हो, किसानों की समस्या हो या विदेश नीति।
उन्होंने विपक्ष से अपील की कि सदन की गरिमा बनी रहे। हंगामा कम हो और चर्चा ज्यादा हो। “संसद जनता की आवाज है। अगर हम यहीं नहीं बोलेंगे तो जनता की बात कहां जाएगी” रिजिजू ने कहा।
उन्होंने ये भी कहा कि सरकार बिल लाने से पहले विपक्ष की राय लेना चाहती है। कई बिल ऐसे हैं जो सीधे गांव, किसान और गरीब से जुड़े हैं। इसलिए सबकी सहमति जरूरी है।
### विपक्ष ने उठाए ये मुद्दे
बैठक में 40 दलों के नेताओं ने बारी-बारी से अपनी बात रखी। करीब 3 घंटे तक चली बैठक में कई मुद्दे उठे।
*1. महंगाई और बेरोजगारी*: विपक्षी दलों ने कहा कि खाने-पीने की चीजें महंगी हैं। ग्रामीण इलाकों में रोजगार कम हुआ है। इस पर सत्र में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।
*2. अतिवृष्टि और बाढ़*: छत्तीसगढ़, असम, बिहार समेत कई राज्यों में बाढ़ है। विपक्ष ने मांग की कि केंद्र सरकार विशेष पैकेज दे और राहत कार्यों की निगरानी करे।
*3. किसान मुद्दे*: MSP की गारंटी, कर्ज माफी और फसल बीमा को लेकर कई दल बोले। कहा कि मानसून में किसान सबसे ज्यादा परेशान होता है।
*4. महिला सुरक्षा और शिक्षा*: कई महिला सांसदों ने कहा कि बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा पर कानून और सख्त होने चाहिए।
*5. विदेश नीति*: पड़ोसी देशों से रिश्ते और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भी चर्चा की मांग हुई।
सभी नेताओं ने सरकार को आश्वासन दिया कि वो सत्र को चलने देंगे। टकराव की बजाय मुद्दों पर बात करेंगे।
### महत्वपूर्ण बिल जो आ सकते हैं
संसदीय कार्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इस सत्र में सरकार कई अहम बिल ला सकती है।
ग्रामीण विकास से जुड़ा एक बिल भी सूची में है जिसमें पंचायतों को ज्यादा वित्तीय अधिकार देने की बात है। इसके अलावा डिजिटल हेल्थ, कृषि निर्यात और MSME को लेकर भी प्रस्ताव हैं।
रिजू ने कहा कि “अजादी का अमृत महोत्सव” के तहत कुछ सामाजिक सुधार के बिल भी लाए जाएंगे। सरकार चाहती है कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में पंचायत और गांव की बड़ी भूमिका हो।
### संसदीय कार्य मंत्रालय की तैयारी
बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्रालय ने कहा कि वो पूरी तरह तैयार है। दोनों सदनों में प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के लिए समय तय किया गया है।
मंत्री ने कहा कि प्रिंट मीडिया, टीवी और सोशल मीडिया के जरिए सत्र की हर जानकारी जनता तक पहुंचाई जाएगी। PIB की तरफ से रोज ब्रीफिंग होगी।
उन्होंने “azadi ka amrit mahotsav” का भी जिक्र किया और कहा कि इस सत्र में देश की आजादी के 79 साल पूरे होने पर विशेष चर्चा होगी।
### नेताओं ने क्या कहा
बैठक के बाद कई नेताओं ने मीडिया से बात की।
एक वरिष्ठ विपक्षी नेता ने कहा “हम सरकार से सहमत नहीं हैं, लेकिन देश के लिए साथ जरूर हैं। उम्मीद है चर्चा होगी।”
सत्ता पक्ष के एक नेता ने कहा “मानसून सत्र में गांव-गरीब-किसान के मुद्दे सबसे ऊपर रहेंगे। सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है।”
### निष्कर्ष: सहयोग से चलेगा सदन
बैठक के अंत में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सभी का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि देश की जनता हमें संसद में लड़ने के लिए नहीं, बल्कि समाधान निकालने के लिए भेजती है।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। इसकी ताकत चर्चा और संवाद में है। अगर हम 19 दिन मिलकर काम करेंगे तो कई ऐसे कानून बनेंगे जो सीधे गांव तक असर डालेंगे।
संसदीय कार्य मंत्री ने भी सभी को धन्यवाद कहा और उम्मीद जताई कि ये सत्र सबसे उत्पादक सत्रों में से एक होगा।
बैठक के बाद सभी दल अपने-अपने सांसदों को ब्रीफ करेंगे। कल से जब सत्र शुरू होगा तो सबकी नजर इस बात पर होगी कि चर्चा कितनी होती है और हंगामा कितना।
सरकार ने साफ कर दिया है कि दरवाजे खुले हैं। विपक्ष ने भी सहयोग का भरोसा दिया है। अब देखना है कि 13 अगस्त तक संसद कितने नए कानून और कितनी नई बहस देश को देती है।
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