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छत्तीसगढ़ में बीते 48 घंटों से हो रही लगातार बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। खासकर बिलासपुर और जांजगीर-चांपा जिले में बादल फटने जैसी स्थिति बन गई। निचले इलाकों में पानी भर गया, कई गांवों का संपर्क टूट गया, और खेतों में खड़ी फसलें जलमग्न हो गईं।
इस स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने तुरंत आपात बैठक बुलाई और सभी जिला कलेक्टरों, एसपी, और राहत विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए।
#### 1. स्थिति का गंभीरता से लिया गया संज्ञान
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति की मार सबसे ज्यादा गरीब और किसान परिवारों पर पड़ती है। इसलिए प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है कि एक भी व्यक्ति भूखा, प्यासा या बेघर न रहे। उन्होंने बिलासपुर और जांजगीर-चांपा के दौरे के बाद मिली रिपोर्ट को गंभीरता से पढ़ा। रिपोर्ट में बताया गया कि कई जगहों पर 12 फीट तक पानी भर गया है। सड़कें टूट गई हैं। बिजली के खंभे गिर गए हैं।
मुख्यमंत्री ने साफ कहा “राहत कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। फाइलों में नहीं, जमीन पर काम दिखना चाहिए।”
#### 2. राहत और बचाव के लिए त्वरित निर्देश
मुख्यमंत्री ने प्रशासन को 8 मुख्य बिंदुओं पर काम करने को कहा:
*भोजन और पेयजल*: बाढ़ प्रभावित हर गांव में सामुदायिक रसोई शुरू की जाए। सूखा राशन, पीने का पानी और ORS के पैकेट घर-घर पहुंचाए जाएं।
*आश्रय*: जिनके घर गिर गए हैं या खतरे में हैं, उन्हें स्कूल, सामुदायिक भवन और पंचायत भवन में शिफ्ट किया जाए। वहां साफ-सफाई, पंखे और बिस्तर की व्यवस्था हो।
*चिकित्सा सुविधा*: हर राहत शिविर में डॉक्टर और दवाइयों की टीम 24 घंटे रहे। सांप काटने, बुखार, डायरिया और चर्म रोग की दवाइयां पहले से स्टॉक में रखी जाएं। एंबुलेंस की संख्या बढ़ाई जाए।
*जलनिकासी*: नगर निगम और पंचायतों को पंप लगाकर पानी निकालने के निर्देश दिए। नालों और नदियों की सफाई तुरंत कराई जाए ताकि पानी और न भरे।
*बिजली और सड़क*: गिरे हुए बिजली के खंभे 24 घंटे में दुरुस्त हों। टूटी सड़कों पर अस्थायी पुल और वैकल्पिक रास्ते बनाए जाएं।
*पशुओं के लिए व्यवस्था*: मवेशियों के लिए चारा और पानी की अलग व्यवस्था हो। पशु चिकित्सकों की टीम गांव-गांव जाए।
*फसल नुकसान का आकलन*: कृषि विभाग की टीम तुरंत खेतों में जाकर फसल नुकसान का सर्वे करे। ताकि मुआवजा समय पर मिल सके।
*अफवाहों पर रोक*: सोशल मीडिया पर झूठी खबरें न फैले इसलिए जिला प्रशासन रोज 2 बार स्थिति बुलेटिन जारी करे।
#### 3. मैदानी स्तर पर निगरानी
मुख्यमंत्री ने कहा कि वो खुद हर 6 घंटे में स्थिति की रिपोर्ट ले रहे हैं। कंट्रोल रूम रायपुर में 24×7 चलाया जा रहा है। बिलासपुर और जांजगीर में वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों को प्रभारी बनाकर भेजा गया है।
उन्होंने कहा “अधिकारी कुर्सी पर नहीं बैठेंगे। नाव लेकर गांव-गांव जाएंगे। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों का विशेष ध्यान रखेंगे।”
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 4 टीमें पहले से तैनात हैं। सेना से भी संपर्क में हैं। जरूरत पड़ी तो हेलीकॉप्टर से राहत सामग्री गिराई जाएगी।
#### 4. जनप्रतिनिधियों और समाज की भूमिका
मुख्यमंत्री ने सभी विधायकों, सांसदों और पंचायत प्रतिनिधियों से अपील की कि वो जनता के साथ खड़े हों। उन्होंने NGOs, स्वयंसेवी संस्थाओं और युवा संगठनों से भी मदद मांगी। कहा कि भोजन, कपड़ा और दवा इकट्ठा करके प्रशासन को दें।
“ये समय राजनीति का नहीं है। ये समय सेवा का है” मुख्यमंत्री ने ये भी कहा।
#### 5. किसानों और आम लोगों के लिए आश्वासन
किसानों की चिंता सबसे बड़ी है क्योंकि खरीफ की फसल डूब गई है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 15 दिन में सर्वे पूरा होगा और मुआवजा सीधे खाते में जाएगा।
आवासहीन लोगों के लिए प्रधानमंत्री आवास और मुख्यमंत्री आवास योजना में प्राथमिकता दी जाएगी। जिनके दस्तावेज बह गए हैं उन्हें बिना दस्तावेज के भी मदद दी जाएगी।
#### 6. राज्य सरकार की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार हर संकट में जनता के साथ खड़ी रही है। 2024 में भी बाढ़ आई थी तब हमने 2 लाख लोगों को बचाया था। इस बार भी हम पीछे नहीं हटेंगे।
उन्होंने कहा “हमारा लक्ष्य है कि 7 दिन के अंदर जनजीवन सामान्य हो। बच्चे स्कूल जाएं, बाजार खुले, और खेतों में फिर से काम शुरू हो।”
इसके लिए राज्य आपदा कोष से 50 करोड़ रुपए तुरंत जारी किए गए हैं। केंद्र सरकार से भी अतिरिक्त मदद मांगी गई है।
#### 7. आम जनता से अपील
अंत में मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि घबराएं नहीं। अफवाहों पर ध्यान न दें। प्रशासन का सहयोग करें। अगर कहीं मदद नहीं पहुंच रही तो 1077 कंट्रोल रूम नंबर पर तुरंत कॉल करें।
उन्होंने कहा “आपकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। हम एक-एक परिवार तक पहुंचेंगे। छत्तीसगढ़ की जनता मजबूत है। हम मिलकर इस संकट से भी निकलेंगे।”
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### निष्कर्ष
कुल मिलाकर मुख्यमंत्री का संदेश साफ है – *त्परता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता*। राहत कार्य युद्ध स्तर पर चल रहे हैं। प्रशासन, पुलिस, सेना और जनता सब मिलकर काम कर रहे हैं।
राज्य सरकार ने वादा किया है कि जब तक आखिरी व्यक्ति के घर में चूल्हा नहीं जलेगा, तब तक राहत कार्य बंद नहीं होगा।





















