संवाददाता विनोद चौहान | ग्रामीण भारत न्यूज
नई दिल्ली, 15 अगस्त 2026। देश आज अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस राष्ट्रभक्ति, उत्साह और गौरव के साथ मना रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देशवासियों को संबोधित करते हुए स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को नमन किया और वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आत्मनिर्भर भारत, आधुनिक तकनीक, विनिर्माण, कृषि, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा, युवा शक्ति, महिला सशक्तिकरण, डिजिटल इंडिया, खेल, ग्रीन इकोनॉमी और भारत की सॉफ्ट पावर को विकसित भारत की आधारशिला बताया।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज हर घर तिरंगा और हर मन तिरंगा है। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी सहित स्वतंत्रता आंदोलन के सभी सेनानियों, क्रांतिकारियों और बलिदानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी असंख्य लोगों के त्याग, तपस्या और बलिदान का परिणाम है और स्वतंत्र भारत की जिम्मेदारी है कि वह उनके सपनों को साकार करने की दिशा में लगातार आगे बढ़े।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देश के उन क्षेत्रों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की, जहां हाल के दिनों में बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि सरकार और पूरा देश उनके साथ खड़ा है।
2047 तक विकसित भारत का संकल्प
प्रधानमंत्री ने कहा कि अब भारत छोटे सपनों से आगे बढ़कर बड़े लक्ष्य निर्धारित करने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि बड़े सपने सोच के क्षितिज को विस्तृत करते हैं और दृढ़ संकल्प कठिन परिस्थितियों में भी रास्ते निकालने का सामर्थ्य देता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के 100 वर्ष पूरे होने पर वर्ष 2047 में भारत को विकसित राष्ट्र बनाना देश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय संकल्प है। उन्होंने देश की युवा शक्ति, किसानों, महिलाओं, मजदूरों, उद्यमियों, मध्यम वर्ग और सामान्य नागरिकों के सामूहिक पुरुषार्थ को इस लक्ष्य की सबसे बड़ी ताकत बताया।
प्रधानमंत्री ने पिछले वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में गरीबी से बाहर निकलने वाले लोगों की संख्या में बड़ा बदलाव आया है और भारत की अर्थव्यवस्था ने तेज गति पकड़ी है। उन्होंने विनिर्माण, डिजिटल लेनदेन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल उत्पादन, रेलवे, खादी एवं ग्रामोद्योग और पेटेंट जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति का उल्लेख किया।
आत्मनिर्भर भारत को बताया विकसित भारत का आधार
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का सपना आत्मनिर्भर भारत के बिना पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि दुनिया से व्यापार और तकनीक लेना आवश्यक है, लेकिन भारत की मूलभूत जरूरतों और रणनीतिक क्षेत्रों में अत्यधिक निर्भरता देश के सामर्थ्य को सीमित कर सकती है।
उन्होंने मेक इन इंडिया, स्वदेशी और वोकल फॉर लोकल की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को केवल दुनिया का बड़ा बाजार नहीं बनना है, बल्कि दुनिया के लिए उत्पादन, तकनीक और नवाचार का केंद्र बनना है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था में चिप अत्यंत महत्वपूर्ण है। इलेक्ट्रॉनिक्स, चिकित्सा उपकरण, परिवहन और अनेक आधुनिक तकनीकों में सेमीकंडक्टर की भूमिका महत्वपूर्ण हो चुकी है। उन्होंने भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण को आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बताया और आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में और विस्तार की बात कही।
क्रिटिकल मिनरल और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक और उद्योगों के लिए क्रिटिकल मिनरल अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारत ने इस क्षेत्र में अपनी निर्भरता कम करने और रणनीतिक सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए हैं।
ऊर्जा सुरक्षा को भी प्रधानमंत्री ने विकसित भारत की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि AI, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और आधुनिक उद्योगों के विस्तार के साथ बिजली की मांग बढ़ेगी। इसलिए परमाणु ऊर्जा, सौर ऊर्जा और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को मजबूत करना जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखने और परमाणु क्षेत्र में नई तकनीकों के विस्तार की बात कही।
सौर ऊर्जा और पीएम सूर्यघर योजना
प्रधानमंत्री ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश में सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में पिछले वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उन्होंने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि लाखों घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। इससे परिवारों के बिजली खर्च को कम करने के साथ-साथ अतिरिक्त बिजली उत्पादन करने वाले परिवारों के लिए आय का अवसर भी बन रहा है।
रेलवे विद्युतीकरण और हाइड्रोजन ट्रेन
प्रधानमंत्री ने भारतीय रेलवे के विद्युतीकरण को देश की बदलती कार्य संस्कृति और गति का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि रेलवे विद्युतीकरण के क्षेत्र में भारत ने पिछले वर्षों में तेज गति से काम किया है।
उन्होंने हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन का भी उल्लेख किया और कहा कि भारत परिवहन के भविष्य की तकनीकों में अपनी क्षमता विकसित कर रहा है। ऊर्जा दक्षता, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक परिवहन व्यवस्था को विकसित भारत के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
वैश्विक संकटों के बीच आत्मनिर्भर भारत
प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी युद्ध एवं तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक संकटों का प्रभाव भारत पर भी पड़ा, लेकिन देश ने अपनी तैयारियों और आत्मनिर्भरता के कारण कठिन परिस्थितियों का सामना किया।
उन्होंने किसानों को खाद की उपलब्धता और कीमत के संदर्भ में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक बाजार में उर्वरक की कीमतों में वृद्धि के बावजूद भारतीय किसानों पर पूरा बोझ नहीं डाला गया।
भारत के उत्पाद दुनिया के बाजार तक पहुंचें
प्रधानमंत्री ने भारत और अन्य देशों के बीच हुए व्यापार समझौतों को भारतीय उद्योग और MSME क्षेत्र के लिए बड़ा अवसर बताया। उन्होंने कहा कि भारत के कपड़ा, मशीनरी, दवा, समुद्री उत्पाद और अन्य वस्तुओं को वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनानी होगी।
उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में सफल होने के लिए भारतीय उत्पादों को गुणवत्ता, लागत और उत्पादन क्षमता के अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरना होगा। प्रधानमंत्री ने उद्योग जगत से गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
विकसित भारत के लिए ‘सप्तधारा’ का आह्वान
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विकसित भारत के निर्माण के लिए सात प्रमुख शक्तियों या ‘सप्तधारा’ की चर्चा की। उन्होंने इन्हें भारत के अगले चरण के विकास का आधार बताया।
पहली शक्ति—मैन्युफैक्चरिंग: प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को छोटे-छोटे कंपोनेंट से लेकर बड़े उत्पाद तक पूरी वैल्यू चेन में आत्मनिर्भर बनना होगा। डिजाइन से लेकर उत्पादन तक भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का भरोसेमंद केंद्र बनाने पर जोर दिया गया।
दूसरी शक्ति—कृषि और फूड प्रोडक्शन: किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने, फूड प्रोसेसिंग बढ़ाने और पारंपरिक भारतीय खाद्य उत्पादों, मिलेट्स, मसालों, फल, फूल और अन्य कृषि उत्पादों को वैश्विक ब्रांड बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया गया।
तीसरी शक्ति—टेक्नोलॉजी और इनोवेशन: AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस, रोबोटिक्स, डेटा सेंटर और अगली पीढ़ी की संचार तकनीकों में भारत को नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की आवश्यकता बताई गई। प्रधानमंत्री ने मेड इन इंडिया 6G की दिशा में तेजी से काम करने की बात कही।
चौथी शक्ति—गति शक्ति: आधुनिक हाईवे, हाई-स्पीड रेल, एयरपोर्ट, इनलैंड वाटरवे और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स के विस्तार पर जोर दिया गया। बंदरगाहों को केवल सामान के आवागमन का केंद्र नहीं बल्कि आर्थिक विकास के इंजन के रूप में विकसित करने की बात कही गई।
पांचवीं शक्ति—रक्षा शक्ति: प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए आधुनिक रक्षा तकनीकों के विकास और भारत को वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थान दिलाने की आवश्यकता बताई।
छठी शक्ति—ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी: ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, ग्रीन मोबिलिटी, ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग, मत्स्य पालन, तटीय पर्यटन और समुद्री तकनीक को भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया गया।
सातवीं शक्ति—भारत की सॉफ्ट पावर: योग, आयुर्वेद, संस्कृति, हस्तशिल्प, फिल्म, एनीमेशन, VFX, गेमिंग, डिजिटल कंटेंट, पर्यटन और भारतीय जीवन पद्धति को दुनिया में भारत की पहचान मजबूत करने वाला माध्यम बताया गया।
भारत की कंपनियों को वैश्विक नेतृत्व की चुनौती
प्रधानमंत्री ने देश की कारोबारी और औद्योगिक क्षमता को नई ऊंचाई तक ले जाने की चुनौती देते हुए कहा कि आने वाले समय में दुनिया की बड़ी कंपनियों की सूची में भारत की अधिक से अधिक कंपनियां शामिल होनी चाहिए।
उन्होंने बैंकिंग, फार्मा, टेक्नोलॉजी, कंसल्टिंग, अकाउंटिंग और अन्य क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों को वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत के ब्रांड विश्व स्तर पर देश की पहचान बनें, यह लक्ष्य होना चाहिए।
युवा शक्ति को सबसे बड़ा लाभार्थी बताया
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत की यात्रा का सबसे बड़ा साधक और सबसे बड़ा लाभार्थी देश का युवा होगा। उन्होंने स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया और स्पेस सेक्टर में युवाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि देश में पंजीकृत स्टार्टअप्स की संख्या ढाई लाख से अधिक हो चुकी है और सरकार युवाओं को नवाचार के लिए संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।
AI के बढ़ते महत्व को देखते हुए प्रधानमंत्री ने लाल किले से घोषणा की कि आने वाले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को AI स्किल की ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं को AI की दुनिया में नेतृत्व करने के लिए तैयार करना समय की आवश्यकता है।
शिक्षा, विश्वविद्यालय और अटल टिंकरिंग लैब
प्रधानमंत्री ने उच्च शिक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में पिछले वर्षों में विश्वविद्यालयों और मेडिकल शिक्षा की क्षमता बढ़ी है। उन्होंने नई शिक्षा नीति को युवाओं की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
बच्चों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भावना विकसित करने के लिए अटल टिंकरिंग लैब का भी उल्लेख किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि बचपन से ही बच्चों को तकनीक और नवाचार से जोड़ना भविष्य के भारत के लिए जरूरी है।
खेलों में भारत की बढ़ती ताकत
प्रधानमंत्री ने ‘जो खेले, वह खिले’ के मंत्र के साथ खेलों को राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। उन्होंने खेल इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षण, पोषण, स्पोर्ट्स मेडिसिन और प्रतिभा खोज कार्यक्रमों की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने 2036 के ओलंपिक की मेजबानी के लिए भारत की दावेदारी का उल्लेख किया और कहा कि देश को उन खेल विधाओं पर भी ध्यान देना होगा जिनमें अभी भारत की भागीदारी कम है।
उन्होंने 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों में खेल प्रतिभा खोजने के लिए गांव-गांव, शहर-शहर और स्कूल स्तर पर टैलेंट हंट अभियान की आवश्यकता बताई।
नशामुक्त भारत का आह्वान
प्रधानमंत्री ने युवाओं के सामने बढ़ती नशे की चुनौती पर चिंता व्यक्त करते हुए नशामुक्त भारत को सामूहिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने परिवारों, सामाजिक संगठनों, NGOs और युवाओं से इस अभियान में भाग लेने का आह्वान किया।
नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई और सुरक्षित भारत
प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद और माओवाद को लंबे समय तक देश के विकास में बाधा डालने वाली चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में अब विकास, विश्वास और प्रयास की नई तस्वीर दिखाई दे रही है।
साथ ही उन्होंने आंतरिक सुरक्षा और बदलते युद्ध के स्वरूप का उल्लेख किया। साइबर सुरक्षा, डेटा सेंटर, बैंकिंग सिस्टम और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को आधुनिक राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा बताया गया।
प्रधानमंत्री ने आधुनिक नागरिक सुरक्षा व्यवस्था और सिविल डिफेंस के मजबूत नेटवर्क की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
महिला शक्ति को विकास की धुरी बताया
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की बेटियां आज फाइटर जेट, सिविल एविएशन, खेल, STEM शिक्षा और सेना सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी क्षमता साबित कर रही हैं।
उन्होंने लखपति दीदी अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने से बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने महिला नेतृत्व और राजनीतिक भागीदारी को भी मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया तथा संसद और विधानसभाओं में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की बात कही।
अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे विकास
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी सार्थक होगा, जब विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधा और आयुष्मान भारत जैसी व्यवस्थाओं का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को स्वास्थ्य खर्च से राहत दिलाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
जनगणना में युवाओं की भागीदारी का आह्वान
प्रधानमंत्री ने देश में चल रहे जनगणना कार्य का उल्लेख करते हुए युवाओं से सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सटीक आंकड़े बेहतर नीतियां बनाने और योजनाओं को सही दिशा देने में मदद करते हैं।
तकनीक के उपयोग पर जोर देते हुए उन्होंने नागरिकों से अपनी जानकारी सावधानीपूर्वक उपलब्ध कराने और डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने का आह्वान किया।
पंचप्रण और राष्ट्रहित का संदेश
अपने संबोधन के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री ने पंचप्रण का उल्लेख करते हुए गुलामी की मानसिकता से पूरी तरह मुक्त होने, भारतीय विरासत और गौरव पर विश्वास रखने तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।
उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस, डॉ. भीमराव आंबेडकर, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, भगवान बिरसा मुंडा और ज्योतिबा फुले सहित अनेक महापुरुषों के सपनों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने की बात कही।
प्रधानमंत्री ने कहा कि समय भारत का है, अवसर भारत का है और संकल्प भी भारत का है। उन्होंने देशवासियों से सपनों को संकल्प, संकल्प को सामर्थ्य और सामर्थ्य को सफलता में बदलने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि हर कदम विकास का कदम बने, देशवासी एक-दूसरे के साथ कदम से कदम और मन से मन मिलाकर आगे बढ़ें तथा 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी शक्ति से काम करें।
अंत में प्रधानमंत्री ने देशवासियों के साथ ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ के जयघोष के साथ अपना संबोधन समाप्त किया।
ग्रामीण भारत न्यूज के लिए संवाददाता विनोद चौहान की रिपोर्ट।





















