बिलासपुर। संवाददाता विनोद चौहान। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब 74 हजार शिक्षकों के लिए बीएड की योग्यता हासिल करने को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने आया है। नौकरी के साथ दो वर्षीय नियमित बीएड करना शिक्षकों के लिए व्यवहारिक रूप से कठिन होने के कारण अब एक वर्षीय बीएड ब्रिज कोर्स शुरू करने की मांग जोर पकड़ रही है। प्रस्ताव है कि यह ब्रिज कोर्स पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ के माध्यम से संचालित किया जाए, ताकि सेवारत शिक्षक बिना लंबी छुट्टी लिए अपनी आवश्यक शैक्षणिक योग्यता पूरी कर सकें।
शिक्षकों के संगठन की ओर से इस संबंध में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष प्रस्ताव रखा गया है। शिक्षा सचिव डा. कमलप्रीत सिंह और डीपीआई ऋतुराज रघुवंशी से चर्चा के बाद एससीईआरटी में अपर संचालक जेपी रथ की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा और योगेश सिंह ठाकुर ने एसोसिएशन की ओर से शिक्षकों की समस्याओं और प्रस्तावित ब्रिज कोर्स की आवश्यकता को विस्तार से रखा।
74 हजार शिक्षक हो सकते हैं लाभान्वित
प्रस्ताव के अनुसार प्रदेश में लगभग 74 हजार सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याता ऐसे हैं, जिन्हें बीएड योग्यता की आवश्यकता पड़ सकती है। विशेषकर पदोन्नति, सेवा संबंधी योग्यता और भविष्य की शैक्षणिक आवश्यकताओं को देखते हुए बीएड की डिग्री महत्वपूर्ण हो गई है।
शिक्षकों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में दो वर्षीय नियमित बीएड के लिए नौकरी से लंबी अवधि का अवकाश लेना अधिकांश सेवारत शिक्षकों के लिए संभव नहीं है। इससे स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है और स्वयं शिक्षकों के लिए भी आर्थिक एवं पारिवारिक कठिनाइयां पैदा होती हैं।
इसी समस्या को देखते हुए एक वर्षीय ब्रिज कोर्स का प्रस्ताव रखा गया है। इसके माध्यम से शिक्षक अपनी नौकरी जारी रखते हुए आवश्यक प्रशिक्षण और अध्ययन पूरा कर सकेंगे।
बिलासपुर संभाग में 17,600 संभावित लाभार्थी
प्रस्तावित व्यवस्था का लाभ प्रदेशभर के शिक्षकों को मिल सकता है। अकेले बिलासपुर संभाग में करीब 17,600 शिक्षक संभावित लाभार्थी बताए गए हैं। यदि योजना को मंजूरी मिलती है तो संभाग और जिले के शिक्षकों को अपने कार्यस्थल के नजदीक अध्ययन एवं प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा सकता है।
146 विकासखंडों में सुविधा केंद्र बनाने का सुझाव
शिक्षकों के संगठन ने प्रदेश के सभी 146 विकासखंडों में अध्ययन एवं सुविधा केंद्र स्थापित करने का सुझाव दिया है। प्रस्ताव के अनुसार प्रत्येक विकासखंड में लगभग पांच-पांच सुविधायुक्त हायर सेकेंडरी स्कूलों को अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।
प्रत्येक अध्ययन केंद्र में करीब 100 शिक्षकों को नामांकित करने का प्रस्ताव है। यहां बीएड प्रशिक्षित व्याख्याताओं या अनुभवी शिक्षकों को अंशकालिक शिक्षक के रूप में जिम्मेदारी देने की बात कही गई है।
इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों को बड़े शहरों या विश्वविद्यालय केंद्रों तक बार-बार जाने की जरूरत कम होगी।
वरिष्ठता के आधार पर प्रवेश का प्रस्ताव
ब्रिज कोर्स में प्रवेश को लेकर भी संगठन ने सुझाव दिया है कि सेवारत शिक्षकों को वरिष्ठता के आधार पर क्रमवार अवसर दिया जाए। इससे लंबे समय से सेवा कर रहे शिक्षकों को प्राथमिकता मिल सकेगी और प्रवेश प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता बनी रहेगी।
शिक्षकों का तर्क है कि एक साथ सभी पात्र शिक्षकों को प्रशिक्षण देना संभव नहीं होने की स्थिति में चरणबद्ध तरीके से प्रवेश दिया जा सकता है।
छुट्टियों में 20 दिन की अनिवार्य कक्षाएं
प्रस्तावित ब्रिज कोर्स में शिक्षकों की नियमित नौकरी को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक वर्ष अवकाश अवधि में 20 दिवसीय अनिवार्य संपर्क कक्षाएं आयोजित करने का सुझाव दिया गया है।
इसके अतिरिक्त आवश्यकता के अनुसार ऑनलाइन कक्षाओं की सुविधा उपलब्ध कराने का भी प्रस्ताव है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों में पदस्थ शिक्षक भी अध्ययन सामग्री और विशेषज्ञ शिक्षकों से आसानी से जुड़ सकेंगे।
शिक्षकों की मांग है कि विश्वविद्यालय की ओर से अध्ययन सामग्री निश्शुल्क अथवा न्यूनतम शुल्क पर उपलब्ध कराई जाए, जिससे सेवारत शिक्षकों पर अतिरिक्त आर्थिक भार न पड़े।
प्रैक्टिकल और शिक्षण अभ्यास पर भी जोर
बीएड केवल सैद्धांतिक अध्ययन तक सीमित नहीं है। इसलिए प्रस्ताव में शिक्षण अभ्यास, प्रैक्टिकल तथा आवश्यक प्रशिक्षण सामग्री विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। शिक्षकों को उनके कार्यक्षेत्र में ही व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की व्यवस्था तैयार करने का सुझाव दिया गया है।
प्रस्ताव के अनुसार यदि प्रत्येक सुविधा केंद्र को परीक्षा केंद्र के रूप में विकसित किया जाता है तो शिक्षकों को परीक्षा देने के लिए दूर-दराज के शहरों की यात्रा नहीं करनी पड़ेगी। इससे समय और यात्रा खर्च दोनों की बचत हो सकती है।
मुक्त विश्वविद्यालय को जिम्मेदारी देने की मांग
शिक्षकों के संगठन का कहना है कि पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ शासन के अधीन संचालित राज्य का प्रमुख मुक्त विश्वविद्यालय है और इससे प्राप्त पत्राचार बीएड डिग्री को भर्ती एवं पदोन्नति में उपयोगी माना जाता रहा है। इसी आधार पर संगठन ने प्रस्तावित ब्रिज कोर्स के संचालन की जिम्मेदारी इसी विश्वविद्यालय को देने की मांग की है।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करने से पहले संबंधित शैक्षणिक एवं नियामक प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक अनुमति और औपचारिक प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण
शिक्षक संगठन का मानना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षित और योग्य शिक्षकों की आवश्यकता है। ऐसे में लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को उनकी नौकरी प्रभावित किए बिना आवश्यक शैक्षणिक योग्यता उपलब्ध कराने की व्यवस्था शिक्षा व्यवस्था के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
ब्रिज कोर्स शुरू होने से एक ओर शिक्षकों को अपनी योग्यता बढ़ाने का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता भी बनी रह सकती है।
निर्णय का इंतजार
फिलहाल एक वर्षीय बीएड ब्रिज कोर्स का प्रस्ताव चर्चा और प्रक्रिया के स्तर पर है। इसे लागू करने के लिए शासन, शिक्षा विभाग, विश्वविद्यालय और संबंधित नियामक संस्थाओं की स्वीकृति आवश्यक होगी। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो प्रदेश के हजारों सेवारत शिक्षकों को नौकरी छोड़े बिना या लंबी अवधि का अवकाश लिए बिना बीएड योग्यता हासिल करने का अवसर मिल सकता है।
ग्रामीण भारत न्यूज के लिए — संवाददाता विनोद चौहान।





















