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### *वृक्षारोपण: गांव और देश के भविष्य की गारंटी*

*ग्रामीण भारत न्यूज | रायगढ़*
आज पर्यावरण का संकट सबसे बड़ा संकट बन गया है। गर्मी बढ़ रही है, बारिश अनियमित हो रही है, जमीन का पानी नीचे जा रहा है और बीमारियां बढ़ रही हैं। इन सब समस्याओं का एक ही समाधान है – *वृक्षारोपण*। पेड़ सिर्फ छाया नहीं देते, ये जीवन देते हैं।
ग्रामीण इलाकों में तो वृक्षारोपण का महत्व और भी ज्यादा है क्योंकि यहां की जिंदगी सीधे खेती, पानी और मिट्टी से जुड़ी है।
### *1. वृक्षारोपण क्यों जरूरी है?*
*ऑक्सीजन और शुद्ध हवा*: एक बड़ा पेड़ एक साल में लगभग 100 किलो ऑक्सीजन देता है और 20 किलो धूल-मिट्टी सोख लेता है। गांव में ट्रैक्टर, बाइक और फैक्ट्रियों का धुआं बढ़ रहा है। पेड़ ही उस जहरीली हवा को साफ करेंगे।
*बारिश और भूजल*: पेड़ बादलों को अपनी तरफ खींचते हैं। जहां ज्यादा पेड़ होते हैं वहां बारिश समय पर होती है। पेड़ों की जड़ें पानी को जमीन में रोकती हैं जिससे कुएं, बोर और तालाब सूखते नहीं। छत्तीसगढ़ के कई गांवों में गर्मी में पानी की किल्लत इसी वजह से है कि पेड़ कट गए।
*मिट्टी का कटाव रुकेगा*: तेज बारिश में बिना पेड़ वाली जमीन की उपजाऊ मिट्टी बह जाती है। पेड़ों की जड़ें मिट्टी को जकड़ कर रखती हैं। इससे खेतों की उर्वरा शक्ति बनी रहती है।
*तापमान नियंत्रित होगा*: पेड़ प्राकृतिक कूलर हैं। 10 पेड़ों वाला इलाका 3 से 4 डिग्री तक ठंडा रहता है। लू और हीटवेव से बचाव का सबसे सस्ता तरीका पेड़ लगाना ही है।
*आजीविका का साधन*: आम, अमरूद, नीम, सागौन, बांस जैसे पेड़ गांव के लोगों को फल, लकड़ी, दवा और रोजगार देते हैं। एक पेड़ 50 साल तक परिवार को सहारा दे सकता है।
### *2. गांव में कहां-कहां पेड़ लगाए जा सकते हैं?*
वृक्षारोपण के लिए जंगल की जरूरत नहीं। गांव की हर खाली जगह काम आ सकती है:
1. *खेत की मेड़ पर*: नीम, करंज, शीशम के पेड़ लगाएं। ये फसल को आंधी से बचाएंगे और अतिरिक्त आय भी देंगे।
2. *स्कूल और पंचायत भवन*: बरगद, पीपल, आम लगाएं। बच्चे छाया में खेलेंगे और पर्यावरण सीखेंगे।
3. *तालाब और नदी किनारे*: बांस और अर्जुन के पेड़। ये पानी को साफ रखते हैं और किनारे को मजबूत करते हैं।
4. *सड़क और गली के किनारे*: गुलमोहर, अमलतास। गांव सुंदर भी लगेगा और राहगीरों को छाया भी मिलेगी।
5. *घर के आंगन में*: तुलसी, नीम, सहजन। दवा भी और पूजा भी।
### *3. कौन से पेड़ लगाएं?*
हर जगह एक जैसे पेड़ नहीं लगते। छत्तीसगढ़ की मिट्टी के लिए ये पेड़ सबसे अच्छे हैं:
*फलदार*: आम, जामुन, अमरूद, बेल, आंवला। ये पोषण भी देंगे और बेचने पर पैसा भी।
*छायादार*: पीपल, बरगद, नीम। 100 साल तक छाया देंगे और धार्मिक महत्व भी है।
*आय वाले*: सागौन, शीशम, महुआ, बांस। 8-10 साल में अच्छी कमाई।
*औषधीय*: अर्जुन, हर्रा, बहेड़ा, गिलोय। गांव की दवाखाना यही हैं।
सरकार की “नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी” योजना के तहत भी गांवों में फलदार और औषधीय पौधे फ्री मिल रहे हैं। पंचायत से संपर्क करें।
### *4. वृक्षारोपण के बाद देखभाल जरूरी है*
सिर्फ लगा देना काफी नहीं। 3 साल तक देखभाल करना पड़ेगा।
*पहला नियम*: एक पेड़ लगाओ तो 4 लोगों को जिम्मेदारी दो। स्कूल, महिला समूह, युवा मंडल।
*दूसरा नियम*: गर्मी में हफ्ते में 2 बार पानी दो। चारों तरफ घेराव कर दो ताकि जानवर न खाएं।
*तीसरा नियम*: देसी प्रजाति के पौधे लगाओ। विदेशी पौधे जल्दी मर जाते हैं।
रायगढ़ जिले में कई गांवों ने “एक व्यक्ति एक पेड़” अभियान चलाया। नतीजा – 2 साल में गांव 2 डिग्री ठंडा हो गया।
### *5. सरकार और समाज की भूमिका*
*सरकार*: मनरेगा के तहत वृक्षारोपण पर मजदूरी मिलती है। वन विभाग निशुल्क पौधे देता है। “हरियर छत्तीसगढ़” योजना का लाभ लें।
*पंचायत*: हर गांव में “हरियाली समिति” बने। स्कूल के बच्चों को पौधे गोद दें।
*हम और आप*: अपने जन्मदिन, शादी, किसी की याद में एक पेड़ लगाएं। सोशल मीडिया पर फोटो डालकर 10 लोगों को चैलेंज करें।
### *निष्कर्ष*
हमारे दादा-दादी ने पेड़ लगाए इसलिए आज हमें फल मिल रहा है। अगर हम आज पेड़ नहीं लगाएंगे तो हमारी आने वाली पीढ़ी को सिर्फ गर्मी, बाढ़ और बीमारी मिलेगी।
वृक्षारोपण कोई सरकारी योजना नहीं, ये जीवन यज्ञ है। एक पेड़ 10 लोगों को जिंदगी देता है। सोचो अगर रायगढ़ का हर व्यक्ति साल में 2 पेड़ लगा दे तो 4 लाख नए पेड़।
आज ही संकल्प लें। “पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ”। क्योंकि धरती हमारी है और इसे हरा-भरा रखना हमारी जिम्मेदारी है।
*संवाददाता: ग्रामीण भारत न्यूज टीम*
*रायगढ़, छत्तीसगढ़*।





















