ग्रामीण भारत न्यूज विशेष रिपोर्ट
रिपोर्टिंग: अतुल अग्निहोत्री, विशेष संवाददाता प्रसारण: ग्रामीण भारत न्यूज
नमस्कार, आप पढ़ रहे हैं ग्रामीण भारत न्यूज और मैं हूँ आपका अपना संवाददाता, अतुल अग्निहोत्री। आज हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के मौसम की, जो हमारे किसान भाइयों और आम जनता के लिए सबसे अहम मुद्दा है। सावन का महीना इस बार राजधानी रायपुर और उसके आसपास के इलाकों के लिए झमाझम बारिश की सौगात लेकर आया। लेकिन, मौसम विभाग के ताजा अपडेट के अनुसार, अब मानसून की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। जुलाई के महीने में जहां बादलों ने जमकर मेहरबानी दिखाई, वहीं अब अगस्त की शुरुआत के साथ ही उमस और चिपचिपी गर्मी लोगों की परेशानी बढ़ाने वाली है। आइए, मौसम के इस बदलते मिजाज और पूरे प्रदेश के आंकड़ों को विस्तार से समझते हैं।
रायपुर में टूटे बारिश के पुराने रिकॉर्ड
राजधानी रायपुर के लिए जुलाई का महीना ऐतिहासिक रहा है। लगातार और भारी वर्षा ने शहर में बारिश के कई नए रिकॉर्ड कायम कर दिए हैं।
- आंकड़ों की जुबानी: मौसम विभाग (IMD) द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों पर अगर हम गौर करें, तो एक जून से लेकर 31 जुलाई तक रायपुर में कुल 625 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है।
- सामान्य से काफी ज्यादा: अमूमन इस अवधि के दौरान रायपुर में सामान्य वर्षा का स्तर 494.9 मिलीमीटर माना जाता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि राजधानी में इस बार सामान्य से 26 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है।
- बंगाल की खाड़ी का असर: जुलाई के अंतिम दिनों में पश्चिम बंगाल के ऊपर एक गहरा अवदाब (Deep Depression) बना था। इसी मजबूत वेदर सिस्टम के प्रभाव से रायपुर सहित प्रदेश के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश हुई। हालांकि, इसके कारण कई निचले इलाकों में भारी जलभराव की स्थिति पैदा हो गई और आम जनजीवन के साथ-साथ यातायात भी बुरी तरह प्रभावित रहा।
प्रदेश में वर्षा का असमान वितरण: कहीं राहत, कहीं सूखा
छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है और यहां की खेती मुख्य रूप से मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। लेकिन इस बार मानसून की मेहरबानी पूरे प्रदेश में एक समान नहीं रही है। जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो भारी असमानता देखने को मिलती है:
इन जिलों में हुई छप्पर फाड़ बारिश:
- नारायणपुर: यहां बादलों ने सबसे ज्यादा दरियादिली दिखाई है। जिले में सर्वाधिक 979.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 65 प्रतिशत अधिक है।
- सारंगढ़-बिलाईगढ़: इस जिले में भी सामान्य से 70 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है।
- अन्य जिले: इसके अलावा जांजगीर-चांपा में सामान्य से 42 प्रतिशत, महासमुंद में 41 प्रतिशत और गरियाबंद में 35 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है। इन इलाकों में धान की रोपाई और किसानी के कामों को काफी गति मिली है।
यहां तरस गए खेत (बारिश में कमी): एक तरफ जहां कई जिले पानी से सराबोर हैं, वहीं प्रदेश के कुछ जिले ऐसे भी हैं जहां बारिश न होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं:
- सरगुजा: यहां सामान्य से 51 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जो खेती के लिहाज से एक बड़ा संकट है।
- जशपुर और बेमेतरा: जशपुर में 46 प्रतिशत और बेमेतरा में 38 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।
प्रदेश का कुल औसत: अगर पूरे छत्तीसगढ़ राज्य की कुल औसत मौसमी वर्षा की बात करें, तो यह 560.5 मिलीमीटर रही है। यह आंकड़ा सामान्य वर्षा (569 मिलीमीटर) की तुलना में केवल एक प्रतिशत कम है। यानी, कागजों पर प्रदेश की कुल स्थिति भले ही ‘सामान्य’ नजर आ रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत में जिलों के बीच भारी असमानता है।
क्यों कमजोर पड़ रहा है मानसून?
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, मानसून की गतिविधियों में अचानक आई इस कमी के पीछे मुख्य कारण मौसम प्रणालियों (वेदर सिस्टम) में हुआ बदलाव है। वर्तमान में पश्चिम विदर्भ और दक्षिणी मध्य प्रदेश के ऊपर जो अवदाब तंत्र (Depression System) बना हुआ था और जो मानसून द्रोणिका (Monsoon Trough) सक्रिय थी, उसकी स्थिति में अब बदलाव आ गया है। इस परिवर्तन के सीधे परिणाम स्वरूप पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में बारिश की तीव्रता में भारी कमी आने की संभावना है।
अगले 48 घंटों का पूर्वानुमान और किसानों के लिए अलर्ट
- कैसा रहेगा मौसम: अगले दो दिनों तक प्रदेश के कुछ चुनिंदा स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है।
- बिजली गिरने की आशंका: मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने की प्रबल आशंका है। ग्रामीण भारत न्यूज अपने सभी दर्शक और पाठक किसान भाइयों से अपील करता है कि खराब मौसम में खेतों में काम करते समय सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों के नीचे शरण लेने से बचें।
- बीते 24 घंटों का हाल: पिछले 24 घंटों की बात करें तो बस्तर और दुर्ग संभाग में सबसे ज्यादा बादल बरसे हैं। इसमें भी सबसे प्रमुख रूप से बीजापुर जिले में सर्वाधिक 11 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है।
रायपुर का मौजूदा हाल: सताएगी चिपचिपी गर्मी
राजधानी रायपुर और इसके आसपास के ग्रामीण इलाकों की बात करें, तो आगामी दिनों में आसमान में आंशिक रूप से बादलों का डेरा बना रहेगा। हालांकि, बारिश की संभावना केवल छिटपुट गरज-चमक तक ही सीमित रहेगी। दिनभर बादल छाए रहने और वातावरण में नमी (Humidity) का स्तर अत्यधिक होने के कारण, अब लोगों को तेज उमस और असहनीय ‘चिपचिपी गर्मी’ का सामना करना पड़ेगा। यह मौसम स्वास्थ्य के लिए भी संवेदनशील हो सकता है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।
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– अतुल अग्निहोत्री, संवाददाता (ग्रामीण भारत न्यूज के लिए विशेष रिपोर्ट)





















