विशेष रिपोर्ट: विनिता चौहान संवाददाता, ग्रामीण भारत न्यूज़ स्थान: रायगढ़, छत्तीसगढ़
रायगढ़ जिले के तमनार थाना क्षेत्र में हुए एक खौफनाक दोहरे हत्याकांड के मामले में आखिरकार न्याय की जीत हुई है। विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, रायगढ़ के न्यायालय ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाते हुए इस जघन्य हत्याकांड में शामिल चार आरोपियों को दोषसिद्ध करार दिया है। सभी चारों दोषियों को दो-दो आजीवन कारावास और अर्थदंड की सख्त सजा सुनाई गई है। ‘ग्रामीण भारत न्यूज़’ की इस विस्तृत रिपोर्ट में जानिए कैसे पुलिस की वैज्ञानिक विवेचना और अभियोजन की दमदार पैरवी ने इन अपराधियों को सलाखों के पीछे उनके अंतिम अंजाम तक पहुंचाया।
क्या थी घटना की खौफनाक रात? (वारदात का पूरा विवरण)
यह रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना दिनांक 19 जुलाई 2023 की है। रात के लगभग 10:30 बजे थे, जब तमनार थाना क्षेत्र के ग्राम गोढ़ी में पुरानी रंजिश ने एक खूनी षड्यंत्र का रूप ले लिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने एक पूर्व नियोजित और सुनियोजित साजिश के तहत अनुसूचित जनजाति वर्ग से ताल्लुक रखने वाले दो व्यक्तियों— राघुवन चौहान और उद्धव चौहान को अपना शिकार बनाया। दरिंदगी की हदें पार करते हुए आरोपियों ने दोनों पीड़ितों पर टांगी (कुल्हाड़ी), डंडे और अन्य घातक व कठोर हथियारों से जानलेवा हमला कर दिया। इस बर्बर हमले में राघुवन और उद्धव दोनों की मौके पर ही दर्दनाक मृत्यु हो गई।
आरोपियों का दुस्साहस यहीं नहीं रुका। हत्या के इस जघन्य अपराध को अंजाम देने के बाद, पुलिस को गुमराह करने और साक्ष्य मिटाने के कुत्सित उद्देश्य से उन्होंने एक मृतक के खून से लथपथ शव को मुख्य सड़क तक घसीटा, ताकि इस निर्मम हत्या को एक सामान्य सड़क दुर्घटना का रूप दिया जा सके।
रायगढ़ पुलिस की त्वरित कार्रवाई और वैज्ञानिक विवेचना
इस दोहरे हत्याकांड की सूचना मिलते ही तमनार थाना पुलिस हरकत में आई और तत्काल अपराध क्रमांक 268/2023 दर्ज कर सघन विवेचना शुरू कर दी।
- प्रारंभिक जांच: मामले की शुरुआती विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी तमनार, निरीक्षक आशीर्वाद राहटगांवकर द्वारा की गई। उन्होंने घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण किया, साक्ष्य जुटाए और संदेही आरोपियों को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की। मेमोरेंडम के आधार पर हत्या में प्रयुक्त घातक हथियारों और अन्य अहम सुरागों की बरामदगी की गई।
- अग्रिम अनुसंधान: चूंकि मामला अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के पीड़ितों से जुड़ा था, इसलिए अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत प्रकरण की आगे की विवेचना तत्कालीन एसडीओपी धरमजयगढ़, श्री दीपक मिश्रा द्वारा की गई।
- मजबूत चार्जशीट: श्री मिश्रा ने मामले के चश्मदीद गवाहों के बयान धारा 164 के तहत न्यायालय में दर्ज कराए। इसके अलावा फरार आरोपियों की गिरफ्तारी, जाति प्रमाण पत्र से जुड़े साक्ष्यों का संकलन और वैज्ञानिक व तकनीकी प्रमाणों को जोड़ते हुए एक अत्यंत सुदृढ़ और त्रुटिहीन अभियोग पत्र (चार्जशीट) तैयार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।
अभियोजन की सशक्त पैरवी: गवाहों और सबूतों का चक्रव्यूह
न्यायालयीन प्रक्रिया के दौरान राज्य शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्री राजीव बेरीवाल ने मोर्चा संभाला। उन्होंने न्यायालय में बेहद प्रभावी और तर्कपूर्ण पैरवी की।
बचाव पक्ष की तमाम दलीलों को ध्वस्त करने के लिए अभियोजन पक्ष द्वारा 22 गवाहों को कटघरे में प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही 81 महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य और 20 भौतिक साक्ष्य (Articles/Exhibits) न्यायालय के समक्ष रखे गए, जिसने आरोपियों के खिलाफ अपराध को संदेह से परे सिद्ध कर दिया।
न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला और सजा
दिनांक 31 जुलाई 2026 को विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, रायगढ़ (पीठासीन अधिकारी श्रीमती शोभना कोष्ठा) की अदालत ने इस प्रकरण में अपना अंतिम और महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया।
प्रस्तुत किए गए अकाट्य साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने चारों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302/120-बी (हत्या और आपराधिक षड्यंत्र), 201/120-बी (साक्ष्य मिटाना) तथा एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(v) के तहत पूर्ण रूप से दोषी ठहराया। न्याय की नजीर पेश करते हुए प्रत्येक आरोपी को दो-दो आजीवन कारावास की सजा और जुर्माने (अर्थदंड) से दंडित किया गया है।
आजीवन कारावास की सजा पाने वाले दोषियों के नाम:
- हरिलाल उराँव (पिता- ननकी दाऊ उराँव, उम्र- 33 वर्ष)
- मुकेश पडिहारी (पिता- स्व० बासुदेव पडिहारी, उम्र- 41 वर्ष)
- जितेन्द्र पटनायक उर्फ जीतू (पिता- स्व० गोपाल पटनायक, उम्र- 34 वर्ष)
- गणेश पडिहारी (पिता- स्व० बासुदेव पडिहारी, उम्र- 35 वर्ष)
(सभी दोषी ग्राम गोढ़ी, थाना-तमनार, जिला रायगढ़, छत्तीसगढ़ के निवासी हैं।)
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) का स्पष्ट संदेश
इस बड़ी सफलता के पीछे रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) श्री शशि मोहन सिंह के कुशल दिशा-निर्देशन की भी अहम भूमिका रही है। उन्होंने जिले के सभी विवेचना अधिकारियों को यह सख्त निर्देश दे रखा है कि किसी भी गंभीर अपराध की विवेचना पूरी तरह से वैज्ञानिक, त्रुटिहीन और तथ्यपरक तरीके से की जाए, ताकि न्यायालय में अपराधियों को बचने का कोई रास्ता न मिले।
इसके अतिरिक्त, अदालती प्रक्रिया में देरी से बचने के लिए जिले में समन और वारंट की समयबद्ध तामिली पर विशेष जोर दिया जा रहा है। तमनार के इस दोहरे हत्याकांड में भी पुलिस ने साक्ष्यों के संकलन के साथ-साथ न्यायालयीन वारंटों की शत-प्रतिशत तामिली सुनिश्चित की, जिसके परिणामस्वरूप इस जटिल मामले का इतनी जल्दी और सफलतापूर्वक निपटारा हो सका।
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