ग्रामीण भारत न्यूज विशेष रिपोर्प –
रिपोर्टिंग: विनिता चौहान, संवाददाता — ग्रामीण भारत न्यूज स्थान: रायगढ़, छत्तीसगढ़
रायगढ़। मानसून की पहली फुहारें जहां एक ओर किसानों के लिए नई उम्मीदें लेकर आती हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के ग्रामीण इलाकों में यह बारिश अपने साथ खौफ का मंजर भी लेकर आई है। जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल और उसके आस-पास के क्षेत्रों में मानसून की शुरुआत के साथ ही जंगली हाथियों (गजराज) का आतंक अपने चरम पर पहुंच गया है। ‘ग्रामीण भारत न्यूज’ की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, भोजन की तलाश में घने जंगलों से निकलकर रिहायशी इलाकों और खेतों की ओर रुख कर रहे इन विशालकाय हाथियों ने पूरे इलाके में कोहराम मचा रखा है। हालात यह हैं कि ग्रामीणों की रातों की नींद और दिन का चैन पूरी तरह से छिन गया है।
महज तीन दिनों में भारी तबाही, 83 किसानों की मेहनत पर फिरा पानी वन्यजीव और मानव संघर्ष की यह तस्वीर बेहद डरावनी है। बीते मात्र तीन दिनों के भीतर हाथियों के अलग-अलग दलों ने जमकर उत्पात मचाया है। प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस छोटी सी अवधि में हाथियों ने 6 पक्के व कच्चे मकानों, एक झोपड़ी और एक अहाते को पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया है। इसके अलावा एक ट्रैक्टर को भी भारी नुकसान पहुंचाया गया है। सबसे बड़ा आघात क्षेत्र के अन्नदाताओं पर लगा है। हाथियों के झुंड ने खेतों में घुसकर 83 किसानों की लहलहाती फसलों को पूरी तरह से रौंद डाला है। महीनों की खून-पसीने की मेहनत चंद घंटों में हाथियों के पैरों तले कुचल दी गई है, जिससे किसानों के सामने रोजी-रोटी का गहरा संकट खड़ा हो गया है।
124 हाथियों का दल कर रहा है विचरण, जानिए कहां कितने हाथी हैं मौजूद धरमजयगढ़ वन मंडल वर्तमान में हाथियों का एक बड़ा रहवास केंद्र बन चुका है। वन विभाग के अद्यतन आंकड़ों के मुताबिक, इस पूरे वन मंडल क्षेत्र में इस समय कुल 124 जंगली हाथी अलग-अलग टुकड़ियों में बंटकर लगातार विचरण कर रहे हैं। इन 124 हाथियों के दल में 35 नर हाथी, 57 मादा हाथी और 32 छोटे शावक शामिल हैं। शावकों की मौजूदगी के कारण हाथियों का यह दल और भी अधिक आक्रामक और संवेदनशील हो जाता है।
ग्रामीण भारत न्यूज को मिली जानकारी के अनुसार, हाथियों का वन परिक्षेत्र (रेंज) वार वितरण इस प्रकार है:
- लैलूंगा रेंज: यहां सबसे बड़ा 51 हाथियों का दल तीन अलग-अलग बीटों में सक्रिय है, जिसने ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ा रखी हैं।
- कापू रेंज: इस क्षेत्र में 29 हाथियों का दल लगातार घूम रहा है।
- बोरो रेंज: यहां 23 हाथियों की मौजूदगी दर्ज की गई है।
- धरमजयगढ़ रेंज: इस परिक्षेत्र में 15 हाथी डटे हुए हैं।
- छाल रेंज: यहां 5 हाथियों का दल विचरण कर रहा है।
- बाकारूमा क्षेत्र: इस इलाके में 1 अकेला हाथी घूम रहा है (अकेले हाथी अक्सर अधिक खतरनाक माने जाते हैं)।
हाथियों की इतनी बड़ी संख्या में लगातार मौजूदगी ने दर्जनों गांवों को दहशत के साए में धकेल दिया है।
ग्रामीणों का दर्द: “हर पल सताता है जान और माल का खौफ” गांव वालों का कहना है कि बारिश के मौसम में खेतों में धान की रोपाई और लहलहाती फसल की महक हाथियों को चुंबक की तरह अपनी ओर खींचती है। भोजन की तलाश में जब हाथी जंगल की सीमाओं को लांघकर गांवों के करीब पहुंचते हैं, तो वे न केवल फसलों को खाते और रौंदते हैं, बल्कि रास्ते में आने वाले कच्चे-पक्के मकानों को भी ताश के पत्तों की तरह ढहा देते हैं। ग्रामीणों ने ग्रामीण भारत न्यूज की संवाददाता से अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि, “शाम ढलते ही पूरे गांव में सन्नाटा पसर जाता है। रतजगा करके हमें अपने घरों और परिवारों की रखवाली करनी पड़ती है। आर्थिक नुकसान तो हो ही रहा है, लेकिन अब हर समय जान जाने का खतरा सिर पर मंडराता रहता है।”
वन विभाग अलर्ट मोड पर: मुआवजे की प्रक्रिया और सुरक्षा के उपाय तेज हाथियों के बढ़ते इस कहर को देखते हुए वन विभाग का अमला भी पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है। विभाग की टीम प्रभावित क्षेत्रों में जाकर क्षतिग्रस्त मकानों और बर्बाद हुई फसलों का विस्तृत सर्वे कर रही है ताकि नुकसान का सटीक आंकलन कर प्रभावित किसानों और ग्रामीणों को नियमानुसार जल्द से जल्द उचित मुआवजा प्रदान किया जा सके।
इसके साथ ही, हाथी प्रभावित सभी गांवों में वन विभाग ने सतर्कता कड़ी कर दी है। वनकर्मियों की टीम के साथ-साथ ‘हाथी मित्र दल’ के सदस्य लगातार गांव-गांव जाकर मुनादी (घोषणा) कर रहे हैं। ग्रामीणों को हाथियों के मूवमेंट (गतिविधि) की पल-पल की जानकारी दी जा रही है।
प्रशासन की अपील: वन विभाग ने आम जनता से अपील की है कि रात के समय जंगल या खेतों की तरफ अकेले बिल्कुल न जाएं। यदि हाथी दिखाई दें तो उन्हें भगाने के लिए किसी भी तरह की छेड़छाड़ न करें, बल्कि उनसे एक सुरक्षित दूरी बनाए रखें। किसी भी स्थान पर हाथी के देखे जाने पर तुरंत वन विभाग या हाथी मित्र दल को इसकी सूचना दें ताकि समय रहते किसी भी प्रकार की जनहानि को रोका जा सके।
मानव-हाथी द्वंद्व का यह मामला अब रायगढ़ जिले के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। अब देखना यह है कि प्रशासन और वन विभाग मिलकर किस प्रकार ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं और किसानों के हुए इस भारी नुकसान की भरपाई कब तक हो पाती है।
— विनिता चौहान, संवाददाता, ग्रामीण भारत न्यूज





















