ग्रामीण भारत न्यूज विशेष रिपोर्ट
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)। त्योहारों का मौसम जहां एक तरफ घरों में खुशियां और उल्लास लेकर आता है, वहीं दूसरी तरफ गरीब और मजदूर वर्ग के लिए यह कई बार गहरी चिंता और अवसाद का कारण भी बन जाता है। महंगाई के इस दौर में अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष कर रहे एक श्रमिक परिवार की कहानी का ऐसा दर्दनाक अंत हुआ है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। बिलासपुर के सिरगिट्टी इलाके में रक्षाबंधन के त्योहार के लिए 10 हजार रुपये की मांग को लेकर पति-पत्नी के बीच ऐसा विवाद हुआ कि दोनों ने एक ही साड़ी का फंदा बनाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। इस हृदयविदारक घटना के बाद पीछे छूट गए हैं तो सिर्फ उनके दो रोते-बिलखते मासूम बच्चे, जिनकी दुनिया रातों-रात उजड़ गई।
बेहतर भविष्य की तलाश में मध्य प्रदेश से आए थे बिलासपुर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान 35 वर्षीय रमेश सिंह बंजारा और उनकी 30 वर्षीय पत्नी माया बंजारे के रूप में हुई है। यह परिवार मूल रूप से मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम जामकछार का रहने वाला था। गांव में रोजगार के अभाव और परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने की उम्मीद में रमेश कुछ साल पहले अपनी पत्नी माया और दो छोटे बच्चों के साथ छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर आ गया था। यहां वह सिरगिट्टी थाना क्षेत्र के नयापारा इलाके में एक छोटा सा मकान किराए पर लेकर रह रहा था।
रमेश एक स्थानीय फैक्ट्री में मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालता था। उनकी एक छोटी बेटी है जो चौथी कक्षा में पढ़ाई कर रही है, और एक उससे भी छोटा बेटा है। रोजी-मजदूरी से मिलने वाले चंद रुपयों से किसी तरह परिवार का गुजर-बसर हो रहा था, लेकिन बढ़ती महंगाई और सीमित आय के कारण परिवार अक्सर आर्थिक तंगी से जूझता रहता था।
त्योहार की मांग और मजबूरी की टकराहट
पड़ोसियों और पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, आर्थिक अभाव के चलते पति-पत्नी के बीच अक्सर छोटी-छोटी घरेलू जरूरतों को लेकर नोकझोंक होती रहती थी। आगामी रक्षाबंधन के त्योहार को देखते हुए सोमवार की रात पत्नी माया ने अपने पति रमेश से मायके जाने और त्योहार की तैयारियों के लिए 10 हजार रुपये की मांग की।
एक दिहाड़ी मजदूर के लिए अचानक 10 हजार रुपये की व्यवस्था करना किसी पहाड़ तोड़ने से कम नहीं था। रमेश ने अपनी लाचारी जताते हुए इतने रुपयों का इंतजाम तत्काल न हो पाने की बात कही। रुपयों की इसी मांग और मजबूरी को लेकर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जिसने जल्द ही एक बड़े विवाद का रूप ले लिया। रात गहराने पर विवाद शांत हुआ और दोनों बच्चों को सुलाकर पति-पत्नी भी सोने चले गए। बच्चों को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि कल की सुबह वे अपने माता-पिता को जिंदा नहीं देख पाएंगे।
मंगलवार की मनहूस सुबह और वह खौफनाक मंजर
मंगलवार की सुबह जब दोनों मासूम बच्चों की नींद खुली, तो उन्होंने कमरे में जो मंजर देखा, वह उनकी रूह कंपा देने वाला था। उनके माता-पिता एक ही साड़ी से बनाए गए फांसी के फंदे पर एक साथ झूल रहे थे। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर आस-पड़ोस के लोग दौड़कर वहां पहुंचे। कमरे का दृश्य देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं और पूरे मोहल्ले में मातम पसर गया।
मोहल्लेवासियों ने तत्काल घटना की सूचना सिरगिट्टी पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और पंचनामा की कार्रवाई शुरू की।
पुलिस की कार्रवाई और स्वजनों का विलाप
सिरगिट्टी पुलिस ने शवों को फंदे से उतारकर अपने कब्जे में लिया और मध्य प्रदेश में रहने वाले रमेश के परिजनों को इस अनहोनी की सूचना दी। खबर मिलते ही मंगलवार दोपहर तक रमेश के परिजन भी रोते-बिलखते बिलासपुर पहुंच गए।
पुलिस ने परिजनों की मौजूदगी में सहमे हुए बच्चों से भी घटना के संबंध में जानकारी ली। बच्चों और परिजनों के बयानों से यह स्पष्ट हो गया कि आर्थिक तंगी और 10 हजार रुपये के विवाद ने ही इस हंसते-खेलते परिवार को निगल लिया।
पोस्टमार्टम के बाद गांव लौटा शव
पुलिस ने वैधानिक औपचारिकताएं पूरी करते हुए दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस ने शवों को अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया है। परिजन दोनों के शवों को लेकर अपने पैतृक गांव (मध्य प्रदेश) रवाना हो गए हैं, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
समाज के लिए एक बड़ा सवाल
यह घटना सिर्फ एक परिवार की आत्महत्या नहीं है, बल्कि उस खोखली व्यवस्था और बढ़ती महंगाई पर एक करारा तमाचा है, जहां एक गरीब आदमी त्योहार की खुशियां तो दूर, अपनी पत्नी की एक छोटी सी मांग पूरी न कर पाने की ग्लानि में मौत को गले लगा लेता है। अब सबसे बड़ा सवाल उन दो मासूम बच्चों के भविष्य का है, जो अचानक अनाथ हो गए हैं। फिलहाल रिश्तेदार बच्चों को अपने साथ ले गए हैं, लेकिन उनके सिर से माता-पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है।
संवाददाता – विनिता चौहान ग्रामीण भारत न्यूज





















