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मुनगा प्रोसेसिंग प्लांट के नाम पर आदिवासियों के हक पर डाका, धरातल पर काम शून्य और उड़ गए सवा करोड़!

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ग्रामीण भारत न्यूज (विशेष रिपोर्ट) संवाददाता: विनिता स्थान: घरघोड़ा, रायगढ़ (छत्तीसगढ़)

सरकारी तंत्र में योजनाओं के नाम पर किस तरह जनता और खासकर आदिवासियों के पैसे की खुलेआम बर्बादी होती है, इसका एक जीता-जागता और शर्मनाक उदाहरण रायगढ़ जिले के घरघोड़ा ब्लॉक में देखने को मिला है। ग्रामीण भारत न्यूज की इस विशेष पड़ताल में यह बात सामने आई है कि आदिवासियों के उत्थान और उन्हें रोजगार मुहैया कराने के लिए लाई गई एक महत्वाकांक्षी योजना भ्रष्टाचार और विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ गई। घरघोड़ा में बनने वाला ‘मुनगा (सहजन) प्रोसेसिंग प्लांट’ केवल कागजों और अधिकारियों के दिवास्वप्न तक ही सीमित रह गया है।

हालत यह है कि बिना कोई ठोस काम किए, बिना कोई प्लांट लगाए ही लगभग सवा करोड़ रुपए (1.19 करोड़) खर्च कर दिए गए। जब इस पूरे गोलमाल पर पर्दा डालना मुश्किल हो गया, तो बचे हुए 81 लाख रुपए चुपचाप वापस कर दिए गए, जिसने इस पूरे महाघोटाले की पोल खोल दी।

योजना का उद्देश्य: एक सुनहरा सपना जो कभी सच नहीं हुआ

रायगढ़ जिले के पांच प्रमुख आदिवासी विकासखंडों— धरमजयगढ़, घरघोड़ा, तमनार, लैलूंगा और खरसिया— में निवासरत ग्रामीण और आदिवासी जनता के लिए यह एक बहुत बड़ी सौगात थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में मुनगा (सहजन) की खेती को बढ़ावा देना, उससे पौष्टिक आहार तैयार करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करना था।

इस नेक काम के लिए केंद्र सरकार की विशेष केंद्रीय सहायता के तहत आदिम जाति कल्याण विभाग (आजाक) ने परियोजना मद से पूरे 2 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि मंजूर की थी। इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने की पूरी जिम्मेदारी उद्यानिकी विभाग को सौंपी गई थी। योजना के अनुसार, इस 2 करोड़ रुपए में से 1.15 करोड़ रुपए की आधुनिक मशीनरी खरीदी जानी थी और 85 लाख रुपए की लागत से एक औद्योगिक शेड (बिल्डिंग) का निर्माण किया जाना था। लेकिन, ग्रामीणों को क्या पता था कि उनके नाम पर आया यह पैसा विभागीय भ्रष्टाचार की गहरी खाई में समाने वाला है।

भ्रष्टाचार की नींव: कंसल्टेंसी और ठेकेदार की संदिग्ध ‘एंट्री’

विभागीय नियमों को ताक पर रखकर इस प्रोजेक्ट में मनमानी का खेल शुरू हुआ। स्थानीय स्तर पर पीडब्ल्यूडी (PWD) जैसे सरकारी विभाग इस शेड का निर्माण आसानी से कर सकते थे, लेकिन सूत्रों की मानें तो एक रसूखदार अधिकारी के दबाव में प्रोजेक्ट का पूरा जिम्मा रायपुर की एक प्राइवेट कंसल्टेंसी फर्म ‘सिटकॉन’ को सौंप दिया गया।

यहीं से पूरे प्रोजेक्ट में बंदरबांट की शुरुआत हुई। औद्योगिक शेड बनाने का ठेका ‘जैन एसोसिएट’ नामक कंपनी को दिया गया। आरोप है कि यह ठेका भी पूरी तरह से सांठगांठ का नतीजा था। ठेकेदार ने मुनाफे के चक्कर में निर्माण में इतनी घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया कि मई 2022 में निर्माणाधीन भवन की दीवारें भरभरा कर ढह गईं।

बाद में जब लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इसकी जांच की, तो अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा कि ठेकेदार द्वारा किया गया काम पूरी तरह से गुणवत्ताहीन था। लेकिन भ्रष्टाचार की इंतहा देखिए, दीवार गिरने और घटिया काम साबित होने से पहले ही ठेकेदार जैन एसोसिएट को 29,52,851 रुपए का भारी-भरकम भुगतान किया जा चुका था।

हवा में ही खरीद ली गई मशीनें!

शेड निर्माण का जो हाल हुआ, वह तो चिंताजनक था ही, लेकिन मशीनरी की खरीद में जो खेल हुआ, वह विभागीय अंधेरगर्दी का सबसे बड़ा प्रमाण है। एक तरफ प्लांट के लिए बिल्डिंग बनी ही नहीं, दीवारें ढह चुकी थीं, लेकिन दूसरी तरफ उद्यानिकी विभाग ने जल्दबाजी दिखाते हुए मशीनों की सप्लाई का ऑर्डर भी दे दिया।

हैरानी की बात यह है कि बिना किसी शेड या सुरक्षित जगह के, मशीनरी के लिए 89,63,200 रुपए का भुगतान भी कर दिया गया। जब मशीन सप्लाई करने वाली कंपनी ने अपने बचे हुए पैसों की मांग शुरू की, तब जाकर उद्यानिकी विभाग की नींद टूटी।

वित्तीय गोलमाल: एक नज़र में

  • कुल स्वीकृत राशि: 2 करोड़ रुपए (आदिवासी विकास विभाग द्वारा)
  • शेड निर्माण हेतु निर्धारित: 85 लाख रुपए
  • मशीनरी हेतु निर्धारित: 1.15 करोड़ रुपए
  • ठेकेदार (जैन एसोसिएट) को भुगतान: 29,52,851 रुपए (भवन ढहने के बावजूद)
  • मशीनरी के लिए किया गया भुगतान: 89,63,200 रुपए (बिना बिल्डिंग के)
  • कुल खर्च/बर्बाद राशि: लगभग 1.19 करोड़ रुपए
  • वापस लौटाई गई राशि: लगभग 81 लाख रुपए (79 लाख से 81 लाख के बीच का जिक्र)

बचाव का खेल और रिकवरी के नाम पर ‘जीरो’

जब यह साफ हो गया कि प्रोजेक्ट बुरी तरह फेल हो चुका है और भ्रष्टाचार की पोल खुलने वाली है, तो उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने ठेकेदार और कंसल्टेंट को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। नियमानुसार, घटिया काम करने वाले ठेकेदार से पैसों की वसूली (रिकवरी) होनी चाहिए थी और उस पर ब्लैकलिस्टिंग जैसी कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए थी।

लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। बिना किसी रिकवरी और बिना किसी दंडात्मक कार्रवाई के चुपचाप एग्रीमेंट निरस्त कर दिया गया। 1.19 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद आज घरघोड़ा की जमीन पर मुनगा प्रोसेसिंग प्लांट के नाम पर एक ईंट भी साबुत नहीं बची है।

अचानक पैसे वापस आए तो आजाक विभाग भी रह गया दंग

जब यह पूरा खेल पांच साल तक चलता रहा और काम कुछ भी नहीं हुआ, तब अपनी गर्दन फंसती देख उद्यानिकी विभाग ने बचे हुए 81 लाख रुपए अचानक आदिवासी विकास विभाग (रायगढ़) के खाते में वापस ट्रांसफर कर दिए।

आदिवासी विकास विभाग (आजाक) के अधिकारी भी अचानक इतनी बड़ी रकम अपने खाते में वापस देखकर भौंचक्के रह गए। जब उन्होंने इस अप्रत्याशित ‘रिफंड’ की अंदरूनी पड़ताल की, तब जाकर सवा करोड़ के इस काले कारनामे और उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificate) के न होने की चौंकाने वाली कहानी सामने आई।

जिम्मेदार अधिकारियों के बेतुके बोल

इस पूरे महाघोटाले पर जब ग्रामीण भारत न्यूज ने संबंधित अधिकारियों के बयान खंगाले, तो उनकी बातों से साफ झलकता है कि सिस्टम किस कदर गैर-जिम्मेदार हो चुका है।

“मुनगा प्रोसेसिंग प्लांट के लिए परियोजना मद से दो करोड़ रुपए दिए गए थे। उद्यानिकी विभाग ने करीब 81 लाख रुपए वापस किए हैं।” — श्रीकांत दुबे, सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग (आजाक)

“उद्यानिकी विभाग को मुनगा प्रोसेसिंग प्लांट के लिए दो करोड़ रुपए मिले थे। काम नहीं हुआ है। बिल्डिंग गिरने के बाद काम आगे नहीं बढ़ा। शेष राशि वापस कर दी गई है। किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।” — रंजना माखीजा, सहायक संचालक, उद्यानिकी विभाग

ग्रामीण भारत न्यूज के सवाल

आज रायगढ़ और घरघोड़ा की ग्रामीण जनता सरकार और प्रशासन से यह सवाल पूछ रही है कि:

  1. क्या आदिवासियों के विकास के नाम पर भेजे गए सवा करोड़ रुपए इसी तरह ठेकेदारों और कंसल्टेंसी की जेब भरने के लिए थे?
  2. गुणवत्ताहीन काम करने वाले ठेकेदार पर अब तक एफआईआर (FIR) दर्ज कर पैसों की रिकवरी क्यों नहीं की गई?
  3. बिना भवन निर्माण पूरा हुए करोड़ों की मशीनों का भुगतान किस अधिकारी के आदेश पर और क्यों किया गया?

सरकारी खजाने की इस लूट पर फिलहाल कोई भी बड़ा प्रशासनिक अधिकारी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। ग्रामीण भारत न्यूज इस मामले की तह तक जाकर ग्रामीण और आदिवासी जनता की आवाज को लगातार उठाता रहेगा, ताकि दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो सके।

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