2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.236502773037" anonymous">

मुनगा प्रोसेसिंग प्लांट के नाम पर आदिवासियों के हक पर डाका, धरातल पर काम शून्य और उड़ गए सवा करोड़!

Author Image
Written by
Bureau Report

ग्रामीण भारत न्यूज (विशेष रिपोर्ट) संवाददाता: विनिता स्थान: घरघोड़ा, रायगढ़ (छत्तीसगढ़)

सरकारी तंत्र में योजनाओं के नाम पर किस तरह जनता और खासकर आदिवासियों के पैसे की खुलेआम बर्बादी होती है, इसका एक जीता-जागता और शर्मनाक उदाहरण रायगढ़ जिले के घरघोड़ा ब्लॉक में देखने को मिला है। ग्रामीण भारत न्यूज की इस विशेष पड़ताल में यह बात सामने आई है कि आदिवासियों के उत्थान और उन्हें रोजगार मुहैया कराने के लिए लाई गई एक महत्वाकांक्षी योजना भ्रष्टाचार और विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ गई। घरघोड़ा में बनने वाला ‘मुनगा (सहजन) प्रोसेसिंग प्लांट’ केवल कागजों और अधिकारियों के दिवास्वप्न तक ही सीमित रह गया है।

हालत यह है कि बिना कोई ठोस काम किए, बिना कोई प्लांट लगाए ही लगभग सवा करोड़ रुपए (1.19 करोड़) खर्च कर दिए गए। जब इस पूरे गोलमाल पर पर्दा डालना मुश्किल हो गया, तो बचे हुए 81 लाख रुपए चुपचाप वापस कर दिए गए, जिसने इस पूरे महाघोटाले की पोल खोल दी।

योजना का उद्देश्य: एक सुनहरा सपना जो कभी सच नहीं हुआ

रायगढ़ जिले के पांच प्रमुख आदिवासी विकासखंडों— धरमजयगढ़, घरघोड़ा, तमनार, लैलूंगा और खरसिया— में निवासरत ग्रामीण और आदिवासी जनता के लिए यह एक बहुत बड़ी सौगात थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में मुनगा (सहजन) की खेती को बढ़ावा देना, उससे पौष्टिक आहार तैयार करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करना था।

इस नेक काम के लिए केंद्र सरकार की विशेष केंद्रीय सहायता के तहत आदिम जाति कल्याण विभाग (आजाक) ने परियोजना मद से पूरे 2 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि मंजूर की थी। इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने की पूरी जिम्मेदारी उद्यानिकी विभाग को सौंपी गई थी। योजना के अनुसार, इस 2 करोड़ रुपए में से 1.15 करोड़ रुपए की आधुनिक मशीनरी खरीदी जानी थी और 85 लाख रुपए की लागत से एक औद्योगिक शेड (बिल्डिंग) का निर्माण किया जाना था। लेकिन, ग्रामीणों को क्या पता था कि उनके नाम पर आया यह पैसा विभागीय भ्रष्टाचार की गहरी खाई में समाने वाला है।

भ्रष्टाचार की नींव: कंसल्टेंसी और ठेकेदार की संदिग्ध ‘एंट्री’

विभागीय नियमों को ताक पर रखकर इस प्रोजेक्ट में मनमानी का खेल शुरू हुआ। स्थानीय स्तर पर पीडब्ल्यूडी (PWD) जैसे सरकारी विभाग इस शेड का निर्माण आसानी से कर सकते थे, लेकिन सूत्रों की मानें तो एक रसूखदार अधिकारी के दबाव में प्रोजेक्ट का पूरा जिम्मा रायपुर की एक प्राइवेट कंसल्टेंसी फर्म ‘सिटकॉन’ को सौंप दिया गया।

यहीं से पूरे प्रोजेक्ट में बंदरबांट की शुरुआत हुई। औद्योगिक शेड बनाने का ठेका ‘जैन एसोसिएट’ नामक कंपनी को दिया गया। आरोप है कि यह ठेका भी पूरी तरह से सांठगांठ का नतीजा था। ठेकेदार ने मुनाफे के चक्कर में निर्माण में इतनी घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया कि मई 2022 में निर्माणाधीन भवन की दीवारें भरभरा कर ढह गईं।

बाद में जब लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इसकी जांच की, तो अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा कि ठेकेदार द्वारा किया गया काम पूरी तरह से गुणवत्ताहीन था। लेकिन भ्रष्टाचार की इंतहा देखिए, दीवार गिरने और घटिया काम साबित होने से पहले ही ठेकेदार जैन एसोसिएट को 29,52,851 रुपए का भारी-भरकम भुगतान किया जा चुका था।

हवा में ही खरीद ली गई मशीनें!

शेड निर्माण का जो हाल हुआ, वह तो चिंताजनक था ही, लेकिन मशीनरी की खरीद में जो खेल हुआ, वह विभागीय अंधेरगर्दी का सबसे बड़ा प्रमाण है। एक तरफ प्लांट के लिए बिल्डिंग बनी ही नहीं, दीवारें ढह चुकी थीं, लेकिन दूसरी तरफ उद्यानिकी विभाग ने जल्दबाजी दिखाते हुए मशीनों की सप्लाई का ऑर्डर भी दे दिया।

हैरानी की बात यह है कि बिना किसी शेड या सुरक्षित जगह के, मशीनरी के लिए 89,63,200 रुपए का भुगतान भी कर दिया गया। जब मशीन सप्लाई करने वाली कंपनी ने अपने बचे हुए पैसों की मांग शुरू की, तब जाकर उद्यानिकी विभाग की नींद टूटी।

वित्तीय गोलमाल: एक नज़र में

  • कुल स्वीकृत राशि: 2 करोड़ रुपए (आदिवासी विकास विभाग द्वारा)
  • शेड निर्माण हेतु निर्धारित: 85 लाख रुपए
  • मशीनरी हेतु निर्धारित: 1.15 करोड़ रुपए
  • ठेकेदार (जैन एसोसिएट) को भुगतान: 29,52,851 रुपए (भवन ढहने के बावजूद)
  • मशीनरी के लिए किया गया भुगतान: 89,63,200 रुपए (बिना बिल्डिंग के)
  • कुल खर्च/बर्बाद राशि: लगभग 1.19 करोड़ रुपए
  • वापस लौटाई गई राशि: लगभग 81 लाख रुपए (79 लाख से 81 लाख के बीच का जिक्र)

बचाव का खेल और रिकवरी के नाम पर ‘जीरो’

जब यह साफ हो गया कि प्रोजेक्ट बुरी तरह फेल हो चुका है और भ्रष्टाचार की पोल खुलने वाली है, तो उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने ठेकेदार और कंसल्टेंट को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। नियमानुसार, घटिया काम करने वाले ठेकेदार से पैसों की वसूली (रिकवरी) होनी चाहिए थी और उस पर ब्लैकलिस्टिंग जैसी कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए थी।

लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। बिना किसी रिकवरी और बिना किसी दंडात्मक कार्रवाई के चुपचाप एग्रीमेंट निरस्त कर दिया गया। 1.19 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद आज घरघोड़ा की जमीन पर मुनगा प्रोसेसिंग प्लांट के नाम पर एक ईंट भी साबुत नहीं बची है।

अचानक पैसे वापस आए तो आजाक विभाग भी रह गया दंग

जब यह पूरा खेल पांच साल तक चलता रहा और काम कुछ भी नहीं हुआ, तब अपनी गर्दन फंसती देख उद्यानिकी विभाग ने बचे हुए 81 लाख रुपए अचानक आदिवासी विकास विभाग (रायगढ़) के खाते में वापस ट्रांसफर कर दिए।

आदिवासी विकास विभाग (आजाक) के अधिकारी भी अचानक इतनी बड़ी रकम अपने खाते में वापस देखकर भौंचक्के रह गए। जब उन्होंने इस अप्रत्याशित ‘रिफंड’ की अंदरूनी पड़ताल की, तब जाकर सवा करोड़ के इस काले कारनामे और उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificate) के न होने की चौंकाने वाली कहानी सामने आई।

जिम्मेदार अधिकारियों के बेतुके बोल

इस पूरे महाघोटाले पर जब ग्रामीण भारत न्यूज ने संबंधित अधिकारियों के बयान खंगाले, तो उनकी बातों से साफ झलकता है कि सिस्टम किस कदर गैर-जिम्मेदार हो चुका है।

“मुनगा प्रोसेसिंग प्लांट के लिए परियोजना मद से दो करोड़ रुपए दिए गए थे। उद्यानिकी विभाग ने करीब 81 लाख रुपए वापस किए हैं।”श्रीकांत दुबे, सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग (आजाक)

“उद्यानिकी विभाग को मुनगा प्रोसेसिंग प्लांट के लिए दो करोड़ रुपए मिले थे। काम नहीं हुआ है। बिल्डिंग गिरने के बाद काम आगे नहीं बढ़ा। शेष राशि वापस कर दी गई है। किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।”रंजना माखीजा, सहायक संचालक, उद्यानिकी विभाग

ग्रामीण भारत न्यूज के सवाल

आज रायगढ़ और घरघोड़ा की ग्रामीण जनता सरकार और प्रशासन से यह सवाल पूछ रही है कि:

  1. क्या आदिवासियों के विकास के नाम पर भेजे गए सवा करोड़ रुपए इसी तरह ठेकेदारों और कंसल्टेंसी की जेब भरने के लिए थे?
  2. गुणवत्ताहीन काम करने वाले ठेकेदार पर अब तक एफआईआर (FIR) दर्ज कर पैसों की रिकवरी क्यों नहीं की गई?
  3. बिना भवन निर्माण पूरा हुए करोड़ों की मशीनों का भुगतान किस अधिकारी के आदेश पर और क्यों किया गया?

सरकारी खजाने की इस लूट पर फिलहाल कोई भी बड़ा प्रशासनिक अधिकारी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। ग्रामीण भारत न्यूज इस मामले की तह तक जाकर ग्रामीण और आदिवासी जनता की आवाज को लगातार उठाता रहेगा, ताकि दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो सके।

और पढ़ें

ग्रामीण भारत न्यूज की लेख आपको पसंद आई की नहीं कमेंट करें। हां या ना में।

Aries Rashifal
मेष
taurus Rashifal
वृषभ
gemini Rashifal
मिथुन
cancer Rashifal
कर्क
leo Rashifal
सिंह
virgo Rashifal
कन्या
libra Rashifal
तुला
scorpion Rashifal
वृश्चिक
sagittarius Rashifal
धनु
capricorn Rashifal
मकर
aquarius Rashifal
कुंभ
pisces Rashifal
मीन
Read Full News

घरघोड़ा पुलिस की पुख्ता विवेचना का बड़ा असर!

Read Full News

🚨 तमनार में 17 लीटर महुआ शराब जब्त, आरोपी गिरफ्तार

Read Full News

पेट्रोल पंप के पास अज्ञात महिला का शव मिलने से सनसनी

Read Full News

घरघोड़ा के जयस्तंभ चौक चोरीकांड का पर्दाफाश: 100 से अधिक CCTV फुटेज खंगालकर आरोपी गिरफ्तार, ₹6.30 लाख की संपत्ति बरामद

Read Full News

🚨🐘 BREAKING NEWS | धरमजयगढ़ में हाथी का कहर! 28 वर्षीय युवक को दौड़ाकर कुचला, मौके पर दर्दनाक मौत 🐘🚨

Read Full News

🌾 अब घर बैठे होगी खाद की एडवांस बुकिंग, नई डिजिटल व्यवस्था से किसानों को बड़ी राहत

Read Full News

तमनार में 1171 बच्चों की नेत्र जांच, 169 में मिला दृष्टि दोष; स्वास्थ्य विभाग देगा निःशुल्क चश्मा

Read Full News

रायगढ़ में हाथियों का कहर: 21 किसानों की धान की फसल चौपट, कच्चे मकान की दीवार तोड़ी

Read Full News

बकाया बिजली बिल पर सरकारी दफ्तरों को अल्टीमेटम

Read Full News

24 घंटे बाद एनटीपीसी कोरबा की तीन यूनिट फिर शुरू, 1200 मेगावाट बिजली उत्पादन बहाल

Read Full News

कोड़ातराई में 1.21 करोड़ की लागत से बनेगा पीएम श्री स्कूल भवन

Read Full News

जर्जर सड़क देखकर भड़के कृषि मंत्री रामविचार नेताम, एसडीओ और सब इंजीनियर पर कार्रवाई के निर्देश