DGGI की रायपुर जोनल यूनिट ने सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल समेत 97 लोगों को भेजा कारण बताओ नोटिस, चार साल में ₹1.45 लाख करोड़ से अधिक के टैक्सेबल कारोबार का आकलन
रायपुर। महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप से जुड़े कथित सट्टेबाजी नेटवर्क के खिलाफ केंद्र सरकार की जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार तेज होती नजर आ रही है। इसी कड़ी में महानिदेशालय जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) की रायपुर जोनल यूनिट ने महादेव बुक से जुड़े कथित नेटवर्क के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर, सह-प्रमोटर रवि उप्पल समेत कुल 97 आरोपियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन नोटिसों में विभाग ने कुल ₹40,603 करोड़ से अधिक की जीएसटी देनदारी प्रस्तावित की है।
जांच एजेंसी के आकलन के मुताबिक, कथित ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के जरिए कई वर्षों तक बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन किया गया। अधिकारियों ने बैंकिंग लेनदेन, डिजिटल दस्तावेजों, पैनल ऑपरेटरों से मिली जानकारी और जांच के दौरान सामने आए अन्य रिकॉर्ड के आधार पर इस नेटवर्क की गतिविधियों का आकलन किया है।
97 आरोपियों को अलग-अलग अवधि के लिए नोटिस
DGGI की कार्रवाई में दो अलग-अलग अवधि के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एक नोटिस में 66 लोगों और दूसरे नोटिस में 31 लोगों को शामिल किया गया है। दोनों सूचियों में कुछ नाम दोहराए जाने के बाद अलग-अलग व्यक्तियों की कुल संख्या 97 बताई गई है।
इन सभी लोगों से संबंधित कथित कारोबारी गतिविधियों, वित्तीय लेनदेन और जीएसटी देनदारी को लेकर विभाग ने जवाब मांगा है। कारण बताओ नोटिस का उद्देश्य संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर देना होता है, इसलिए नोटिस जारी होना अपने आप में अंतिम कर निर्धारण या दोष सिद्ध होने के समान नहीं है।
चार साल में ₹1.45 लाख करोड़ से अधिक के कारोबार का आकलन
जांच में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, कथित सट्टेबाजी सिंडिकेट की कुल टैक्सेबल वैल्यू का आकलन लगभग ₹1,45,010.77 करोड़ किया गया है। यह आकलन करीब चार वर्षों की गतिविधियों से संबंधित बताया जा रहा है।
जांच एजेंसी ने बैंकिंग लेनदेन, डिजिटल रिकॉर्ड और पैनल संचालकों से प्राप्त बयानों सहित विभिन्न जानकारियों को आधार बनाया है। इतनी बड़ी रकम के कारोबार का आकलन सामने आने के बाद यह मामला देश के सबसे बड़े कथित ऑनलाइन सट्टेबाजी और कर चोरी के मामलों में शामिल हो गया है।
करीब 2 हजार पैनलों के नेटवर्क का दावा
जांच के दौरान कथित तौर पर करीब 2,000 सट्टेबाजी पैनलों के नेटवर्क का पता चलने की बात सामने आई है। अधिकारियों के आकलन के मुताबिक प्रत्येक पैनल के माध्यम से प्रतिदिन लाखों रुपये की रकम जमा होती थी।
जांच से जुड़े आंकड़ों में प्रतिदिन करीब ₹99 करोड़ के लेनदेन का अनुमान लगाया गया है। यदि यह आकलन जांच के अंतिम निष्कर्षों में भी कायम रहता है तो इससे नेटवर्क के कथित बड़े पैमाने और उसकी वित्तीय पहुंच का अंदाजा लगाया जा सकता है।
थर्ड पार्टी और म्यूल बैंक खातों के इस्तेमाल का आरोप
जांच में कथित तौर पर यह भी सामने आया कि सट्टेबाजी से संबंधित रकम को अलग-अलग खातों में जमा कराने और आगे स्थानांतरित करने के लिए थर्ड-पार्टी, फर्जी तथा म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया।
ऐसे खातों के जरिए वास्तविक लेनदेन और धन के अंतिम लाभार्थी तक पहुंच को छिपाने की कोशिश किए जाने का आरोप जांच एजेंसियों की पड़ताल में सामने आया है। इसी वजह से वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ना जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।
GST पंजीयन और रिटर्न को लेकर भी सवाल
DGGI के आरोपों के मुताबिक इतने बड़े पैमाने पर कथित व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने के बावजूद संबंधित नेटवर्क द्वारा जीएसटी पंजीकरण और टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं किए गए।
ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग से संबंधित गतिविधियों पर लागू कर प्रावधानों के तहत विभाग ने कथित टैक्स देनदारी का आकलन किया है। इसी आधार पर आरोपियों को भारी रकम की जीएसटी देनदारी से संबंधित कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
₹35,517 करोड़ और ₹5,085 करोड़ की अलग-अलग मांग
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 30 सितंबर 2023 तक की अवधि के लिए लगभग ₹35,517.22 करोड़ की IGST देनदारी प्रस्तावित की गई है।
वहीं 1 अक्टूबर 2023 से 31 मार्च 2024 की अवधि के लिए लगभग ₹5,085.80 करोड़ की अतिरिक्त IGST मांग प्रस्तावित की गई है।
दोनों प्रस्तावित रकम को मिलाकर कुल राशि करीब ₹40,603 करोड़ से अधिक बैठती है। यह राशि अभी विभाग द्वारा प्रस्तावित कर मांग है और संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।
28 प्रतिशत GST के प्रावधान बने कार्रवाई का आधार
ऑनलाइन गेमिंग को लेकर देश में कर व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं। ऑनलाइन गेमिंग और उससे संबंधित गतिविधियों पर 28 प्रतिशत GST के प्रावधान लागू किए जाने के बाद इस क्षेत्र में कर चोरी के मामलों पर जांच एजेंसियों का फोकस बढ़ा है।
DGGI ने इसी कर व्यवस्था और संबंधित न्यायिक एवं कानूनी प्रावधानों के आधार पर कथित बेटिंग कारोबार की कर देनदारी का आकलन किया है।
सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल जांच के केंद्र में
महादेव ऑनलाइन बेटिंग मामले में सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल लंबे समय से जांच एजेंसियों के रडार पर रहे हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार दोनों कथित नेटवर्क के प्रमुख संचालकों में शामिल रहे हैं।
मामले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) सहित अन्य केंद्रीय एजेंसियां भी अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। जांच का दायरा कथित सट्टेबाजी कारोबार के अलावा धन के लेनदेन, मनी लॉन्ड्रिंग और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक भी पहुंचा है।
देश की बड़ी कर कार्रवाई में शामिल
₹40,603 करोड़ से अधिक की प्रस्तावित GST देनदारी वाला यह मामला ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग क्षेत्र में की गई बड़ी कर कार्रवाइयों में गिना जा रहा है।
DGGI की कार्रवाई से यह संकेत मिलता है कि सरकार ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क में कर अनुपालन को लेकर बेहद गंभीर है। आने वाले समय में कारण बताओ नोटिस पर संबंधित पक्षों के जवाब और विभागीय कार्यवाही के बाद इस मामले में वास्तविक कर देनदारी की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
क्या है महादेव ऑनलाइन बेटिंग मामला?
महादेव बुक एक कथित ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के रूप में जांच एजेंसियों के सामने आया था। इसके खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में पुलिस, ED और अन्य एजेंसियों ने अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की है। मामले में कथित तौर पर ऑनलाइन पैनल, सट्टेबाजी, हवाला जैसे वित्तीय लेनदेन और विभिन्न बैंक खातों के इस्तेमाल से संबंधित आरोपों की जांच की गई है।
अब DGGI की ओर से 97 लोगों को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस और ₹40,603 करोड़ से अधिक की प्रस्तावित GST देनदारी ने इस मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
ग्रामीण भारत न्यूज के लिए — संवाददाता विनोद चौहान





















