संवाददाता: नयना अग्निहोत्री
प्रकाशन: ग्रामीण भारत न्यूज़
नई दिल्ली/रायपुर- भारतीय लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर, संसद भवन में शुक्रवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक बैठक संपन्न हुई। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से शिष्टाचार और आधिकारिक भेंट की। यह मुलाकात महज एक औपचारिक भेंट नहीं थी, बल्कि यह छत्तीसगढ़ राज्य, विशेषकर आदिवासी बहुल बस्तर अंचल के समग्र विकास, औद्योगिक क्रांति और बुनियादी ढांचे के कायाकल्प का एक विस्तृत खाका प्रस्तुत करने का ऐतिहासिक अवसर था। मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री के समक्ष ‘बस्तर विजन’ का रोडमैप साझा किया और राज्य की कई महात्वाकांक्षी परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए केंद्र सरकार से विशेष अनुदान और सहयोग का आग्रह किया। ग्रामीण भारत न्यूज़ की इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि कैसे यह मुलाकात छत्तीसगढ़ के भविष्य की दिशा तय करने वाली है।
तीन प्रमुख परियोजनाओं के लिए केंद्र से संजीवनी की मांग: कृषि, ऊर्जा और स्वास्थ्य पर जोर-
ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था मूल रूप से कृषि पर आधारित है और छत्तीसगढ़ को ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री मोदी के समक्ष राज्य की प्रगति के लिए तीन सबसे अहम प्रस्ताव रखे हैं।
राजनांदगांव में 10,500 करोड़ रुपये की गैस आधारित यूरिया परियोजना:-
मुख्यमंत्री ने सबसे प्रमुख मांग के रूप में राजनांदगांव में प्रस्तावित गैस आधारित यूरिया प्लांट को शीघ्र केंद्र से मंजूरी देने का आग्रह किया। 10,500 करोड़ रुपये की विशाल लागत वाली यह परियोजना राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार द्वारा आवश्यक भूमि का आवंटन कर दिया गया है और राज्य स्तर की सभी अनिवार्य स्वीकृतियां पूरी कर ली गई हैं। इस परियोजना के शुरू होने से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे मध्य भारत के किसानों को समय पर और सस्ती दरों पर उर्वरक (यूरिया) उपलब्ध हो सकेगा। इससे विदेशों से आयात पर निर्भरता कम होगी, हजारों स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और राजनांदगांव के आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक विकास का एक नया इकोसिस्टम तैयार होगा।
2. 461 नक्सल प्रभावित गांवों में स्थायी बिजली ग्रिड की स्थापना:
विकास की पहली शर्त ऊर्जा है। दशकों तक वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) का दंश झेलने वाले बस्तर और अन्य सुदूर अंचलों के 461 गांव ऐसे हैं, जहां सुरक्षा कारणों से कभी बिजली का मुख्य ग्रिड पहुंच ही नहीं सका। वर्तमान में यहां ऑफ-ग्रिड (मुख्यतः सौर ऊर्जा आदि) के माध्यम से काम चलाया जा रहा है, जो स्थायी और पूर्ण समाधान नहीं है। मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री से इन 461 गांवों को स्थायी और मुख्य बिजली ग्रिड से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार से विशेष आर्थिक और ढांचागत सहायता मांगी है। इन गांवों में स्थायी बिजली पहुंचने का अर्थ है— वहां कुटीर उद्योगों का विकास, बच्चों की शिक्षा में सुधार, कृषि के लिए सिंचाई पंपों का सुचारू संचालन और समग्र रूप से ग्रामीण जीवन स्तर में एक क्रांतिकारी बदलाव।
3. अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) की स्थापना का प्रस्ताव:-
छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध वन संपदा, दुर्लभ जड़ी-बूटियों और आदिवासी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के लिए पूरे विश्व में विख्यात है। इसी प्राकृतिक संपदा का वैज्ञानिक और चिकित्सीय उपयोग सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री ने रायपुर या बस्तर क्षेत्र में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) की स्थापना का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए केंद्र से सकारात्मक पहल करने का अनुरोध किया गया है। अगर यह संस्थान बस्तर या रायपुर में खुलता है, तो यह आयुर्वेद के क्षेत्र में शोध, रोजगार और विश्वस्तरीय चिकित्सा का एक बड़ा केंद्र बन जाएगा।
‘बस्तर विजन’: गोलियों की गूंज से विकास की उड़ान तक का सफर-
एक समय था जब बस्तर का नाम सुनते ही मुख्यधारा के मीडिया में केवल नक्सली हमलों और हिंसा की तस्वीरें उभरती थीं, लेकिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री को बताया कि अब बस्तर की तस्वीर और तकदीर दोनों तेजी से बदल रही हैं। उन्होंने ‘बस्तर विजन’ का पूरा खाका पेश किया।
‘नियद नेल्ला नार 2.0′ (आपका अच्छा गांव) और ‘बस्तर मुहिम’:
इन अभिनव अभियानों के माध्यम से बस्तर संभाग के 5,542 गांवों में सरकारी योजनाओं को मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। इसका सीधा लाभ लगभग 39 लाख ग्रामीण और आदिवासी आबादी को मिल रहा है। प्रशासन अब गांवों तक खुद चलकर जा रहा है। राशन वितरण प्रणाली, आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज, जनधन खाते, वनाधिकार पट्टे और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ अब समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक बिना किसी बिचौलिये के पहुंच रहा है।
शिक्षा और स्वास्थ्य: ग्रामीण अंचलों में हो रहा है नया सवेरा
बंद पड़े 421 स्कूलों का पुनर्जन्म:-
नक्सली खौफ के कारण पिछले कई दशकों में बस्तर के अंदरूनी इलाकों में सैकड़ों स्कूल या तो नक्सलियों द्वारा नष्ट कर दिए गए थे या दहशत के कारण बंद हो गए थे। मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ प्रधानमंत्री को बताया कि राज्य सरकार के कड़े सुरक्षा इंतजामों और दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण ऐसे 421 स्कूलों को फिर से खोल दिया गया है। वहां अब गोलियों की जगह बच्चों के ककहरे गूंज रहे हैं।
नई एजुकेशन सिटी का निर्माण:
दंतेवाड़ा की सफल ‘एजुकेशन सिटी’ की तर्ज पर अब अति-नक्सल प्रभावित माने जाने वाले ओरछा और जगरगुंडा जैसे घोर अंदरूनी इलाकों में भी नई एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है। इसका उद्देश्य दूरदराज के आदिवासी बच्चों को वहीं रहकर सर्वसुविधायुक्त और आधुनिक शिक्षा प्रदान करना है, ताकि उन्हें भविष्य संवारने के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन न करना पड़े।
स्वास्थ्य सेवाओं का महा-अभियान:
‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ के तहत स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुआ है। अब तक 34 लाख से अधिक ग्रामीणों की गहन स्वास्थ्य जांच (स्क्रीनिंग) की जा चुकी है और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को बड़े अस्पतालों से जोड़ा गया है। जगदलपुर में अत्याधुनिक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल काम कर रहा है, वहीं गीदम जैसे क्षेत्र में नया मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहा है। इसके अतिरिक्त, राज्य के विभिन्न हिस्सों में नए मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य अधोसंरचना का जाल बिछाया जा रहा है।
कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचा: बस्तर की नई जीवनरेखा
सड़क, रेल और हवाई संपर्क किसी भी क्षेत्र के विकास की रीढ़ होते हैं। मुख्यमंत्री साय ने बताया कि जिस बस्तर में कभी पक्की सड़कें बनाना एक सपने जैसा था, वहां आज आधारभूत ढांचे का ऐतिहासिक विस्तार हो रहा है।
रेल और हवाई मार्ग का विस्तार:
लगभग 3,513 करोड़ रुपये की विशाल लागत से जगदलपुर-रावघाट रेललाइन का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है। यह रेललाइन बस्तर को देश के बाकी हिस्सों से सीधे जोड़ेगी, जिससे लौह अयस्क और अन्य खनिजों के परिवहन के साथ-साथ यात्री सुविधाओं में भी भारी इजाफा होगा। इसके साथ ही, जगदलपुर एयरपोर्ट से नियमित वाणिज्यिक हवाई सेवाओं के विस्तार की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जिससे पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी।
सड़क और सिंचाई परियोजनाएं:
रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे अपने अंतिम चरण में है, जो बस्तर से होकर गुजरेगा और यह इस क्षेत्र के लिए एक ‘इकोनॉमिक कॉरिडोर’ का काम करेगा। कृषि क्षेत्र को संजीवनी देने के लिए इंद्रावती नदी पर एक विशाल बैराज परियोजना प्रस्तावित है। इस बैराज के निर्माण से बस्तर अंचल के लगभग 32 हजार हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सालों भर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी, जिससे आदिवासी किसान साल में दो से तीन फसलें ले सकेंगे।
पर्यटन, संस्कृति और खेल: वैश्विक पटल पर बस्तर की नई पहचान
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बस्तर केवल खनिजों या चुनौतियों का क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह एक समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का केंद्र है।
बस्तर दशहरा और पर्यटन का विकास:
75 दिनों तक चलने वाले विश्वप्रसिद्ध ‘बस्तर दशहरा’ को अब एक ग्लोबल टूरिज्म ब्रांड (वैश्विक पर्यटन ब्रांड) के रूप में विकसित करने पर काम चल रहा है। इसके अलावा, भारत का नियाग्रा कहे जाने वाले चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़ के झरने, और कुटुंबसर की गुफाओं जैसे प्राकृतिक और ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
बस्तर ओलंपिक – युवाओं में नया विश्वास:
सबसे बड़ी और सकारात्मक खबर यह है कि ‘बस्तर ओलंपिक’ के आयोजन में 4 लाख से अधिक स्थानीय युवाओं ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया है। खेलों के माध्यम से युवाओं की यह भारी भागीदारी इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि क्षेत्र में अब शांति, प्रशासन के प्रति विश्वास और एक बेहद सकारात्मक माहौल कायम हो चुका है। युवा अब बंदूकों की जगह खेलों में अपना भविष्य तलाश रहे हैं।
औद्योगिक क्रांति: 8 लाख करोड़ का ऐतिहासिक निवेश और नवाचार
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री को राज्य की अर्थव्यवस्था में आ रहे बड़े उछाल की भी विस्तृत जानकारी दी। छत्तीसगढ़ अब केवल कोयला और स्टील का राज्य नहीं रह गया है, बल्कि यह आधुनिक तकनीक और उद्योगों का नया हब बन रहा है।
नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 का कमाल:
नई उद्योग नीति लागू होने के मात्र कुछ ही समय के भीतर, राज्य सरकार को लगभग आठ लाख करोड़ रुपये (8 Trillion INR) के ऐतिहासिक निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इनमें से एक बड़ी संख्या में परियोजनाओं पर जमीनी स्तर पर काम भी शुरू हो चुका है।
भविष्य के उद्योग और तकनीक (Future Technologies):
राज्य में पहली बार कोर सेक्टर (माइनिंग/स्टील) से हटकर आधुनिक उद्योगों की स्थापना हो रही है। इनमें एआई डेटा सेंटर पार्क (AI Data Center Park), सेमीकंडक्टर निर्माण प्लांट, हाइपरस्केल डेटा सेंटर, ग्लोबल बीपीओ (BPO), गारमेंट और टेक्सटाइल पार्क, चॉकलेट मैन्युफैक्चरिंग हब, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्माण, तथा इंट्राऑक्यूलर लेंस निर्माण जैसे उच्च-तकनीकी और रोजगार सृजक उद्योग शामिल हैं।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में नंबर वन:
निवेशकों के लिए एक पारदर्शी और बाधारहित माहौल तैयार करने के कारण, छत्तीसगढ़ को नीति आयोग के ‘इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स’ (Investment Friendliness Index) में नियामकीय और संस्थागत माहौल के लिए पूरे देश में पहला स्थान प्राप्त हुआ है।
इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने एक बहुत बड़ी उपलब्धि साझा करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026लागू कर दिया है। यह पूरे भारत में अपनी तरह का पहला ऐसा प्रगतिशील कानून है, जिसमें जोखिम आधारित नियामकीय व्यवस्था (Risk-based regulatory system), स्व-प्रमाणीकरण (Self-Certification) और समयबद्ध अनुमतियों को कानूनी जामा पहनाया गया है। अब निवेशकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि उन्हें कानूनी अधिकार के तहत तय समय सीमा में अनुमतियां मिलेंगी।
मातृशक्ति का सम्मान: लखपति दीदी योजना और महिला सशक्तिकरण की मिसाल-
ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था तब तक मजबूत नहीं हो सकती, जब तक गांव की महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र न हों। महिला सशक्तिकरण के मोर्चे पर छत्तीसगढ़ की प्रगति की रिपोर्ट प्रधानमंत्री मोदी को सौंपते हुए मुख्यमंत्री साय ने बताया कि राज्य ने अपने निर्धारित लक्ष्य को पार करते हुए अब तक 10.42लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी‘बना दिया है। ये वे महिलाएं हैं जो स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर अब सालाना कम से कम एक लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं।
सरकार अब यहीं रुकने वाली नहीं है। अगले चरण में राज्य सरकार 14 लाख और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें लखपति दीदी की श्रेणी में लाने के महात्वाकांक्षी लक्ष्य पर काम कर रही है। इस शानदार सफलता का जश्न मनाने और महिलाओं को और अधिक प्रोत्साहित करने के लिए, मुख्यमंत्री ने वर्ष 2027 में राजधानी रायपुर में प्रस्तावित एक विशाल ‘लखपति दीदी सम्मेलन’ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया।
सुशासन और भविष्य की राह: 500 करोड़ का ‘राज्य एआई मिशन’
तकनीक के उपयोग से सुशासन (Good Governance) स्थापित करने के प्रधानमंत्री के विजन को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 500 करोड़ रुपये के बजट के साथ ‘राज्य एआई मिशन’ (State AI Mission) की शुरुआत की है। इस मिशन के माध्यम से कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिसिंग और सरकारी कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का व्यापक उपयोग किया जाएगा, ताकि सरकारी योजनाएं और अधिक पारदर्शी, तेज और भ्रष्टाचार-मुक्त तरीके से आम जनता तक पहुंच सकें। छत्तीसगढ़ तेजी से एआई-आधारित सुशासन की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
निष्कर्ष: एक नए छत्तीसगढ़ का उदय
मुलाकात के अंत में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन, दूरदर्शी सोच और केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग के कारण ही छत्तीसगढ़ में विकास कार्यों को यह नई और ऐतिहासिक गति मिल सकी है। उन्होंने पूरा विश्वास व्यक्त किया कि राज्य के सर्वांगीण विकास से जुड़े इन सभी महत्वपूर्ण प्रस्तावों, विशेषकर यूरिया प्लांट, विद्युतीकरण और आयुर्वेद संस्थान पर केंद्र सरकार का पूरा और सकारात्मक सहयोग प्राप्त होगा।
नई दिल्ली के संसद भवन में हुई यह उच्च स्तरीय बैठक इस बात का स्पष्ट संकेत है कि छत्तीसगढ़ अब अपनी पुरानी छवि को पीछे छोड़कर एक औद्योगिक, तकनीकी, सुरक्षित और विकसित राज्य के रूप में पूरे देश के सामने एक नया मॉडल प्रस्तुत करने के लिए पूरी तरह तैयार है। बस्तर के जंगलों से लेकर रायपुर के तकनीकी पार्कों तक, विकास की एक नई बयार बहने लगी है।





















