रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने विभिन्न मंडलों, बोर्डों, आयोगों और विकास संस्थाओं में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के पदों पर जिम्मेदारी संभाल रहे नेताओं को मंत्री स्तर का दर्जा देने का बड़ा निर्णय लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से गुरुवार को जारी आदेश के बाद प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आदेश के तहत कुल 18 मंडल, बोर्ड और आयोगों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्षों को मंत्री स्तर की सुविधाओं और दर्जे से जोड़ा गया है।
सरकार के आदेश के अनुसार इनमें तीन प्रमुख नेताओं को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है, जबकि अन्य 15 नेताओं को राज्य मंत्री का दर्जा प्रदान किया गया है। सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि मंत्री स्तर का यह दर्जा किसी व्यक्ति की वरिष्ठता अथवा आधिकारिक प्रोटोकॉल की वरीयता को प्रदर्शित नहीं करता, बल्कि संबंधित संस्थाओं के कामकाज को प्रभावी ढंग से संचालित करने के उद्देश्य से प्रदान किया गया है।
तीन नेताओं को मिला कैबिनेट मंत्री का दर्जा
जारी आदेश में राज्य स्तर के महत्वपूर्ण आयोगों के प्रमुखों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है। इनमें राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष रामलाल चौहान, राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूप सिंह मंडावी तथा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू शामिल हैं।
खास बात यह है कि रूप सिंह मंडावी को पहले राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त था, जिसे नए आदेश के माध्यम से संशोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री के दर्जे में बदल दिया गया है। वहीं रामलाल चौहान और डॉ. ममता साहू को भी कैबिनेट मंत्री स्तर का दर्जा दिए जाने से इन संस्थाओं के प्रमुखों की प्रशासनिक हैसियत में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है।
15 अन्य नेताओं को राज्य मंत्री का दर्जा
सरकार के निर्णय के तहत प्रदेश के विभिन्न विकास निगमों, कल्याण बोर्डों और अकादमियों से जुड़े अध्यक्षों को भी राज्य मंत्री का दर्जा प्रदान किया गया है। इनमें राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष गौरीशंकर श्रीवास, मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष आनंद निषाद, संस्कृत विद्या मंडल के अध्यक्ष राजेश कुमार राजपूत, शाकंभरी बोर्ड के अध्यक्ष राजेंद्र नायक और राज्य शिक्षा आयोग के अध्यक्ष सुधीर गौतम शामिल हैं।
इसके अलावा राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष एजाज मिर्जा बेग, राज्य हथकरघा विकास एवं विपणन संघ के अध्यक्ष भोजराज देवांगन, राज्य राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा, राज्य सिंधी अकादमी की अध्यक्ष सुषमा जेठानी तथा राज्य सहकारी विपणन संघ के अध्यक्ष शशिकांत द्विवेदी को भी राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है।
इन उपाध्यक्षों को भी मिला राज्य मंत्री का दर्जा
सरकार के आदेश में कुछ महत्वपूर्ण संस्थाओं के उपाध्यक्षों को भी राज्य मंत्री का दर्जा दिए जाने का उल्लेख है। इनमें रायपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. जेपी शर्मा, छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के उपाध्यक्ष किशोर महानंद, राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष आनंद कुमार तिवारी (राजीव लोचन दास महाराज), राज्य अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष वेदराम मनहरे और राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष मंगल दास ठाकुर शामिल हैं।
प्रोटोकॉल में वरिष्ठता का संकेत नहीं
सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश में यह महत्वपूर्ण बात भी स्पष्ट की गई है कि मंत्री स्तर का दर्जा दिए जाने को किसी प्रकार की वरिष्ठता या आधिकारिक प्रोटोकॉल की स्थिति के रूप में नहीं देखा जाएगा। यह व्यवस्था संबंधित मंडलों, बोर्डों और आयोगों के कार्यों के सुचारू संचालन तथा प्रशासनिक समन्वय के उद्देश्य से की गई है।
सरकार के इस फैसले से इन संस्थाओं के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्षों को उनके दायित्वों के अनुरूप मंत्री स्तर का दर्जा प्राप्त होगा। राजनीतिक दृष्टि से भी यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि एक साथ बड़ी संख्या में मंडल, बोर्ड और आयोगों से जुड़े पदाधिकारियों को मंत्री स्तर का दर्जा प्रदान किया गया है।
ग्रामीण भारत न्यूज | रायपुर, छत्तीसगढ़
रिपोर्ट: झसकेतन राजहंस, राज्य प्रभारी, ग्रामीण भारत न्यूज





















