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छत्तीसगढ़ में सुशासन की मिसाल: रायगढ़ के 60 किसान परिवारों को मिला ₹40 करोड़ का मुआवजा, जिंदल पावर लिमिटेड की पाइपलाइन से प्रभावित निजी भूमि का वर्षों पुराना विवाद सुलझा

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ग्रामीण भारत न्यूज विशेष जनहित कवरेज

दिनांक: रविवार, 02 अगस्त 2026 समय: सुबह 03:49 बजे (IST) संवाददाता: अतुल अग्निहोत्री स्थान: रायगढ़ (छत्तीसगढ़)

मुख्य बिंदु (Highlights):

  • बड़ी राहत: रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में जिंदल पावर लिमिटेड (JPL) की ऐश स्लरी पाइपलाइन से प्रभावित किसानों के लिए 40 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी।
  • प्रभावित क्षेत्र: घरघोड़ा विकासखंड के तमनार क्षेत्र के 4 गांवों—बुड़िया, बायंगड़ी, झिकाबहाल और लिबरा के 60 किसान परिवार लाभान्वित।
  • परियोजना का दायरा: 6.7 किलोमीटर लंबी ऐश स्लरी पाइपलाइन के निर्माण में किसानों की 52.64 एकड़ निजी भूमि का हुआ था उपयोग।
  • प्रशासनिक सख्ती: कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर एसडीएम घरघोड़ा प्रवीण तिवारी की जांच में किसानों की मांग सही पाई गई, जिसके बाद उद्योग प्रबंधन को मुआवजा जारी करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए।
  • पर्यावरण व विकास: फ्लाई ऐश के वैज्ञानिक और धूल-रहित परिवहन से प्रदूषण में कमी और सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव घटेगा।

प्रस्तावना: जनहित और सुशासन की नई मिसाल

रायगढ़ (छत्तीसगढ़): मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ‘सुशासन, पारदर्शिता और जन-संवेदनशीलता’ की दिशा में किए जा रहे प्रयास धरातल पर रंग लाने लगे हैं। विकास परियोजनाओं के साथ-साथ आम नागरिकों एवं किसानों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा का एक उत्कृष्ट उदाहरण रायगढ़ जिले से सामने आया है।

रायगढ़ जिले के घरघोड़ा विकासखंड अंतर्गत तमनार क्षेत्र में लंबे समय से लंबित ऐश स्लरी पाइपलाइन प्रभावित किसानों के मुआवजे का मामला जिला प्रशासन की तत्परता और प्रभावी समन्वय से सुलझ गया है। जिंदल पावर लिमिटेड (JPL) द्वारा प्रभावित 60 किसान परिवारों के लिए 40 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है। इस निर्णय से वर्षों से अपनी गाढ़ी कमाई की जमीन के उचित मुआवजे की आस लगाए बैठे ग्रामीण किसानों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई है।

मामले का पृष्ठभूमि और प्रभावित गांव

जिंदल पावर लिमिटेड द्वारा थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख (फ्लाई ऐश) के निस्तारण और वैज्ञानिक परिवहन के लिए तमनार क्षेत्र में लगभग 6.7 किलोमीटर लंबी ऐश स्लरी पाइपलाइन बिछाई गई थी। वर्ष 2025 में क्रियान्वित इस परियोजना के तहत तमनार क्षेत्र के चार प्रमुख गांवों:

  1. बुड़िया
  2. बायंगड़ी
  3. झिकाबहाल
  4. लिबरा

इन गांवों के कुल 60 किसान परिवारों की लगभग 52.64 एकड़ निजी भूमि का उपयोग पाइपलाइन बिछाने के लिए किया गया था। जमीन का उपयोग होने के बाद से ही किसान उचित और नियमानुसार मुआवजे की मांग को लेकर निरंतर प्रयासरत थे।

कलेक्टर जनदर्शन से मिली न्याय की दिशा

पीड़ित और प्रभावित किसानों ने अपनी समस्याओं को लेकर जिला प्रशासन का द्वार खटखटाया। किसानों द्वारा कलेक्टर जनदर्शन सहित विभिन्न प्रशासनिक मंचों पर आवेदन सौंपकर अपनी व्यथा बताई गई थी।

मामले की संवेदनशीलता और जनहित को सर्वोपरि रखते हुए रायगढ़ के कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने इसे अत्यंत गंभीरता से लिया। उन्होंने तत्काल घरघोड़ा के अनुविभागीय राजस्व अधिकारी (SDM) को मौके पर जाकर तथ्यात्मक जांच करने और किसानों की आपत्तियों का विधिक मूल्यांकन करने के निर्देश दिए।

प्रशासनिक जांच और उद्योग प्रबंधन को सख्त निर्देश

कलेक्टर के निर्देश पर घरघोड़ा एसडीएम द्वारा की गई विस्तृत राजस्व एवं मैदानी जांच के दौरान किसानों की शिकायतें पूरी तरह सत्य पाई गईं। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि किसानों की निजी भूमि का उपयोग परियोजना में किया गया है और नियमानुसार वे उचित मुआवजे के हकदार हैं।

जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने जिंदल पावर लिमिटेड के उच्च अधिकारियों को तलब किया। उन्होंने सख्त लहजे में स्पष्ट किया कि औद्योगिक विकास की आड़ में किसी भी किसान के वैधानिक हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन ने उद्योग प्रबंधन को किसानों के वैधानिक अधिकारों के अनुरूप तत्काल मुआवजा राशि निर्धारित कर जारी करने के कड़े निर्देश दिए।

प्रथम किस्त के रूप में जारी हुए ₹40 करोड़

जिला प्रशासन के लगातार अनुश्रवण, प्रभावी मध्यस्थता और कड़े रुख के परिणामस्वरूप जिंदल पावर लिमिटेड प्रबंधन ने झुकते हुए मुआवजे की प्रक्रिया शुरू की। कंपनी द्वारा 40 करोड़ रुपये की पहली किस्त सीधे प्रभावित किसानों के खातों में हस्तांतरित करने हेतु जारी कर दी गई है। शेष प्रक्रिया को भी पारदर्शी तरीके से पूरा किया जा रहा है।

अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), घरघोड़ा श्री प्रवीण तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया:

“तमनार क्षेत्र के बुड़िया, बायंगड़ी, झिकाबहाल एवं लिबरा गांवों के 60 किसान परिवारों की 52.64 एकड़ निजी भूमि पर 6.7 किमी लंबी ऐश स्लरी पाइपलाइन बिछाई गई थी। जिला प्रशासन की मध्यस्थता और निष्पक्ष जांच के बाद उद्योग द्वारा 40 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है। यह कदम किसानों के अधिकारों की सुरक्षा और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में एक बड़ी सफलता है।”

ऐश स्लरी पाइपलाइन परियोजना के फायदे

जिला प्रशासन ने यह भी रेखांकित किया कि विकास की गति रुकनी नहीं चाहिए, लेकिन वह पर्यावरण और आमजन के अनुकूल होनी चाहिए। इस ऐश स्लरी पाइपलाइन के चालू होने से क्षेत्र को निम्नलिखित प्रत्यक्ष लाभ मिल रहे हैं:

  1. पर्यावरण संरक्षण व प्रदूषण से मुक्ति: खुले डंपरों के स्थान पर पाइपलाइन के माध्यम से फ्लाई ऐश का बंद एवं वैज्ञानिक परिवहन होने से धूल और वायु प्रदूषण में भारी कमी आई है।
  2. सड़क हादसों में कमी: भारी वाहनों और ट्रिपरों का सड़कों पर दबाव कम होने से तमनार-घरघोड़ा मार्ग पर ट्रैफिक सुगम हुआ है और सड़क दुर्घटनाओं की आशंका घटी है।
  3. सड़कों का रखरखाव: भारी लोड वाली गाड़ियों की आवाजाही कम होने से स्थानीय ग्रामीण सड़कों की स्थिति बेहतर बनी रहेगी।

सुशासन और जन-विश्वास का नया अध्याय

छत्तीसगढ़ में नई सरकार के गठन के बाद से ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट संदेश दिया है कि राज्य में औद्योगिक विकास के साथ-साथ किसानों, आदिवासियों और गरीबों के हितों का संरक्षण पहली प्राथमिकता होगी।

रायगढ़ जिला प्रशासन की इस त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि यदि प्रशासन निष्पक्षता से काम करे, तो बड़े से बड़े औद्योगिक विवादों का समाधान शांतिपूर्ण और जनहितकारी तरीके से निकाला जा सकता है। इस फैसले से तमनार क्षेत्र के किसानों का शासन और प्रशासन के प्रति विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है।

निष्कर्ष

रायगढ़ जिले में 60 किसान परिवारों को ₹40 करोड़ की मुआवजा राशि मिलना केवल एक वित्तीय लेन-देन नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत के किसानों के संघर्ष, धैर्य और प्रशासनिक न्याय की जीत है। विकास और किसान हित जब एक साथ कदम मिलाते हैं, तभी वास्तविक सुशासन की स्थापना होती है।

(ग्रामीण भारत न्यूज के लिए रायगढ़ से अतुल अग्निहोत्री की विशेष रिपोर्ट)

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