ग्रामीण भारत न्यूज विशेष ग्राउंड रिपोर्ट
संवाददाता: विनिता चौहान स्थान: सरगुजा / रायपुर (छत्तीसगढ़) प्रकाशन तिथि: 02 अगस्त 2026
मुख्य आकर्षण (Highlights):
- दुखद हादसा: सरगुजा जिले के ग्राम रजपुरी कला (लखनपुर थाना क्षेत्र) में घटी रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना।
- मासूम शिकार: 5 महीने की दूधमुंही बच्ची त्रिशिका प्रजापति को घर के अंदर पालने से उठाकर ले गया बंदर।
- खौफनाक हरकत: मां के पीछे भागने पर बंदर ने मासूम को छत पर रखी पानी की टंकी में डाला।
- समय पर बचाव: परिजनों ने त्वरित तत्परता दिखाते हुए बच्ची को टंकी से निकाला; प्राथमिक उपचार के बाद जिला मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर रेफर किया गया।
- स्वास्थ्य अपडेट: डॉक्टरों के अनुसार बच्ची की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
- गंभीर मुद्दा: वनांचल से सटे गांवों में लगातार बढ़ रहा मानव-वन्यजीव संघर्ष, ग्रामीणों में दहशत का माहौल।
घटनाक्रम का पूरा ब्यौरा: चीख-पुकार के बीच बची मासूम की जान
सरगुजा/अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक बेहद हैरान और विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है, जहां एक बंदर की अमानवीय और खौफनाक हरकत के कारण पांच महीने की मासूम बच्ची की जान पर बन आई। यह दर्दनाक हादसा लखनपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम रजपुरी कला में शुक्रवार की शाम घटित हुआ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रजपुरी कला गांव के पास ही सघन वन क्षेत्र स्थित है। जंगल से भटक कर एक उत्पाती बंदर अचानक बस्ती में आ घुसा। बंदर सुदर्शन प्रजापति के मकान में चुपके से दाखिल हुआ। उस समय घर के अंदर पांच माह की नन्हीं बच्ची त्रिशिका प्रजापति अपने पालने में बेखबर सो रही थी। बंदर ने अचानक पालने पर झपट्टा मारा और सोती हुई दूधमुंही बच्ची को उठाकर अपने हाथों में दबोच लिया।
मां की मुस्तैदी और बंदर की खौफनाक हरकत
जैसे ही बच्ची की मां की नजर बंदर पर पड़ी और उन्होंने देखा कि वह उनकी मासूम बेटी को लेकर भाग रहा है, तो उनके होश उड़ गए। मां ने बिना एक पल गंवाए शोर मचाना शुरू किया और बंदर के पीछे भागीं। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग भी मौके की ओर दौड़े।
ग्रामीणों और मां को पीछे आते देख बंदर घबरा गया और बच्ची को लेकर तेजी से सीढ़ियों के रास्ते छत की ओर भाग निकला। छत पर पहुंचते ही, पकड़े जाने के डर से बंदर ने खौफनाक कदम उठाया—उसने पांच महीने की त्रिशिका को छत पर रखी पानी से लबालब भरी प्लास्टिक की टंकी के अंदर फेंक दिया और वहां से छलांग लगाकर भाग खड़ा हुआ।
बचाव कार्य और तत्काल चिकित्सा सहायता
मां और परिजनों ने जब देखा कि बंदर ने बच्ची को पानी की टंकी में गिरा दिया है, तो वे तुरंत छत पर पहुंचे। परिजनों ने बिना कोई देरी किए तुरंत टंकी में हाथ डालकर डूब रही मासूम त्रिशिका को बाहर निकाला। पानी में गिर जाने के कारण बच्ची अत्यधिक भयभीत थी और सांस लेने में तकलीफ का सामना कर रही थी।
अस्पताल में भर्ती और डॉक्टरों की राय
परिजनों और ग्रामीणों की मदद से बच्ची को तत्काल नजदीकी लखनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार देकर बच्ची को संभाला, लेकिन उसकी नाजुक स्थिति और फेफड़ों में पानी जाने की आशंका को देखते हुए उसे तुरंत जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल, अंबिकापुर के लिए रेफर कर दिया गया।
अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में शिशु रोग विशेषज्ञों की निगरानी में बच्ची का गहन उपचार शुरू किया गया। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जे.के. रेलवानी ने बच्ची के स्वास्थ्य के संबंध में जानकारी देते हुए बताया:
“बच्ची को जब अस्पताल लाया गया था, तब वह काफी डरी हुई थी और पानी में जाने के कारण उसे श्वास संबंधी असहजता थी। डॉक्टरों की टीम ने तुरंत आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रिया शुरू की। फिलहाल बच्ची की हालत में लगातार सुधार हो रहा है और उसकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है। उसे निगरानी में रखा गया है।”
मानव-वन्यजीव संघर्ष: वनांचल क्षेत्र में गहराता संकट
सरगुजा और आसपास का वनांचल इलाका प्राकृतिक रूप से समृद्ध है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जंगलों की कटाई, खाद्य पदार्थों की कमी और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में मानवीय हस्तक्षेप के कारण जंगली जानवर अब इंसानी बस्तियों का रुख करने लगे हैं।
ग्रामीणों में आक्रोश और दहशत
ग्राम रजपुरी कला के निवासियों का कहना है कि जंगलों से बंदरों, भालुओं और अन्य जंगली जानवरों का बस्तियों में आना अब आम बात होती जा रही है। बंदर न केवल फसलों और घरों में रखे अनाज को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि बच्चों और बुजुर्गों पर हमला करने से भी नहीं चूकते। शुक्रवार की इस घटना के बाद से पूरे गांव में दहशत का माहौल है। माता-पिता अपने छोटे बच्चों को घर के अंदर भी अकेला छोड़ने से डर रहे हैं।
ग्रामीणों ने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी व्यक्त की है। उनका आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद वन विभाग द्वारा उत्पाती बंदरों और हिंसक जानवरों को पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते।
प्रशासन एवं वन विभाग से मांगें
‘ग्रामीण भारत न्यूज’ के माध्यम से स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने शासन-प्रशासन से निम्नलिखित मांगें उठाई हैं:
- उत्पाती बंदरों को पकड़े वन विभाग: गांव और आसपास के इलाकों में मंडरा रहे आवारा और हिंसक बंदरों को रेस्क्यू कर सुरक्षित घने जंगलों में छोड़ा जाए।
- पीडित परिवार को मुआवजा: मासूम बच्ची के पूरे इलाज का खर्च राज्य सरकार उठाए तथा पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
- सुरक्षात्मक गश्त: जंगल से सटे ग्रामीण इलाकों में वन विभाग की टीम नियमित गश्त लगाए ताकि जंगली जानवर बस्तियों तक न पहुंच सकें।
- जागरूकता अभियान: ग्रामीणों को ऐसे आकस्मिक हमलों से बचने और बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी एहतियाती उपायों के प्रति जागरूक किया जाए।
निष्कर्ष एवं अपील
यह घटना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि वनांचल क्षेत्रों में मानव और वन्यजीवों के बीच का संतुलन किस कदर बिगड़ रहा है। यदि समय रहते वन विभाग और जिला प्रशासन ने इस दिशा में कड़े कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में और भी गंभीर हादसे देखने को मिल सकते हैं।
‘ग्रामीण भारत न्यूज’ सुदर्शन प्रजापति के परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता है और ईश्वर से मासूम त्रिशिका के शीघ्र और पूर्ण स्वस्थ होने की कामना करता है। साथ ही, हम शासन-प्रशासन से अपील करते हैं कि ग्रामीण अंचलों में सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता किया जाए ताकि कोई और मासूम ऐसी दुर्घटना का शिकार न बने।
(ग्रामीण भारत न्यूज के लिए सरगुजा से विनिता चौहान की विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट)
बोल बम सावन महासेल
कांवड़ यात्रा के लिए स्पेशल भगवा कपड़े
पुरुष कुर्ता भगवा: https ://www.amazon.in/s?k=bhagwa+kurta+men&tag=graminbharatnews21
महिला सूट भगवा: https ://www.amazon.in/s?k=bhagwa+suit+women&tag=graminbharatnews21
बच्चों के भगवा कपड़े: https ://www.amazon.in/s?k=bhagwa+dress+kids&tag=graminbharatnews21
कांवड़ बैग + गमछा: https ://www.amazon.in/s?k=kanwar+bag+gamcha&tag=graminbharatnews21
आरामदायक चप्पल: https ://www.amazon.in/s?k=walking+slippers&tag=graminbharatnews21
भगवा टोपी + बैंड: https ://www.amazon.in/s?k=bhagwa+cap+band&tag=graminbharatnews21
हर हर महादेव





















