ग्रामीण भारत न्यूज़ विशेष पड़ताल
ग्राउंड रिपोर्ट: अनुप कश्यप, संवाददाता (ग्रामीण भारत न्यूज़) मंच: जय चौहान समाज एकता मंच
भारतीय सामाजिक व्यवस्था में ‘डांडा समाज’ की अपनी एक अलग, विशिष्ट और गौरवशाली पहचान रही है। आदिकाल से ही यह समाज अपनी एकजुटता, आपसी भाईचारे और उच्च सांस्कृतिक मूल्यों के लिए जाना जाता है। बदलते परिवेश के साथ, समाज के प्रबुद्ध नागरिकों ने अपनी सुविधानुसार क्षेत्रीय स्तर पर विचारों के सकारात्मक आदान-प्रदान और समाज के उत्थान के लिए विभिन्न संगठनों एवं समूहों का निर्माण किया है। लेकिन, विडंबना यह है कि जहाँ समाज का एक बड़ा तबका एकजुटता के लिए दिन-रात प्रयासरत है, वहीं कुछ स्वार्थी तत्व समाज की इस अखंड एकता को भंग करने के कुप्रयासों में लगे हुए हैं।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन और भड़काने की राजनीति ग्रामीण भारत न्यूज़ की इस विवेचनात्मक पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि वर्तमान में समाज के भीतर कुछ ऐसे लोग सक्रिय हो गए हैं, जो खुद को स्वयंभू नेता मानते हैं। जब कोई भी स्वतंत्र व्यक्ति सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता है या एक समूह से दूसरे समूह में जुड़ता है, तो ये तथाकथित नेता उन्हें व्यक्तिगत रूप से संदेश (मैसेज) भेजकर भड़काने और मानसिक दबाव बनाने का निंदनीय कार्य करते हैं।
सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि ऐसे लोग अपनी गलतियों को कभी स्वीकार नहीं करते। वे इस बात पर रत्ती भर भी आत्ममंथन करने को तैयार नहीं हैं कि बार-बार सामाजिक मंचों पर उनके मनमाने रवैये के कारण ही समाज के लोग उन्हें नकार रहे हैं।
जमीनी हकीकत बनाम ‘मोबाइल नेतृत्व’ एक सच्चे सामाजिक संगठन की पहचान यह होती है कि उसके पदाधिकारी धरातल पर उतरकर काम करते हैं, लोगों के दुख-दर्द को समझते हैं और जनता से सीधा संवाद स्थापित करते हैं। ऐसे कर्मठ लोगों को समाज का हर वर्ग सिर-आँखों पर बिठाता है।
इसके ठीक विपरीत, आज समाज में कुछ ऐसे लोगों ने अपने गुट बना लिए हैं जिनका धरातल पर योगदान शून्य है। ये ऐसे लोग हैं जो स्वयं कोई जमीनी कार्य नहीं कर सकते, बल्कि केवल मोबाइल के माध्यम से फरमान जारी करते रहते हैं। ये ‘मोबाइल नेता’ लोगों पर अनैतिक दबाव बनाते हैं, यही कारण है कि समाज अंततः ऐसे अहंकारियों को दरकिनार कर देता है।
गरियाबंद का मामला: मधुसूदन कुमार का खोखला नेतृत्व और अड़ियल रवैया समाज में पनप रही इस तानाशाही का सबसे प्रत्यक्ष उदाहरण गरियाबंद क्षेत्र से सामने आया है। अपने आप को तथाकथित नेता कहलाने और फूल-मालाएं पहनने के शौकीन मधुसूदन कुमार (एम.एस.) को दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने खुद के इतिहास में झांक कर देखना चाहिए। सवाल यह है कि आखिर उन्होंने समाज के लिए आज तक किया ही क्या है?
आज जब समाज के जागरूक और कर्मठ लोग दिन-रात एक करके, सड़कों पर उतरकर प्रशासन से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, तब मधुसूदन कुमार किसी भी संघर्ष या मोर्चे पर मौजूद नहीं रहते। इनकी झोली में समाज हित से जुड़ी ऐसी कोई भी उपलब्धि नहीं है, जिसके आधार पर लोग इन्हें अपना नेता मानें या स्वीकार करें। उनके इसी अड़ियल रवैये, अहंकार और दूसरों पर हावी होने की मानसिकता के कारण ही लोग उन्हें और उनके संगठन को छोड़कर भागने को मजबूर हो गए हैं। कई बार ऐसा होने के बावजूद वे अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं।सभी मैसेज प्रमाण के तौर पर है एक मैसेज स्किनशाट अटैच है।जो कानूनी कार्यवाही के लिये पर्याप्त है।
निष्कर्ष और समाज से अपील ग्रामीण भारत न्यूज़ इस रिपोर्ट के माध्यम से यह स्पष्ट करना चाहता है कि समाज किसी की निजी जागीर नहीं है। जो लोग स्वयं धरातल पर कोई सकारात्मक कार्य नहीं कर सकते और केवल पद, माला या झूठे सम्मान के भूखे हैं, उनके खिलाफ चौहान समाज को अब एकजुट होकर उचित कार्यवाही करनी चाहिए।
जय चौहान समाज एकता मंच के माध्यम से हम समाज के सभी जागरूक नागरिकों से विनम्र आग्रह करते हैं कि मधुसूदन कुमार जैसे भ्रामक, मनमानी करने वाले और स्वार्थी तत्वों से स्वयं को बचाएं और अपनों को भी सचेत करें। सामाजिक एकता में अनेकता और द्वेष फैलाने वाले ऐसे विघटनकारी चेहरों से दूर रहना ही समाज के हित में है।
– जय चौहान समाज





















