संवाददाता विनोद चौहान | ग्रामीण भारत न्यूज
कोरबा। औद्योगिक क्षेत्र में लंबे समय से तकनीकी और इंजीनियरिंग से जुड़ी जिम्मेदारियों को पुरुषों का क्षेत्र माना जाता रहा है, लेकिन अब यह धारणा तेजी से बदल रही है। कोरबा स्थित भारत एल्युमिनियम कंपनी (बालको) में कार्यरत महिला इंजीनियरों ने उत्पादन, प्रचालन, बिजली व्यवस्था और सुरक्षा जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में अपनी कार्यक्षमता साबित कर नई मिसाल कायम की है। अंशिका सिंह और अरुणा की उपलब्धियां इस बदलाव की प्रेरणादायक तस्वीर पेश करती हैं।
चुनौतीपूर्ण कास्ट हाउस में अंशिका ने बनाई पहचान
बालको में कार्यरत अंशिका सिंह ने इंदौर की आइपीएस एकेडमी से रासायनिक अभियांत्रिकी की पढ़ाई पूरी की। बालको से जुड़ने के बाद उन्हें एल्यूमिनियम उद्योग के चुनौतीपूर्ण कास्ट हाउस में काम करने का अवसर मिला। शॉप फ्लोर जैसे क्षेत्र में शुरुआती दिनों में उनके सामने कई चुनौतियां थीं।
अंशिका के अनुसार, शुरुआत में सहकर्मियों का विश्वास हासिल करना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। हालांकि वरिष्ठ अधिकारियों के सहयोग और नए विचारों पर काम करने के अवसर ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। उन्होंने लगातार मेहनत और तकनीकी दक्षता के बल पर अपनी अलग पहचान बनाई।
अंशिका ने प्रबंधन के सहयोग से कर्मचारियों के बेहतर प्रदर्शन को प्रोत्साहित करने के लिए सम्मान एवं पुरस्कार की पहल भी शुरू की। इससे कर्मचारियों का उत्साह बढ़ाने और टीम के प्रदर्शन में सुधार लाने में मदद मिली।
आज शॉप फ्लोर पर अंशिका की पहचान केवल एक महिला इंजीनियर के रूप में नहीं, बल्कि उनकी तकनीकी क्षमता और उपलब्धियों के आधार पर होती है। उनका मानना है कि महिलाओं को अवसर और जिम्मेदारी मिले तो वे औद्योगिक क्षेत्र में किसी भी चुनौती का सामना कर सकती हैं।
अरुणा ने बिजली बैकअप व्यवस्था को बनाया बेहतर
बालको में कार्यरत अरुणा ने एनआईटी सिक्किम से विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक्स अभियांत्रिकी की पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी करने के बाद सीधे औद्योगिक संयंत्र में काम शुरू करना उनके लिए एक नया अनुभव था। शुरुआती झिझक के बावजूद सहकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों के सहयोग ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया।
बीते चार वर्षों में अरुणा ने अपनी जिम्मेदारियों को पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभाते हुए अलग पहचान बनाई। उनकी टीम को बालको में बिजली की बैकअप व्यवस्था को और बेहतर बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी।
टीम ने बिजली बैकअप सिस्टम को स्काडा प्रणाली के माध्यम से केंद्रीकृत किया। इसके जरिए अलग-अलग आंकड़ों की निगरानी और विश्लेषण करना आसान हुआ। संभावित समस्याओं की पहले पहचान कर समय रहते आवश्यक कदम उठाने से बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिली।
उत्कृष्ट कार्य के लिए मिला सीईओ अवार्ड
बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने की इस पहल में महत्वपूर्ण योगदान के लिए अरुणा को बालको के सर्वोच्च सम्मानों में शामिल सीईओ अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि उनके तकनीकी कौशल, नेतृत्व क्षमता और टीम के साथ प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता को दर्शाती है।
महिलाओं के लिए खुल रहे नए अवसर
अंशिका और अरुणा की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह औद्योगिक क्षेत्र में बदलते कार्य वातावरण का भी संकेत देती है। उत्पादन, खनन, प्रचालन, बिजली व्यवस्था और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में महिलाएं लगातार अपनी भागीदारी बढ़ा रही हैं।
तकनीकी दक्षता, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता के साथ महिला इंजीनियर उन क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना रही हैं, जिन्हें कभी मुख्य रूप से पुरुषों से जोड़कर देखा जाता था।
नई पीढ़ी के लिए बनीं प्रेरणा
इन महिला इंजीनियरों की सफलता से यह संदेश मिलता है कि प्रतिभा और मेहनत के सामने लिंग आधारित धारणाएं टिक नहीं सकतीं। यदि महिलाओं को समान अवसर, सुरक्षित कार्य वातावरण और जिम्मेदारी निभाने का भरोसा दिया जाए तो वे उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
अंशिका और अरुणा जैसी महिला इंजीनियर आज नई पीढ़ी की युवतियों के लिए प्रेरणा बन रही हैं। उनकी कहानी यह बताती है कि तकनीकी शिक्षा, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर महिलाएं औद्योगिक क्षेत्र में न केवल अपना स्थान बना सकती हैं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका भी निभा सकती हैं।
ग्रामीण भारत न्यूज के लिए संवाददाता विनोद चौहान की रिपोर्ट।





















