उज्जैन/भोपाल | संवाददाता झसकेतन राजहंस
मध्य प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी उज्जैन में अब एक और बड़े पर्यटन केंद्र के विकास की तैयारी शुरू हो गई है। महाकाल लोक की तर्ज पर यहां ऐतिहासिक ‘बुद्ध लोक’ विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। इसके केंद्र में करीब 2200 वर्ष पुराना वैश्य टेकरी स्तूप होगा, जिसे ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
मध्य प्रदेश सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए स्तूप क्षेत्र में पुरातात्विक उत्खनन की अनुमति के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के भोपाल मंडल तथा प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की ओर से इस प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया की जा रही है। उत्खनन की अनुमति मिलने के बाद ही स्तूप के वास्तविक स्वरूप, संरचना और ऐतिहासिक महत्व से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की उम्मीद है।
सांची से भी बड़ा माना जाता है वैश्य टेकरी स्तूप
उज्जैन का वैश्य टेकरी स्तूप इतिहास और पुरातत्व की दृष्टि से खास महत्व रखता है। इतिहासकारों के अनुसार इसका निर्माण मौर्यकाल में करीब 2200 वर्ष पहले हुआ माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इसका संबंध सम्राट अशोक और उनकी पत्नी देवी से भी जोड़ा जाता है।
प्रारंभिक अनुमानों में स्तूप की ऊंचाई करीब 100 फीट और व्यास लगभग 350 फीट बताया जाता है। इस लिहाज से इसे सांची के प्रसिद्ध स्तूप से भी विशाल माना जाता है। हालांकि इसके वास्तविक आकार और संरचना की पुष्टि व्यापक पुरातात्विक उत्खनन के बाद ही हो सकेगी।
उत्खनन के बाद तय होगी संरक्षण और विकास की योजना
सरकार का उद्देश्य केवल पुरातात्विक स्थल की खुदाई तक सीमित नहीं है। उत्खनन के बाद सामने आने वाले ऐतिहासिक अवशेषों और संरचनाओं के आधार पर इनके संरक्षण की योजना तैयार की जाएगी। इसके साथ ही पूरे क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की दिशा में काम किया जा सकता है।
प्रस्तावित ‘बुद्ध लोक’ उज्जैन को धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ बौद्ध इतिहास और संस्कृति से जुड़े पर्यटन का भी महत्वपूर्ण केंद्र बना सकता है।
सारनाथ से उज्जैन तक जुड़ सकता है बौद्ध पर्यटन सर्किट
वैश्य टेकरी को विकसित करने के साथ ही उत्तर प्रदेश के सारनाथ से मध्य प्रदेश के उज्जैन तक बौद्ध पर्यटन सर्किट विकसित करने की संभावना भी जताई जा रही है। इस संभावित सर्किट में रीवा का देऊर कोठार, सतना का भरहुत, कटनी, सागर और सांची जैसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं बौद्ध स्थलों को जोड़े जाने की संभावना है।
यदि यह योजना आकार लेती है तो देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से आने वाले बौद्ध अनुयायियों और इतिहास प्रेमी पर्यटकों के लिए मध्य प्रदेश में एक नया पर्यटन मार्ग तैयार हो सकता है।
1938-39 में भी हुई थी खुदाई की कोशिश
वैश्य टेकरी स्तूप का रहस्य करीब नौ दशक पुराना भी है। उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार वर्ष 1938-39 में यहां उत्खनन का प्रयास किया गया था। उस दौरान जमीन के भीतर से कथित रूप से गैस रिसाव की घटना सामने आई थी और खुदाई में काम कर रहे कुछ मजदूरों के बेहोश होने के बाद कार्य रोक दिया गया था।
अब लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर इस ऐतिहासिक स्थल की वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से पुरातात्विक जांच की तैयारी की जा रही है।
अनुमति के बाद आगे बढ़ेगी योजना
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला के अनुसार वैश्य टेकरी में उत्खनन के लिए राज्य सरकार की ओर से केंद्र को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। केंद्र से स्वीकृति मिलने और उत्खनन के परिणाम सामने आने के बाद ही ‘बुद्ध लोक’ के निर्माण एवं विकास की विस्तृत कार्ययोजना तय की जाएगी।
उज्जैन पहले से ही महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के कारण देश-दुनिया में धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में यदि वैश्य टेकरी को ‘बुद्ध लोक’ के रूप में विकसित किया जाता है, तो शहर की पर्यटन पहचान और भी व्यापक हो सकती है। इससे उज्जैन में धार्मिक पर्यटन के साथ इतिहास, पुरातत्व, बौद्ध संस्कृति और विरासत पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
ग्रामीण भारत न्यूज | संवाददाता झसकेतन राजहंस





















